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Wednesday, December 25, 2013

"सेंटा क्लॉज है लगता प्यारा" (चर्चा मंच : अंक-1472)

मित्रों!
बुधवार के आप सबके लोकप्रिय चर्चाकार
आदरणीय रविकर जी 
31 दिसम्बर तक अवकाश पर हैं।
नूतन वर्ष 2014 में वो फिर से 
अपने अनोखे यहाँ चर्चा करेंगे।
तब तक दो बुधवार को अपनी पसंद के लिंक 
यहाँ प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी मेरी है।
बुधवार की चर्चा में देखिए मेरी पसंद के लिंक-
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सांता क्लॉस 

हे सांता हो तुम कौन
कहाँ से आए
बच्चों से तुम्हारा कैसा नाता
वे पूरे वर्ष राह देखते
मिलने को उत्सुक रहते |
क्या नया उपहार लाये...

प्रतापगढ़ साहित्य प्रेमी मंच  
-BHRAMAR KA DARD AUR DARPAN पर 
Asha Saxena
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सेंटा क्लॉज है लगता प्यारा। 

इंतज़ार हर साल तुम्हारा, 
सेंटा क्लॉज है लगता प्यारा...
बच्चों का कोना पर 
Kailash Sharma 
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"मेरा झूला बड़ा निराला" 
बालकृति नन्हें सुमन 
एक बालकविता
मम्मी जी ने इसको डाला। 
मेरा झूला बडा़ निराला।। 
नन्हे सुमन
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पुरुषीय -नैतिकता :कहानी 

 ''हत्यारे को फांसी दो ...फांसी दो .....फांसी दो ...!!!'' 
के नारों से शहर की गली गली गूँज रही थी .अपनी ही पत्नी की हत्या कर सात हिस्सों में लाश को काटकर तंदूर में भून डालने वाले विलास को फांसी दिए जाने की वकालत समाज का हर तबका कर रहा था .विलास की दरिंदगी का किस्सा जहाँ भी , जिसने भी सुना ,अख़बार में पढ़ा -उसकी आत्मा कांप उठी और होंठों पर बस यही प्रश्न -' क्या कोई इंसान ऐसा भी कर सकता है ... 
भारतीय नारी पर shikha kaushik 
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यही जुड़ाव जीवन है...! 
आकाश से शायद बूँदें गिर रही हैं...  
क्या पता उसे भी कोई दुःख हो...  
या फिर ख़ुशी के आंसू रो रहा हो अम्बर...  
या ये हो कि बस रोने के सुख की खातिर 
रो रहा हो.....
अनुशील पर अनुपमा पाठक 
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स्मरणीय हीरा , 
'अपनों 'की राख का स्मारक  
अस्थिकलश से स्मरणीय अस्थि - 
हीरे तक का सफर 

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इस प्रकार के शोध के खतरे : 
आज मानव का जिस हद तक पतन हो गया है 
उसे देखते हुए इस शोध के निहित खतरे हैं। 
कोई भी अधम व्यक्ति अपनों को ही मारकर 
उनकी राख को हीरों में तब्दील कर 
रातों रात अमीर होने से भी नहीं चूकेगा। 
शाश्त्रों में (भागवत पुराण )में उल्लेख है 
वृत्तासुर जब देवताओं सहित 
सारे भूमण्डल के ही लिए खतरा हो गया 
तब इंद्र सहित सभी देवता ऋषि दाधीच (दधीचि )के पास पहुंचें। 
ऋषि को अमरत्व का वरदान प्राप्त था। 
लोकमंगल से प्रेरित होकर ऋषि ने वज्र बनाने के लिए 
योगबल से अपना शरीर छोड़ा और अस्थियां हाज़िर कर दीं। 
उन्हीं से वज्र -अश्त्र बनाया गया 
जो अंततया वृत्तासुर की मृत्यु का कारण बना। 
आपका ब्लॉग पर 
Virendra Kumar Sharma 
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"अब रचो सुखनवर गीत नया" 

लो साल पुराना बीत गया।
अब रचो सुखनवर गीत नया।।

फिरकों में था इन्सान बँटा,
कुछ अकस्मात् अटपटा घटा।
तब राजनीति का भिक्षुक भी,
झूठी हमदर्दी लिए डटा।
लोकतन्त्र का दानव फिर,
मानवता का घर रीत गया।
अब रचो सुखनवर गीत नया।।
उच्चारण
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सुनो ऐ नरम दिल लड़कियों ! 

रुई के फाहों सी नरम दिल लड़कियों 
जरा सा सख्त भी हो जाओ -- 
वरना खतम हो जाएगा तुम्हारा वज़ूद...
ये पन्ने ........सारे मेरे अपने -पर 
Divya Shukla 
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ये ज़िद्दी बच्चे ! 

