चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, November 08, 2013

"मेरा रूप" (चर्चा मंच 1423)

 नमस्कार! 
मैं राजेन्द्र कुमार 
शुक्रवार की चर्चा में  
आप सबका हार्दिक अभिनन्दन करता  हूँ! 

लख्मी चंद कोहली
छवियों से निकलते समय को कहाँ से देखूँ? उसके ऊपर जाकर, उसके भीतर से, उसके साथ से या उसको अपने भीतर ही ले लूँ। मेरा उसको वश में करना या मेरे वश में हो जाने की कग़ार एक समतलिये जमीन सी लगती है, और उसी जमीन पर जीने लगी है जैसे - पर ये मेरी नहीं है, मेरे होने से इसका अक़्स बनता है जिससे मेरा रूप तैयार होता है।
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किरण आर्या

सफलता आसमान पर 
बिठा देती है इंसान को 
मन लेता है हिलोरे 
चाहतें है कहती 
आसमां तू छू ले
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सुरेश स्वप्निल
घर से बाहर निकलो
तो जांचते जाना
कि कहीं कैमरे तो नहीं लगे
आबादी से दूर आते ही
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यशोदा अगवाल 
बात बेबात की बातों में तो पैदा न करो
चोट पर चोट न दो ज़ख्म को गहरा न करो

हम ग़रीबों के मकानात टपकते हैं बहुत
बादलो खेत पे बरसो यहां बरसा न करो
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विशाल चर्चित/ई.प्रदीप कुमार 
क्यों रे  दीपक
 क्यों जलता है 
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अँधेरी रात में दिया कौन जलाये

गरिमा 
अँधेरी रात है कौन दिया जलाये
कोई प्रकाश की किरन नहीं
कौन जग में दिया जलाये
कल्पना के बीज बो दिए
पर उजाले में वो दिवास्वप्न लगता है,
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हर्षवर्धन त्रिपाठी
हाल ही में फिल्म मद्रास कैफे टेलीविजन पर देखी। फिल्म में रॉ के एजेंट के तौर पर जाफना गए और फिर वापस आए जॉन अब्राहम की दुविधा उसमें अच्छे से दिखी है। खुद कैबिनेट सेक्रेटरी के लिए राजीव गांधी की सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण हो जाती है। हालांकि,
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अनिता 
[IMG_1130mr1.jpg]
‘समाधि सुखः लोकानन्दः’ समाधि से प्राप्त सुख लोक के सुख का कारण भी बनता है, तथा लोक में हमें जो भी आनन्द मिलता है वह समाधि से ही प्राप्त है. उगते हुए सूर्य को देखकर जो हम चकित से रह जाते हैं, अनजाने 
रविकर जी
फटा कलेजा भूप का, सुना शब्द विकलांग |
सुता हमारी स्वस्थ हो, जो चाहे सो मांग ||

भूपति की चिंता बढ़ी, छठी दिवस से बोझ |
तनया की विकृति भला, कैसे होगी सोझ ||
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सरिता भाटिया 
मैया मेरी त्यौहार में रखना मेरी लाज 
मिठाई के जगह अबकी तुम ले आना प्याज |

भैया दूज आ गया सब अतिथि हैं आये
सब्जी,सलाद बिन प्याज के उनको नहीं है भाये |
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यशवंत यश 
मन भिगोती हैं, देखो बरसती ये बूंदें मुस्कुरा कर गिरती हैं,
 कहीं खो जाती हैं ये बूंदें हर बार सोचता हूँ..
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विभा रानी जी 
मुझसे बेहतर मुझे ,
कौन जान सका है …। 
मेरे बारे कौन ,
क्या कहता है
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राजीव कुमार झा

उत्तर भारत में,खासकर गर्मियों में,बिजली की समस्या काफी गंभीर हो जाती है.राज्यों की विद्युत उद्पादन क्षमता काफी सीमित है.ऐसे में केन्द्रीय पूल से निर्धारित किये गए कोटे से ही राज्यों को मिलने वाली बिजली पर संतोष करना पड़ता है.कभी-कभी तो इसमें भी कटौती की जाने लगती है.ऐसे में बिजली कटौती,लोगों का जीना मुहाल कर देती है.
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सदा 

