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Thursday, December 05, 2013

"जीवन के रंग" चर्चा -1452

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है
आज से चुनावी परिणामों का आंकलन शुरू हो जाएगा | फेसबुक की भविष्यवाणियों का परिणाम पर कितना असर पड़ने वाला है देखना होगा | वैसे इस देश में चुनाव के दिन हवा कौन सा रुख लेती है वही अहमियत रखता है |
चलते हैं चर्चा की ओर
इश्क है तो इश्क का इजहार होना चाहिये
मेरा फोटो
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धन्यवाद 
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आगे देखिए.."मयंक का कोना"
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कालाबाश फल

एक पेड़ पर कुछ लौकी जैसे फल लगे थे पर लौकी नहीं थे  | कठहल जैसे लटक रहे थे पर शरीर पर कांटे नहीं थे अत: कठहल नहीं था |सोचने लगा क्या था वह ? तभी दिमाग में बात आई क्यों न  इसपर एक हाइकु लिखकर हाइगा बना दिया जाय और जानकारो से जान लिया  जाय | झट पट एक हाइकु लिख डाला -- 
वृक्ष का फल 
 जैसे लौकी वैसा हूँ 
बोलो कौन हूँ |
अनुभूति पर कालीपद प्रसा
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चला काटने किसको बन्दे ?

WORLD's WOMAN BLOGGERS ASSOCIATION

पर
shikha kaushik
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काठ के दुर्योधन

खामोशियाँ...!!! पर rahul misra 

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नवस्वर

सहज साहित्य

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इश्क़ की खुमारी
हल्का हल्का सा एक नशा तारी है 
और कुछ नहीं ये इश्क़ की खुमारी है 
कल क्या होगा इसका भरोसा नहीं 
न जाने क्यूँ उम्र भर की तैयारी है...
ज़िन्दगीनामा पर Nidhi Tandon 

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डा श्याम गुप्त की ग़ज़ल...
ऐ हसीं....
 ता ज़िंदगी ओठों पै तेरा नाम हो | 
पहलू में कायनात हो उसपे लिखा तेरा नाम हो | 
ता उम्र मैं पीता रहूँ यारव वो मय तेरे हुश्न की, 
हो हसीं रुखसत का दिन बाहों में तू हो जाम हो....
सृजन मंच ऑनलाइन

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सोते हैं हर समय 
कभी तो जागते भले
जो मेरा मन कहे
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वोट से पहले .
न हिन्दू थे न मुस्लिम थे, विस्फोट से पहले! 
क्यूँ हमने बेच दी इंसानियत, थी वोट से पहले...
काव्यान्जलि पर धीरेन्द्र सिंह भदौरिया

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आसाराम का भी बाप है 
नारायण साईं !

आइये आज एक बार फिर बात बाबाओं के बलात्कार पर मचे बवाल की करते हैं। आसाराम की करतूतें सामने आ चुकी हैं, बाबा की जो करतूतें है उससे लग नहीं रहा है कि इसके बाल इसकी उम्र की वजह से सफेद हैं। लग रहा कि अपनी काली करतूतों को छिपाने के लिए इसने अपने दाढ़ी-बाल खुद सफेद किया है। खैर भगोड़ा घोषित हो चुका है...
आधा सच...पर महेन्द्र श्रीवास्तव 
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रोज़ के यात्री

बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 

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विकलांग आप है 
जिन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया !

अंधड़ ! पर पी.सी.गोदियाल "परचेत"
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कार्टून :- अब ये ख़बर पुरानी हो चली है 

काजल कुमार के कार्टून
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डालो वोट जरूर [दोहावली]
लोकतंत्र के पर्व में ,शामिल होना आज 
हो जनता के राज में ,जनता की आवाज...
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया

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मधुशाला

अर्पित ‘सुमन’ पर सु.मन

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फँसता तेज अधेड़, छोड़ देता ज्यों सीढ़ी-
"लिंक-लिक्खाड़"
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर 

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"अमलतास के झूमर" 
काव्य संग्रह "धरा के रंग" से
एक गीत
अमलतास के झूमर की, 
आभा-शोभा न्यारी है।
मनमोहक मुस्कान तुम्हारी, 
सबको लगती प्यारी है।।

17 comments:

  1. बहुत ही उम्दा लिंक्स का संयोजन किया है आदरणीय ... आपका आभार ..

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  2. दिलबाग की सुंदर चर्चा में उल्लूक का "अपना अपना देखना अपना अपना समझना हो जाता है"
    दिखाने के लिये आभार !

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  3. बढ़िया चर्चा-
    आभार भाई दिलबाग जी-

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  4. बढ़िया सूत्र संयोजन दिलबाग जी !

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  5. आकर्षक सूत्रों से सुसज्जित चर्चा ! मेरे चित्र गीत को इसमें सम्मिलित करने के लिये आपका आभार !

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  6. बहुत बढ़िया लिंक्स व प्रस्तुति , मंच व विर्क साहब को धन्यवाद
    ॥ जै श्री हरि: ॥

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  7. मेरी पोस्ट को चर्चामंच में स्थान देने पर आपका आभार।

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  8. बढ़िया लिंक्स प्रस्तुति

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  9. बहुत बढ़िया,बेहतरीन सूत्र ...!
    ----------------------------------
    Recent post -: वोट से पहले .

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  10. सुन्दर और सधी हुई चर्चा!
    आभार आपका।

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  11. अच्छे पठनीय सूत्र......

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  12. सुन्दर एवं सुंदर चर्चा ....

    मेरी पोस्ट को चर्चामंच में स्थान दिया....हार्दिक आभार दिलबाग विर्क जी.....

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  13. sundar charcha-meri rachna chunne ke liye dhanywaad

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  14. बड़े ही रोचक पोस्ट, मुझे यहां स्थान दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद। मुझे यह ब्लोग बहुत ही पसन्द है।

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  15. बहुत ही अच्छे लेख ।।।

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"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...