चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, November 15, 2013

"आज के बच्चे सयाने हो गये हैं" (चर्चा मंचःअंक-1430)

मित्रों!
आज आदरणीय राजेन्द्र कुमार जी ने सूचित किया है 
कि आज उनके यहाँ नेट का सर्वर डाउन है।
इसलिए शुक्रवार की चर्चा में मेरी पसंद के लिंक देखिए।
सभी रचनाकारों से यह भी निवेदन है कि 
वे धन्यवाद की मेल चर्चा मंच को भेजकर 
अपना समय नष्ट न करें।
यदि यह समय आप चर्चा में लगे हुए 
किसी लिंक पर कमेंट देने में लगायेंगे
तो मुझे अतीव प्रसन्नता होगी।
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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बाल दिवस : एक आयोजन !!

 चारों ओर चुनावी चर्चे , 
माँ ! हम अपना फ़र्ज़ निभाएं | 
कौन पार्टी 'आमों ' वाली ; थोड़े आम चलो ले आएँ .....
शुभ बाल दिवस....!
ज्योति-कलश
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हैप्पी चिल्ड्रन्स डे..

आज के बच्चे ,बच्चे नही रहे ,सयाने हो गये है ...इस बात का कोई उल्टा -सुल्टा मतलब न निकालिये ,सच ,आज के बच्चे हमारी जेनरेशन के लोगों से बहुत ज्यादा समझदार ,जानकर हो गये है ...
प्रियदर्शिनी........ पर प्रियदर्शिनी तिवारी
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! कौशल ! परS halini Kaushik 

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वो आधे चाँद कि अधूरी रात, 
वो अनछुआ अहसास.... 
वो अनकहे जज़्बात, 
आज फिर बहुत याद आयी, 
तुम्हारे साथ गुजरी... 
वो अधूरी रात....
'आहुति' पर sushma 'आहुति'
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मेरा परिचय
अनुलता
आस पास कुछ नया नहीं....
सब वही पुराना,
लोग पुराने
रोग  पुराने
रिश्ते नाते और उनसे जन्में शोक पुराने |
नित नए सृजन करने वाली धरती को 
जाने क्या हुआ...

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अल्पज्ञानी पति ने 
अपने व् पत्नी के टेस्ट करवाए 
रिपोर्ट लेकर 
फेमिली डॉक्टर के पास 
दौड़े आये 
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डॉक्टर ने कहा दिल थाम लो 
खुद को जरा संभाल लो 
बी पी ने किया है 
किडनी पर वार 
किडनी फेल होने के 
तुम्हारी पत्नी के पूरे हैं आसार...
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स्वप्न बिकते है
 स्वप्न बिकते है बोलो  खरीदोगे
कोई रोजगार  का स्वप्न बेचता
 तो नेता महगाई कम करने का
गरीबी हटाने का
साधू बेचते है भगवान को...

मेरा फोटो
aashaye पर garima 
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लगे डॉक्टर हर्ष पर, फिर झूठा आरोप 
खता लता की बता के, जता रहे हैं रोष | 
सावरकर-नाटक खले, दल्ले खोते होश | 
दल्ले खोते होश, बड़े झंडे के तल्ले | 
मांगे सत्ता कोष, अकेले सतत निठल्ले ...
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर

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कविता

उसने सोचा चलो खेलते हैं 
एक अनोखा खेल 
खेल राजा-प्रजा का 
खेल ईनाम-सजा का। 
वैसा ही जैसे खेलते हैं बच्चे...
कविता मंच पर Rajesh Tripathi

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छड पी एम दा ख़्वाब, अरे हलवाई हरिया-
जरिया रोटी का अगर, होवे चाय दुकान | 
सदा बेचिए चाय ही, कर देना मत-दान...
रविकर की कुण्डलियाँ

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कडवी ज़िंदगी

बहुत कडवी है यह ज़िन्दगी
उतरती है सीने में
जला देती है जिगर.
आँखों के पानी में
घोले बिना ,
इसे पीना ...जीना
लगभग नामुमकिन....

