चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Monday, December 16, 2013

"आप का कनफ्यूजन" (चर्चा मंच : अंक-1463)

 मित्रों!
सोमवार के लिए मेरी पसन्द के लिंक देखिए।
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
एक बूँद ओस की.

 सुबह सुबह पत्तों पर 
दूर से, कुछ चमकते देखा-? 
ऐसे लगा जैसे पत्तों में कोई मोती उग आया 
कौतूहल बस पास गया मुझे लगा 
शायद ये पत्तों के आँसू है...
काव्यान्जलि पर धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 
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एक पल
सुधा जब से किट्टी पार्टी से लौटी है तभी से चुप है। 
जैसे कुछ सोच रही है। 
हाँ , सोच तो रही है वह। 
आज जो बातें किट्टी में हुई। 
वे बातें उसे थोडा आंदोलित कर रही है...
My Photo
नयी दुनिया+ पर Upasna Siag 
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सत्ता-शासन भोग 
सहज पन्थ को छोड़ कर, अपनाया हठ-योग।
जनहित के सद्कर्म में, सत्ता-शासन भोग।।
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शासन करने में करो, अब मत हील-हवाल।
अमल घोषणापत्र पर, करो केजरीवाल।।
उच्चारण
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परीक्षा
हर परीक्षा उसकी स्व ईच्छा सा देती रहेगी फल ! 
श्रम साधना चरित्र आराधना जिसका जीवन जल !! 
स्व रचना पर Girijashankar Tiwari 
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मेरा पूरा आसमान...!
यूँ होता है कितनी ही बार
कि कहीं भी हो मन
आत्मा घुटनों पर बैठी
रहती है प्रार्थनारत...

अनुशील पर अनुपमा पाठक
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अपनी अपनी जिन्दगी

क्यों !! 
आखिर क्यों पूछ लिया 
एक स्त्री का एकांत 
जिसका कभी अंत नही 
बचपन से बुढापे तक 
सिसकता बचपन...
Rhythm पर नीलिमा शर्मा 
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बरसी एक सपने की ... 

सोलह दिसंबर की , तारीख 
फिर से कुछ खरोंचे छोड़ जायेगी 
उस सपने के अंत होने के 
एक वर्ष पूर्ण होने की .... 
झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव 
अक्सर सोचता हूँ 
सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ता एक अस्तित्व या 
अपनी प्रशंसा पर इठलाता एक अभिमान
स्व की रक्षा करता एक स्वाभिमान 
या कर्मपथ पर अग्रसर एक कर्तव्य ...
काव्य वाटिका पर Kavita Vikas
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चंदा मामा

चंदा मामा चंदा मामातुम पर संकट आएगामैंने टी वी में देखा थाकोई बस्ती वहां बसाएगा..
Fulbagiya पर हेमंत कुमार
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आप का कनफ्यूजन
किसी भूखे के आगे जो ,तुम छप्पन भोग गर रखदो ,
देख कर इतनी मिठाई ,बड़ा पगला वो है जाता 
मै ये खाऊं या वो खाऊं ,उसे होजाता कन्फ्यूजन ,
इसी चक्कर में बेचारा ,नहीं कुछ भी है खा पाता ...

*साहित्य प्रेमी संघ* पर  Ghotoo
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"प्यार की बातें करें" 
काव्यसंग्रह "सुख का सूरज" से
एक ग़ज़ल
सादगी के साथ हम, शृंगार की बातें करें
जीत के माहौल में, क्यों हार की बातें करें

सोचने को उम्र सारी ही पड़ी है सामने,
प्यार का दिन है सुहाना, प्यार की बातें करें
सुख का सूरज
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Why young Mumbaikars are rushing to ortho clinics? 
Why are Mumbaikars as young as 30 queueingup 
at ortho clinics with joint pain?क्या है युवाओं को अपनी गिरिफ्त में लेने वाला ऑस्टियोपीनिया ?
शहरी जीवन की महामारी है यह रोग। अस्थि रोगों के माहिर अब इसे जीवन शैली रोग कहने लगे हैं। अस्थियों का चूना और सीमेंट हैं विटामिन -D और केल्शियम खनिज। उम्र के तीसरे दशक तक पहुँचने पर अस्थियों का घनत्व अधिकतम हो जाता है बा -शर्ते आपकी जीवन शैली ठीकठाक रहे। लेकिन भ्रष्ट जीवन शैली के चलते २० की उम्र तक ही इन दोनों ज़रूरी तत्वों की कमी बेशी होने लगती है...