आम आदमी पार्टी को ‘जिद्दी बच्चों का जमावड़ा’ कहा जाए तो गलत नहीं होगा. जिस तरह से उन्होंने एक जिद्द पकड़ कर उसको ही सही ठरते हुए यहाँ तक पहुँच गए हैं वह काबिले तारीफ़ है. इस सिस्टम में जहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी समाई हुई हैं उस दलदल में पाँव जमा कर खड़े होने का तरीका इन्होने इतनी जल्दी सीख लिया इसकी शाबाशी देना बनता ही है....
व्योम के पार पर Alpana Verma 
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लप्रेक (लघु प्रेम कथा) 

वो रोता बहुत था और अक्सर ही बरबस उन्हें रोकने की कोशिश के बावजूद आँसू उसकी आँखों में छलक ही आते थे। एक दिन रोते-२ परिमल, पीहू के चेहरे को अपने दोनों हाथों में थाम कर पूँछने लगा, ‘जब तुम मेरे साथ हो, तो मुझे इतना रोना क्यों आता है...
नीड़ का निर्माण फिर-फिर... पर 
डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन' 
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अरे! मैं कैसे नहीं हूँ ख़ास? 

ग़ाफ़िल की अमानत पर 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
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एक शाम उसके नाम 

चाहने वाले तुमने नहीं देखे 
जिगर में आग ऐसे पालने वाले नहीं देखे 
यहाँ इश्क़ और इमां का जनाज़ा सब ने देखा है 
किसी ने भी दिलजलों के दिल के छाले नहीं देखे...
तमाशा-ए-जिंदगी पर 
Tushar Raj Rastogi
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आरोग्य प्रहरी : 
(१) 
खून में तैरती शक्कर के 
विनियमन करने के लिए प्याज 
में मौज़ूद रहता है क्रोमीयम खनिज 

अल्पांश में इसका सेवन शरीर की क्रियाओं 
यथा पाचन को सुचारु बनाये रखने  में उपयोगी सिद्ध होता है।
प्याज इसका सहज सुलभ स्रोत है...
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नया समस्या पूर्ति आयोजन 
हमें लगता था समस्या पूर्ति आयोजन के 
पाठक रचनाधर्मी व्यक्ति ही हैं। 
परन्तु पिछले दिनों सुखद आश्चर्य हुआ 
जब अनेक कविमना व्यक्तियों ने उलाहना दिया कि 
भाई पाँच महीने हो गये, अगली समस्या पूर्ति  कब...
ठाले बैठे
छल कपट लालच बुराई को निकाला दे, 
जग हुआ अंधा अँधेरे से, उजाला दे, 
झूठ हिंसा पाप से सबको बचा या रब, 
शान्ति सुख संतोष देती पाठशाला दे, 
दास्ताँने - दिल 
(ये दुनिया है दिलवालों की)
अरुण शर्मा अनन्त
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पानी से अच्छा होता 
अगर दारू पर कुछ लिखवाता 
पानी नहीं भी होगा कहीं 


तब भी कुछ अजब 

गजब नहीं हो जायेगा 

ज्यादा से ज्यादा 

शरम से जमीन के 
थोड़ा और नीचे 
की ओर चला जायेगा 


और फिर एक बेशरम 

चीर हरण करेगा... 
उल्लूक टाईम्स पर सुशील कुमार जोशी
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कार्टून :- केजरीवाल तो गया... 
 
काजल कुमार के कार्टून

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मेरे सपनो के रामराज्य 
(भाग तीन -अन्तिम भाग)
आदेश सुनकर बेहोश हुए कुछ 
कुछ ने किया विलाप , 
काली कमाई से अलग होने का 
दुःख नहीं सह पाये पुत्र ,और न बाप...
मेरे विचार मेरी अनुभूति पर 

कालीपद प्रसाद
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ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी
मेरी ग़ज़लें, मेरे गीत/ प्रसन्नवदन चतुर्वेदी
      मित्रों ! आज मैं एक अपनी शुरुआती दौर की ग़ज़ल अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ | इसी रचना से मैंने अपने ब्लॉग की शुरुआत की थी | इस रचना का संगीत-संयोजन भो मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी


21 comments:

  1. बेहद खूबसूरत चर्चा | लाजवाब सूत्रों से सुसज्जित | मेरी पोस्ट सम्मिलित करने के लिए बहुत बहुत आभार | क्रिसमस की बहुत बहुत शुभकामनायें |

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  2. suprabhat shashtri ji
    pure parivaar ko namaskaar

    abhut sundar charcha saji hui hai , jab charcha padhi tab dhyan aaya aaj 25 tarikh hai , :) waqt ka khyal hi nahi raha , hamen bhi sthan dene hetu tahe dil se abhaar .

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  3. आज तो चर्चा में भ्‍ी क्रि‍समस का रंग है :)

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  4. सुन्दर चर्चा!
    आभार!

