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Monday, December 02, 2013

"कुछ तो मजबूरी होगी" (चर्चा मंचःअंक-1449)

सरिता जी की कुछ तो मजबूरी होगी!
सोमवासरीय चर्चा में
देखिए मेरी पसंद के कुछ लिंक! 
 साझी व्यथा...!
 जीवन का चक्र 
अपरिचय के दौर से 
परिचय की सीमा पर रखता है कदम... 
अपने हो जाते हैं सपने 
और फिर देखते ही देखते 
सपना हो जाता है 
अपनों का साथ 
होने लगती हैं आँखें नम... 
अनुशील पर अनुपमा पाठक 
आखिर क्यों आता है गुस्सा
गुस्से में दांत भींच कर अमित चिल्ला कर बोला , 
''प्लीज़ मेरी चीज़ों को मत छेड़ा करो , 
कितनी बार कहा है तुम्हे ,''
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
घर पर पूछे गये प्रश्न पर यही जवाब दिया जा रहा है 
इस पर उस पर पता नहीं 
किस किस पर क्या क्या 
कब से कहाँ कहाँ लिखते ही चले जा रहे हो
 क्या इरादा है करने का 
किसी को नहीं बता रहे हो 
रोज कहीं जा कर लौट कर यहाँ वापस जरूर आ जा रहे हो 
बहुत दिन से देख रहे हैं 
बहुत कुछ लिखा हुआ भी 
बहुत जगह नजर आ रहा है...
उल्लूक टाईम्स पर सुशील कुमार जोशी
महान प्रेम : अन्ना स्विर 

पोलिश कवि अन्ना स्विर की कुछ कविताओं के अनुवाद इस ठिकाने पर आप पहले भी पढ़ चुके हैं। आइए , आज साझा करते हैं उनकी एक और कविता जो  अपने कलेवर और  अपनी काया  में बहुत  छोटी है , लघु है लेकिन  मुझे लगता है  कि इसका अंतरंग बहुत गहरा है ....
अन्ना स्विर की कविता
महान प्रेम
कर्मनाशा पर siddheshwar singh
"दूषित हुआ वातावरण" 
खो गया जाने कहाँ है आचरण?
देश का दूषित हुआ वातावरण।।
उच्चारण
यादें सुखद अतीत की, 
उज्जवल दिखे भविष्य -

भटके चंचल *ऋष्य, दृश्य दिखता है मारक | 
थामे विशिख कराल, खड़ा सम्मुख संहारक ...
रविकर की कुण्डलियाँ
गर्मी पल में सिर चढ़े, पल दो पल में सर्द- 
"लिंक-लिक्खाड़"
केले सा जीवन जियो, मत बन मियां बबूल | 
सामाजिक प्रतिबंध कुल, दिल से करो क़ुबूल ...
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर
मेरा अपना अँधेरे का एक टुकड़ा 
सुनसान जीवन की रात में अँधेरे का 
एक टुकड़ा है वो मेरा अपना है, 
क्यूंकि रौशनी के दावेदार 
फैले हैं चारों ओर 
उसके लिए पड़ता लड़ना है...
नीरज-हृदय (नीरज कुमार) 
"मेरी डॉल" 
बालकृति "हँसता गाता बचपन" से  
 
बालकविता "मेरी डॉल" 

मम्मी देखो मेरी डॉल। 
खेल रही है यह तो बॉल।। 
पढ़ना-लिखना इसे न आता। 
खेल-खेलना बहुत सुहाता।।
हँसता गाता बचपन
दिसंबर भी आ गया 
देखो न दिसंबर भी आ गया 
देखते देखते साल बीतने को आ गया 
क्या पाया क्या खोया...
जो मेरा मन कहे पर Yashwant Yash
मैं अकेला हूँ ! 
नौकरी से बंधा हूँ 
घर छोड़ शहर के एक छोटे से कमरे की 
चौकी पर पड़ा हूँ मैं अकेला हूँ! 
जिस्म जिंदा है 
इसका प्रमाण हवा में उड़ते मच्छर हैं 
जो रगों में दौड़ते लहू से बंधे हैं...
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
लिख दिया उसने उसका नाम जिंदगी 

ख़्वाबों में ही सही 
सुनहरे हर्फ़ से लिखे खूबसूरत अफसाने 
हकीकत की जमीन पर सर पटकते रहे ! 
समंदर की रेत पर सीपियों से बनाये 
खूबसूरत चित्र लहरों की 
तानशाही पर भटकते रहे...
गीत मेरे ........पर वाणी गीत
आपका ब्लॉग
भारत के संदर्भ में विश्वएड्स दिवस:एक दिसंबर ,२०१३ 
 आश्वस्त करता प्रतीत होता है। 
जहाँ दुनिया भर में २००५-१२ के दरमियान 
एच आई वी -एड्स से होने वाली मौतों में ५०% वृद्धि हुई है , 
१० -१९ साला आयुवर्ग के बीस लाख से ज्यादा नए लोग 
इस संक्रमण की चपेट में आयें हैं 
वहीँ भारत में गत दशक में  
नए संक्रमण के ५७%मामले कम दर्ज़ हुए हैं। 
मुम्बई नगरी ने भी इस दिशा में शानदार काम किया है।

प्रस्तुत है इसका संक्षिप्त सा विवरण...
Comet ISON sweeps near sun ,shows signs of life
Comet Ison fizzles out around Sun
Comet Ison — touted as the “comet of the century” — has fizzled out during its swing around the Sun, leaving behind a trail of dust rolling through space and disappointing stargazers.Comet Ison went around the Sun on Thursday. Several solar observatories watched the comet throughout this closest approach to the Sun, known as perihelion....
जल्दबाजी में आज केवल इतना ही...!
धन्यवाद।
नमस्ते जी!
आप सबका सोमवार मंगलमय हो।

12 comments:

  1. सुन्दर चर्चा...!
    आभार!

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  2. बहुत बहुत धन्यवाद सर!


    सादर

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  3. आज की सजी धजी सुंदर चर्चा में उल्लूक का "घर पर पूछे गये प्रश्न पर यही जवाब दिया जा रहा है " को स्थान दिया आभार !

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  4. सुन्दर चर्चा-
    आभार गुरुवर-

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  5. परिश्रम के साथ बेहतरीन संकलन ..आभार ...

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  6. सुन्दर और पठनीय सूत्रों का संकलन..

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  7. सुन्दर चर्चा,
    आभार !!!

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  8. कुछ नये व कुछ पुराने सूत्र , अच्छा हैं , धन्यवाद

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  9. बढ़िया चर्चा प्रस्तुति .....
    आभार!!

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  10. सुन्दर चर्चा ,सुन्दर सूत्र संकलन बहुत- बहुत बधाई आदरणीय शास्त्री जी

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  11. बहुत ही बेहतरीन लिंक्स
    आभार सर जी...
    :-)

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