ना शिकायत मुझे तुमसे है, 
ना ही समय से, ना किसी और से
बस है तो अपने आप से 
हर बार हार जाती हूँ तुम से
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वीरेन्द्र कुमार शर्मा 
प्रश्न :कैसे काम करता है हमारा इम्यून सिस्टम (रोगप्रतिरोधी तंत्र )?
कैसे रखा जाए इसे दुरुस्त ?
त्तर :कुदरत के बख्शे हुए इस रोग प्रति -रक्षा कवच पर हमारा ध्यान तभी जाता है जब हम बीमार पड़ जाते हैं। और डॉकटर कहे -You have a compromised immune system .
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"दोहावली"

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जो मन में हो आपके, लिखो उसी पर लेख।
बिना छंद तुकबन्दियाँ, बन जाती आलेख।१।
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मन पंछी उन्मुक्त है, इसकी बात न मान।
जीवन एक यथार्थ है, इसको लेना जान।२।
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 तकनिकी खामियों के चलते आज  का चर्चा यहीं समाप्त करना पड़ रहा है,पर  आगे जारी  है
 'मयंक का कोना'
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छाती ठोक कर गूगल का डाका ! 
कर लो क्या करना है !!
google-bspabla
ज़िंदगी के मेले पर बी एस पाबला

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कुछ शब्द युवाओं से --" लक्ष्य "...

सादर ब्लॉगस्ते! पर Annapurna Bajpai 

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वादियों के गुलाब मुंह फुलाए बैठे हैं....!!!

खामोशियाँ...!!! पर rahul misra 

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लगा अब दांव पर परिवार का सम्मान है
लबों से आज गायब हो गई मुस्कान है 
अजब सी अब परेशानी लिए इन्सान है 
 कभी तो दिन भी बदलेंगे ,मिलेगा चैन तब 
दुखों का अंत होगा तब यही अनुमान है ...
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया

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बदलते मौसम...

स्पंदन  पर  shikha varshney

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टहलते दरख़्त

ज़रूरत पर Ramakant Singh 

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शान्ति दूत ...

 सफ़ेद पर लिखूँ या काले पर 
उजले पर लिखूँ या मैले पर लिखूँ क्रंदन पर 
या दोनों के बन्धन पर
 बुरके में ढँके हुए तन पर 
या कपोत के स्वच्छंद मन पर लिख दूँ 
दोनों की आँखों के भावों पर 
या इनके अनदेखे घावों पर ...
मेरे मन की पर Archana 
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पता कहाँ होता है किसे कौन कहाँ पढ़ता है
साफ सुथरी सफेद एक दीवार के सामने खड़े होकर 
बड़बड़ाते हुऐ कुछ कह ले जाना 
जहाँ पर महसूस ही नहीं होता हो किसी का भी आना जाना 
उसी तरह जैसे हो एक सफेद बोर्ड खुद के पढ़ने पढ़ाने के लिये 
उस पर सफेद चॉक से कभी कुछ कभी सबकुछ लिख ले जाना 
फर्क किसे कितना पड़ता है ...
उल्लूक टाईम्स पर सुशील कुमार जोशी

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Got milk ?Limit it to 2 cups
Young children who drink cow's milk should be limited to 2 cups a
day ,according to a study published in Pediatrics .Researchers
assessed the amount of milk that more than 1,300 children ages 2
to
5 drank .They found that drinking two cups of milk was sufficient
to maintain their vitamin D levels without decreasing their iron
stores .
More than that amount can lower the children's supply iron supply ,
but less may not provide enough vitamin D....

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खुद को कांग्रेस का चाणक्य समझने वाला 
भोपाली मदारी , तो देश की राजनीति पे छा चुके सूर्य को ,
बी जे पी के लिए ख़तरा बता रहा हैगुरु और चेले में अनमेल 
देश की वर्त्तमान (कोंग्रेस )राजनीति का यह दुर्भाग्य है गुरु अति शातिर है
और चेला मंद बुद्धि है। अब विज्ञान भले जितनी  तरक्की कर ले मंगल पे
बस्ती बना ले मंद बुद्धि को कुशाग्र वह नहीं बना सकता।
देश के हित में यही होगा गुरु देश विरोधी चालें चलनी बंद करे। और चेला
अपना गुरु बदल ले।

--
Jawaharlal Nehru called 
Sardar Patel a 'total communalist', 
says Advani
Another controversy has been sparked by Bharatiya Janata Party (BJP) over India's first home 
minister Sardar Vallabh Bhai Patel, who was was also known as the "Iron Man of India". Senior 
BJP leader LK Advani on Tuesday said quoting a book that former prime minister Jawaharlal 
Nehru called Sardar Patel a "total communalist" when the latter suggested that army be sent to 
take over a defiant Hyderabad after Independence. In his latest blog posting, Advani has ...