My Photo
ज़िन्दगीनामा पर Nidhi Tandon 
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पुनर्जन्म की अवधारणा : 
कितनी सही

पुनर्जन्म को लेकर प्राचीन भारतीय साहित्य और पुराण कथाओं ने वैसे ही दुनियां भर में सरगर्मी फैला दी है.संभवतः इसीलिए अब यूरोप और अमेरिका जैसे नितांत आधुनिक और मशीनी देश भी पुनर्जन्म का वैज्ञानिक आधार खोजने लगे हैं.अमेरिका में वर्जीनियां विश्वविद्यालय ने तो एक परा – मनोविज्ञान विभाग ही खोल दिया है.इस विश्वविद्यालय ने भारत में अपने शोध के पश्चात् यह निष्कर्ष दिया कि भारत की यह धारणा सही है कि मनुष्य का पुनर्जन्म होता है. मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि मरणासन्न व्यक्ति को मृत्यु की अनुभूति हो जाती है....
देहात पर राजीव कुमार झा -
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लिखता हूँ इन्कलाब ,.
*उसके नोचे गए बदन की पड़ताल में 
दूरबीन लगाता है, 
बहसी घूमता है सरेआम, 
ये क़ानून तलाशता है -
लिखता हूँ इन्कलाब....
उन्नयन पर  udaya veer singh

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बचपन

भीख की आधी कटोरी मजबूरी से भरकर..... 
ज़िंदगी के ट्राफिक सिग्नल लांघता बचपन.... 
इसी तेज़ी मे जाने कितने झूठे नियम तोड़कर..... 
खुद को ठगा-ठगा हुआ सा मानता बचपन.....
खामोशियाँ...!!! पर rahul misra 
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लोक’ को गायब कर तंत्र की ही रक्षा

लो क सं घ र्ष !

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हाइकु बाल-दिवस

वीथी पर sushila 

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आया बाल दिवस ;
मुबारक हो तुमको .

नन्हे फरिश्तों के लिए;

हम तो हर पल जिए:
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रोज ही होना चाहिए बाल दिवस 

आज स्कूल बिना किताबों के, बिना कापियों के, 
बिना पेन्सिल-रबर आदि के जाना पड़ा. 
कल समझ नहीं आया था 
फिर मैडम जी ने बताया कि 
१४ तारिख को बाल दिवस है...
अक्षयांशी -- Akshayanshi
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बच्चे बनाएंगे डाक टिकट के लिए पेंटिंग 

यदि आप चाहते हैं कि आपकी बनाई हुई पेंटिंग 
डाक टिकट के रूप में जारी हो तो 
यह अवसर लेकर आया है डाक विभाग...
बाल-दुनिया
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मात्र 1500 रुपए में कनेक्टिविटी डिवाइस : 
यूएसबी डोंगल 

ultapulta
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....साँवली बिटिया -- रीना मौर्या 
रंग सांवला बिटिया का 
कैसे ब्याह रचाऊँगा 
बेटे जो होते सांवले...
शिव और कृष्णा उन्हें बनाता 
बेटी को क्या उपमा दिलाऊंगा ....


म्हारा हरियाणा
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फूलों के मौसम में... 

शाम अभी ढली नही 
सुबह अभी हुई नही 
आओ करें इंतजार 
गुनगुनी सी धूप में ठंडी-ठंडी बयार का 
ढलती हुई शाम का धुंधली सी सुबह का 
रूठी सी चांदनी में खोये...
मैं और मेरी कवितायेँ...
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.. ताकि फिर कोई " लंपट " न बने प्रधानमंत्री ! 

पांच छह महीने बाद देश में एक बार फिर 
लोकसभा का चुनाव हो जाएगा 
और जोड़-तोड़ के बाद कोई प्रधानमंत्री भी बन जाएगा, 
फिर अब तक के प्रधानमंत्रियों की तरह वो भी ...
आधा सच...
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Snoring May Not Be Good for Pregnancy 
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Pregnant women who snore three or more nights a week are more likely to have a cesarean section and smaller 
babies, a new study finds.
The findings suggest that treating snoring in pregnant women may help reduce health problems among newborns and 
he associated medical costs, according to the University of Michigan Health System researchers.