आपका ब्लॉग पर Virendra Kumar Sharma
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दिसम्बर क्या तुमने कभी सोचा था 
कि तुम इस तरह याद किये जाओगे 

मिसफिट Misfit पर Girish Billore 

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आरोग्य प्रहरी 
हाथ और आँखों के बेहतर समन्वयन 
परस्पर तालमेल के लिए 
कोई साज़ बजाना सीखिए। 
Learn to play a musical instrument 
.It's a good way to improve 
your hand eye co-ordination ....
आपका ब्लॉग पर 

Virendra Kumar Sharma 
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मै नारी हूँ ... 
 मै दुर्गा , अन्नपूर्णा मै ही  
मै अपूर्ण , सम्पूर्णा मै ही । 
मै उमा , पार्वती मै ही , 
मै लक्ष्मी , सरस्वती मै ही । 
मै सृजक , संचालिका मै ही , 
मै प्रकृति , पालिका मै ही ...
सृजन मंच ऑनलाइन पर 

Annapurna Bajpai 
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गीत...पीर मन की.... 
 जान लेते पीर मन की तुम अगर, 
तो न भर निश्वांस झर-झर अश्रु झरते। 
देख लेते जो द्रगों के अश्रु कण तुम , 
तो नहीं विश्वास के साये बहकते ....
भारतीय नारी पर shyam Gupta 

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कार्टून :-  
तेरा लोकपाल मेरे लोकपाल से सफेद कैसे ? 
 
काजल कुमार के कार्टून 

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वह सोलह की रात, आज भी अक्सर कौंधे 
 कौंधे तीखे प्रश्न क्यूँ, क्यूँ कहते हो व्यर्थ | 
जीवन के अपने रहे, सदा रहेंगे अर्थ ...
रविकर की कुण्डलियाँ 

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मोर 

Akanksha पर Asha Saxena 

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ख़ामोशी ! 
ख़ामोशी कुछ नहीं कहती है , 
मुखर नहीं होती , 
फिर भी किसी की ख़ामोशी 
कितने अर्थ लिए 
खुद एक कहानी अपने में समेटे रहती है। 
किसी की खोमोशी बढ़ावा देती है , 
अत्याचारों और ज्यादतियों को 
गूंगी जान बेजान समझ सब फायदा उठाते हैं...
hindigen पर रेखा श्रीवास्तव 

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मौसम ....! और आदमी !! 

 हर साल गर्मी,बारिश और ठण्ड का कहर होता है 
टूटी झोपड़ियाँ, फुटपाथ पर ठिठुरती 
ज़िन्दगी हर साल की खबर है 
मरनेवाला यूँ ही बेनाम मर जाता है …
मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा..

14 comments:

  1. उम्दा सूत्र संयोजन |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |
    आशा

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  2. सुंदर रचनाओं से युक्त चर्चा....
    एक मंच[mailing list] के बारे में---