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Don't stress out Chronic stress taxes your body with a "fight or flight "response
THE TRUTH ABOUT YOUR Immune system Common sense tips on how to protect yourself during cold and flu season
सवाल आपकी सेहत के ज़वाब माहिरों के (दूसरी क़िस्त )
?रोग प्रतिरक्षा प्रणाली को पुख्ता बनाये रखने के लिए क्या करें ?
उत्तर :
Remember to stay hydrated .
सर्दी के मौसम में प्यास कम लगती है इसका मतलब यह नहीं है पानी
बिल्कुल  न पीयें दूसरे पेय (चीनी की लोडिंग न हो,चीनी बिलकुल न हो तो
और भी बेहतर मसलन वेजिटेबल सूप  )ले सकते हैं।कुलमिलाकर
फ़लुइड्स की पर्याप्त आपूर्ति ज़रूरी है ताकि नासिका झिल्लियाँ (nasal
membranes )तथा sinus passages नम रहें ,कंजेशन न रहे।

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मोटा नियम है गहरे रंग के फल और तरकारियाँ, 
यही आपके रोग रोधी तंत्र के प्रहरियों की
 टूट फूट की भरपाई करके 
एक एंटीऑक्सीडेंट कवच मुहैया करवाएंगी
सवाल आपकी सेहत के ज़वाब माहिरों के (तीन किस्तों में समाप्य )
प्रश्न :कैसे काम करता है हमारा इम्यून सिस्टम (रोगप्रतिरोधी तंत्र )?कैसे
रखा जाए इसे दुरुस्त ?..

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बाल साहित्य

sapne(सपने) पर shashi purwar

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"खों-खों करके बहुत डराता"
बालकृति नन्हें सुमन से

एक बाल कविता
"खों-खों करके बहुत डराता"


बिना सहारे और सीढ़ी के,
झटपट पेड़ों पर चढ़ जाता।
गली मुहल्लों और छतों पर,
खों-खों करके बहुत डराता।

कोई इसको वानर कहता,
कोई हनूमान बतलाता।
मानव का पुरखा बन्दर है,
यह विज्ञान हमें सिखलाता।

लाठी और डुगडुगी लेकर,
इसे मदारी खूब नचाता।
यह करतब से हमें हँसाता,
पैसा माँग-माँग कर लाता।

जंगल के आजाद जीव को,
मानव देखो बहुत सताता।
देख दुर्दशा इन जीवों की,
तरस हमें इन पर है आता।।
नन्हे सुमन

11 comments:

  1. suprabhat mayank ji bahut sundar prastutikaran , tahe dil se abhaar hamen parivar me shamil karne hetu . pure parivar ko namaskaar aur suprabhat

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  2. बहुत सुंदर चर्चा,राजेंद्र जी. मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.

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  3. राजेंद्र जी के सुंदर प्रयास के साथ मयंक का कोना जैसे हो सोने पर सुहागा ! उल्लूक की रचना "पता कहाँ होता है किसे कौन कहाँ पढ़ता है" को जगह मिली बहुत बहुत आभार !

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  4. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार चर्चा मंच-

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  5. राजेन्द्र भाई सुसज्जित चर्चामंच एवं मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार

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  6. गुरु जी प्रणाम मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

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  7. छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनायें
    मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार + धन्यवाद आपका.

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  8. बहुत सुन्दर सार्थक चर्चा प्रस्तुति
    आभार!

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  9. सुन्दर और सधी हुई चर्चा।
    भाई राजेन्द्र कुमार जी आपका आभार।

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  10. बहुत शानदार चर्चा राजेन्द्र जी आपको बहुत बहुत बधाई

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