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रोजगार की तलाश में भटकते -भटकते
सबसे बड़ा शत्रु देश का?  
नेता नही तो कौन है ? 
भोली -भाली जनता क्या जाने , 
कैसी दिल्ली होती है ? 
कैसा  होता लाल किला....
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सूनी रह गई क्यारी....सुधीर बंसल 
बाद बहुत संघर्षों के। 
सज पाई बगिया में क्यारी। 
माली की इच्छा फूल हो नर। 
पर कली खिल गई नारी। 
माली-मालिन का खून सूख गया। 
दोनों की मति गई मारी...
हिन्दी कविताएँ
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मत कह बैठना कहानी में 
आज मोड़ है आ रहा
अब दिमाग मत लगाना 
ये मत सोचना शुरु हो जाना
लिखने वाला आगे अब 
शायद है कुछ नई कहाँनी सुनाने वाला 
ऐसा कुछ कहीं नहीं है ...
उल्लूक टाईम्स पर सुशील कुमार जोशी

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मधु सिंह : पोल ढ़ोल के खोल रहा है
 खडवा चन्दन  मधुरी  बाणी ,  देखो  कैसे बोल रहा है 
 दगाबाज की यही निशानी ,भेष बदल कर डोल रहा  है 

 बन छलिया  हैं रास रसाता,अपने को कांधा बतलाता
 बना-बना कर नये बहाने ,  झूंठ  हज़ारों   बोल रहा है...


मधु मुस्कान
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ओ ! पतझड़ के अंतिम त्रण--
निर्मलासिंह गौर की कविता
ओ ! पतझड़ के अंतिम त्रण, तुमने देखा है युग दर्पण
तुमने देखी है ज्योत्सना, तुमने देखा है चन्द्र ग्रहण
                                   ओ ! पतझड़ के अंतिम त्रण|
तुमने देखे हैं जन्मोत्सव, तुमने देखे हैं दाहकर्म
तुमने देखी है लूटमार, तुमने देखा है दानधर्म
तुमने देखी है बाढ़ कभी, देखा तुमने सूखा, अकाल
तुमने देखा है अनुद्धत, तुमने  ही देखा है धमाल
कैसे होता है नियम भंग, कैसे होता है अनुशासन
                                  ओ ! पतझड़ के अंतिम त्रण ।

सृजन मंच ऑनलाइन

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गोरी दुल्हन काला दूल्हा -
लघु कथा

भारतीय नारी पर shikha kaushik 

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तू रक़्स करे है कि....

डॉ. हीरालाल प्रजापति

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"ग़ज़ल-पहाड़ी रूप"

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"आँगन बाड़ी के हैं तारे" 
आँगन बाड़ी के हैं तारे।
बालक हैं  ये प्यारे-प्यारे।।
आओ इनका मान करें हम।
सुमनों का सम्मान करें हम।।
बाल दिवस हम आज मनाएँ।
नेहरू जी को शीश नवाएँ।।
जो थे भारत भाग्य विधाता।
बच्चों से रखते थे नाता।।
सबसे अच्छे जग से न्यारे।
बच्चों के हैं चाचा प्यारे।।

14 comments:

  1. उम्दा लिंक्स हैं
    पढ़ने का आनंद ही कुछ और होगा |

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  2. सुन्दर प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-
    शुभकामनायें चर्चा मंच-

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  3. चर्चामंच पर विविध रंगों के फूल खिले हैं आज ! बेहतरीन प्रस्तुति,आ. शास्त्री जी.
    मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.

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  4. बहुत मेहनत और मनोयोग से लगाई गई आज की कुछ अलग सी हट कर महसूस होती चर्चा में "उल्लूक" की मनोदशा को भी शामिल करने पर दिल से आभार !

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  5. gm frnds nice post computer and internet ke nayi jankaari tips trick and tech news ke liye click kare www.hinditechtrick.blogspot.com

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  6. मेरी रचना '' तू रक़्स करे है कि....'' को स्थान देने का धन्यवाद !

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  7. बहुत सुन्दर विस्तृत चर्चा ,बहुत- बहुत बधाई.

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  8. सुंदर संकलन...

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  9. bahut sunder sanklan. meri rachna ko yaha sthan dene ke liye bahut bahut dhanywad.

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  10. श्रीयुत रूपचन्द्र शास्त्री जी आपको मेरी रचना को स्थान देने का धन्यवाद ! साथ ही आपकी रचना -आँगन बाड़ी के हैं तारे
    बालक हैं ये प्यारे-प्यारे…… बहुत ही अच्छी लगी।

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  11. बढिया चर्चा
    मुझे स्थान देने के लिए आभार

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  12. बहुत सुन्दर विस्तृत चर्चा, मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए दिल से आपका आभार आदरणीय।

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  13. बेहतरीन चर्चा....मेरी रचना को स्थान देने का शुक्रिया......

    सादर
    अनु

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