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  5. बढ़िया चर्चा मंच सजा
    सूत्र मन को भाते
    क्रिसमस पर शुभ कामनाएं
    सभी को दे स्नेह बांटते|
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सर |

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  6. सभी मित्रों को आज 'क्रिसमस-दिवस' पर शुभ कामनाएं,! सब को सेंटा क्लाज सी उदारता दे और ईसा मसीह सी 'प्रेम-शक्ति'!
    अथ, आज का चर्चा-मंच समसामयिक भी है और अच्छे शीर्षकों वाला भी !!

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  7. सबको त्योहार की शुभकामनायें, सुन्दर व पठनीय सूत्र

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  8. लाजवाब चर्चा ! उल्लूक का "पानी से अच्छा होता अगर दारू पर कुछ लिखवाता" को शामिल करने पर आभार !

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  9. सुंदर चर्चा .....चैतन्य को शामिल किया , आभार आपका

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  10. आ० रविकर सर के बारे में पता चला , बहुत दिनों से अनुपस्थिति पायी , मंच की जान हैं श्री रविकर सर , क्रिसमस की शुभकामनाएं , धन्यवाद
    नया प्रकाशन -: घरेलू उपचार ( नुस्खे ) - भाग ७
    ॥ जै श्री हरि: ॥

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  11. बड़ा दिन ईसा का अवतरण दिवस मुबारक।

    क्रिसमस दिवस (Xmas Day )पर सर्व समावेशी उद्गारों की आवश्यकता है।

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  12. लो साल पुराना बीत गया।
    अब रचो सुखनवर गीत नया।।

    नया सूर्य अब चमकेगा,
    सारा अँधियारा हर लेगा।
    जब सुख के बादल बरसेंगे,
    तब “रूप” देश का दमकेगा।
    मनधावक बाजी जीत गया।
    अब रचो सुखनवर गीत नया।।

    सृजन के आशावादी क्षण बांधे है ये रचना।

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  13. खुद से ही खुद कभी बात कर आदमी

    सशक्त अभिव्यंजना।

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  14. खुद से ही खुद कभी बात कर आदमी

    सशक्त अभिव्यंजना।

    ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी
    मेरी ग़ज़लें, मेरे गीत/ प्रसन्नवदन चतुर्वेदी
    मित्रों ! आज मैं एक अपनी शुरुआती दौर की ग़ज़ल अपनी आवाज़ में प्रस्तुत कर रहा हूँ | इसी रचना से मैंने अपने ब्लॉग की शुरुआत की थी | इस रचना का संगीत-संयोजन भो मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
    प्रसन्न वदन चतुर्वेदी

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  15. वाह !वाह !हलधर बलराम याद आये सुन्दर झांकियां।

    --
    Drama in school

    चैतन्य का कोना पर
    Chaitanyaa Sharma

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  16. वाह !वाह ! सुन्दर झांकियां। सुन्दर सर्व -समावेशी प्रदर्शनी

    फिर जैसे ही स्कूल के बाहरी द्वारा से स्कूल प्रांगण में दाखिल हुए तो सुन्दर बहुरंगी छोटी-छोटी छतरियों से सजी स्कूल बिल्डिंग देखकर मन खुशी से प्रफुल्लित हो उठा। मुख्य द्वारा से प्रवेश करते ही भारत माता का फूलों से सजाया मानचित्र जिसके चारों ओर छोटे-छोटे प्रज्ज्वलित जगमगाते दीपक हमारी सृष्टि के आदि से चली आ रही गरिमामयी सांस्कृतिक एकता की विशेषता का बखान करते दिखे तो मन रोशन हो उठा। सोचने लगी इसी विशेषता के चलते हमारी संस्कृति विश्व प्रांगण में उन्नत मस्तक किए हैं। रोम हो या मिश्र या बेवीलोनिया या फिर यूनान की संस्कृतियाँ, ये सभी काल के कराल थपेड़ों से नष्ट हो गईं, लेकिन हमारी संस्कृति काल के अनेक थेपेड़े खाकर भी आज भी अपने आदि स्वरूप में जीवित है। इस संबंध में इकबाल की पंक्तियाँ याद आयी कि- “कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।"

    यूनान मिश्र रोमा सब मिट गए जहां से ,

    कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी।

    -
    बच्चों के संग
    साइंस एंड क्राफ्ट एक्जिबिशन
    के रंग

    KAVITA RAWAT

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  17. बढ़िया सुन्दर चर्चा प्रस्तुति में मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए आभार!
    सबको क्रिसमस की हार्दिक शुभकामनाएं!

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  18. आकर्षक और सुन्दर प्रविष्टियों में मेरी ग़ज़ल की चर्चा के लिए धन्यवाद.....वीरेन्द्र जी ने ग़ज़ल सुनी और कई बार कमेन्ट किया, इसके लिए उन्हें भी धन्यवाद....

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"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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"लाचार हुआ सारा समाज" (चर्चा अंक-2820)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...