    अपनी किसी भी ईमेल द्वारा ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजकर जुड़ जाईये आप हिंदी प्रेमियों के एकमंच से।हमारी मातृभाषा सरल , सरस ,प्रभावपूर्ण , प्रखर और लोकप्रिय है पर विडंबना तो देखिये अपनों की उपेक्षा का दंश झेल रही है। ये गंभीर प्रश्न और चिंता का विषय है अतः गहन चिंतन की आवश्यकता है। इसके लिए एक मन, एक भाव और एक मंच हो, जहाँ गोष्ठिया , वार्तालाप और सार्थक विचार विमर्श से निश्चित रूप से सकारात्मक समाधान निकलेगे इसी उदेश्य की पूर्ति के लिये मैंने एकमंच नाम से ये mailing list का आरंभ किया है। आज हिंदी को इंटरनेट पर बढावा देने के लिये एक संयुक्त प्रयास की जरूरत है, सभी मिलकर हिंदी को साथ ले जायेंगे इस विचार से हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित ये संयुक्त मंच है। देश का हित हिंदी के उत्थान से जुड़ा है , यह एक शाश्वत सत्य है इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है। हिंदी के चहुमुखी विकास में इस मंच का निर्माण हिंदी रूपी पौधा को उर्वरक भूमि , समुचित खाद , पानी और प्रकाश देने जैसा कार्य है . और ये मंच सकारात्मक विचारो को एक सुनहरा अवसर और जागरूकता प्रदान करेगा। एक स्वस्थ सोच को एक उचित पृष्ठभूमि मिलेगी। सही दिशा निर्देश से रूप – रेखा तैयार होगी और इन सब से निकलकर आएगी हिंदी को अपनाने की अद्भ्य चाहत हिंदी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाना, तकनिकी क्षेत्र, विज्ञानं आदि क्षेत्रो में विस्तार देना हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है क्योंकि हिंदी स्वंय ही बहुत वैज्ञानिक भाषा है हिंदी को उसका उचित स्थान, मान संमान और उपयोगिता से अवगत हम मिल बैठ कर ही कर सकते है इसके लिए इस प्रकार के मंच का होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमारी एकजुटता हिंदी को फिर से अपने स्वर्ण युग में ले जायेगी। वर्तमान में किया गया प्रयास , संघर्ष , भविष्य में प्रकाश के आगमन का संकेत दे देता है। इस मंच के निर्माण व विकास से ही वो मुहीम निकल कर आयेगी जो हिंदी से जुडी सारे पूर्वग्रहों का अंत करेगी। मानसिक दासता से मुक्त करेगी और यह सिलसिला निरंतर चलता रहे, मार्ग प्रशस्त करता रहे ताकि हिंदी का स्वाभिमान अक्षुण रहे।
    अभी तो इस मंच का अंकुर ही फुटा है, हमारा आप सब का प्रयास, प्रचार, हिंदी से स्नेह, हमारी शक्ति तथा आत्मविश्वास ही इसेमजबूति प्रदान करेगा।
    ज आवश्यक्ता है कि सब से पहले हम इस मंच का प्रचार व परसार करें। अधिक से अधिक हिंदी प्रेमियों को इस मंच से जोड़ें। सभी सोशल वैबसाइट पर इस मंच का परचार करें। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा। ये केवल 1 या 2 के प्रयास से संभव नहीं है, अपितु इस के लिये हम सब को कुछ न कुछ योगदान अवश्य करना होगा।
    तभी संभव है कि हम अपनी पावन भाषा को विश्व भाषा बना सकेंगे।


    एक मंच हम सब हिंदी प्रेमियों, रचनाकारों, पाठकों तथा हिंदी में रूचि रखने वालों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त कर पाएंगे कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
    आप यहां क्लिक करें
    या  
    ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजें।
    इस समूह में पोस्ट करने के लिए,
    ekmanch@googlegroups.com
    को ईमेल भेजें
    [आप सब से भी मेरा निवेदन है कि आप भी इस मंच की सदस्यता लेकर इस मंच को अपना स्नेह दें तथा इस जानकारी को अपनी सोशल वैबसाइट द्वारा प्रत्येक हिंदी प्रेमी तक पहुंचाएं। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा

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  3. सुन्दर चर्चा-संयोजन !

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  4. बहुत सुंदर चर्चा ! उल्लूक ने कहा "मुझ गधे को छोड़ हर गधा एक घोड़ा होता है" और आपने दिखा दिया बहुत बहुत आभार !

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  5. बढ़िया चर्चा-
    आभार आपका-

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  6. बढ़िया लिंक्स व प्रस्तुति , आ० व मंच को धन्यवाद
    ॥ जै श्री हरि: ॥

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  7. सुंदर चर्चा.बेहतरीन लिंक्स.

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  8. रोचक व पठनीय सूत्रों का संकलन।

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  9. उम्दा लिनक्स ....... मेरी रचना को शामिल किये जाने का हार्दिक आभार

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  10. अच्छी चर्चा हेतु धन्यवाद.....

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  11. बहुत ही उम्दा,लिंक्स ...!
    मरी रचना शामिल करने के लिए आभार ! शास्त्री जी .....

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