चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Monday, February 10, 2014

"चलो एक काम से तो पीछा छूटा... " (चर्चा मंच-1519)

मित्रों!
सोमवासरीय चर्चा मंच में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसंद के लिंक।
सबसे पहले अपनी रचना लिंक कर रहा हूँ।
--

रही धरा से सूख अब, गीत-ग़ज़ल की धार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

कैसे देंगे गन्ध को, ये काग़ज़ के फूल।
सुमन नोच माली चला, छोड़ गया अब शूल।।
मन में तो है कुटिलता, अधरों पर मुस्कान।
अपनेपन की हो यहाँ, कैसे अब पहचान।।
पहले जैसी हैं कहाँ, अब निश्छल मनुहार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

बेटों ने परदेश में, जमा किया धन-माल।
सोनचिरैया इसलिए, हुई आज कंगाल।
खाते कुत्ते-बिल्लियाँ, बिस्कुट-बटर-पनीर।
लेकिन बूढ़े पिता की, आँखों में है नीर।।
शादी होते ही हुआ, अलग-अलग घर-बार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

सरगम के सुर कर रहे, आपस में उत्पात।
कदम-कदम पर हो रहा, घात और प्रतिघात।।
पाल-पोषकर कर दिया, जिसको युवा बलिष्ठ।
वो ही अब करने लगा, घर का बहुत अनिष्ट।।
बेटा जीवित बाप से, माँग रहा अधिकार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।

नज़र न आता है कहीं, अब नैसर्गिक “रूप”।
कृत्रिमता के दौर में, मिले कहाँ से धूप।।
लोग बुन रहे देश में, मकड़ी जैसा जाल।
अब दूषित परिवेश में, जीना हुआ मुहाल।।
मानवीयता का यहाँ, खसक रहा आधार।
धीरे-धीरे घट रहा, लोगों में अब प्यार।।
--
मिलिए फेसबुकी अर्चना से 

उड़ने को नही पंख 
मगर उड़ती हूँ बहुत मैं
चिड़िया या कोई पंछी नही
कि किसी कैद में रहूं .....
मेरे मन की पर Archana
--
आईना और परछाँई 

ये अपना रिश्ता भी न  
सच बड़ा ही अलग सा है ,  
अपने बारे में जब भी सोचा  
तो तुम बस तुम दिख जाते हो...
झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव 
--
अलगाववाद को हवा दे रहा है मिडिया? 

यह तो पता नहीं कि ओपरेशन ब्लू-स्टार में विदेशी ताकतों का हाथ था या नहीं, लेकिन मिडिया खालिस्थान के जिन्न को बोतल से बाहर निकालने को आतुर लगता है... 
84 दंगे और ओपरेशन ब्लू स्टार पर जो कवरेज और राजनीति चल रही है, वोह देश के लिए हानिकारक है... ऐसे प्रयासों को फ़ौरन बंद किए जाने की ज़रुरत है....
प्रेमरस.कॉम पर Shah Nawaz 
--
--
पिघलती परछाइयां !! 

सूरज तनिक तिरछा हो कर लटक गया 
नीम की सबसेऊँची फुनगी पर -- 
जरा सी देर और फिरसरक जाएगा सूरज 
और फिर अँधेरा --तभी साँझ चुपके से 
एक दियाथमा गई रात के हाथों में 
दिये की मद्धम रोशनी में... 
ये पन्ने ........सारे मेरे अपने - पर 
Divya Shukla
--
मेरा गुस्सा तुम्हारा प्यार... 

मुझे याद है सौम्या वो दिन 
जब मैं बहुत गुस्से में था, 
और तुमपर खूब चिल्लाया... 
पर मैं करता भी क्या 
और मैंने तुमसे कहा भी था 
जब मैं गुस्से में होता हूँ तो 
तुम मुझसे दूर ही रहा करो... 
मेरा मन पंछी सा पर Reena Maurya 
--
--
"आया मधुमास" 
आप भी इस गीत का रस लीजिए!
फागुन की फागुनिया लेकरआया मधुमास!
पेड़ों पर कोपलियाँ लेकरआया मधुमास!!

धूल उड़ाती पछुआ चलतीजिउरा लेत हिलोर,
देख खेत में सरसों खिलतीनाचे मन का मोर,
फूलों में पंखुड़िया लेकरआया मधुमास...
सुख का सूरज
--
बेचैनी यहाँ जवांई जैसी 
गर आदी फिर क्यों बेचैनी यहाँ समाई रहती हैं ? 
बेचैनी भी ऐसी कि जिसकी वजह हैं हल नही हैं... 
पथिक अनजाना आपका ब्लॉग
--
--
--
सर्दियों की एक और सुबह 

सांस की नली में कुछ अटकने के अहसास के साथ गहरी, दर्द निवारक से ठहराई नींद उचट जाती है। गला दो-तीन बार खांस कर सांस के लिए रास्ता साफ कर सुकून पा लेता है। ऐसा हमेशा सांस की नली के दाहिने हिस्से में होता लगता है, पर डॉक्टर भाई इस अवलोकन पर हंस देता है कि फेफड़ों के ऊपर दाहिना-बायां कुछ नहीं होता....
RAINBOW/इंद्रधनुष पर आर. अनुराधा 
--
सोलह श्रृंगार 

इसी कारण नारी और पुरुष दोनों में अपने को ज्यादा आकर्षक दिखाने या लगने की होड़ शुरू हो गयी होगी और इस तरह ईजाद हुई होगी तरह-तरह की श्रृंगारिक विधियों की जिसमें अंतत: बाजी मारी होगी नारी ने सोलह श्रृंगार कर के जिनका उल्लेख शास्त्रों में उपलब्ध है...
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा
--
आंवले का सेवन रोजाना करने से 
लाभ होता है 
आंवले के प्रयोग - जुकाम - 2 चम्मच आंवले के रस को 2 चम्मच शहद के साथ मिलाकर सुबह और शाम चाटने से जुकाम ठीक हो जाता है । जिन लोगों को अक्सर हर मौसम में जुकाम रहता है । उन लोगों को आंवले का सेवन रोजाना करने से लाभ होता है...
सत्यकीखोज पर 

RAJEEV KULSHRESTHA 
--
मनुष्य के शत्रु ... 
यजुर्वेद, ईशोपनिषद एवं गीता में ईश्वर प्राप्ति के मूलतः तीन उपाय बताये गए हैं | जो तत्काल प्रभावी, सरल एवं कठिन मार्ग क्रमशः ...भक्ति योग, कर्म योग एवं ज्ञान योग हैं...| इनका पालक व्यक्ति स्थिरप्रज्ञ व संतुष्ट रहता है...
डा श्याम गुप्त .... सृजन मंच ऑनलाइन
--
--
पर्दे 

न जाने क्यों यहाँ 
हर पल हर ओर  
दिखाई देते हैं टंगे हुए पर्दे 
जिनसे ढका हुआ सबका मन 
कभी देखना ही नहीं चाहता  
बाहर की आज़ाद बेपरवाह जिंदगी को...
जो मेरा मन कहे पर Yashwant Yash
--
ग़ज़ल - जब किसी काम की... 

जब किसी काम की शुरुआत बिगड़ जाती है ॥ 
फिर तो जैसे हर एक बात बिगड़ जाती है... 
डॉ. हीरालाल प्रजापति
--
भोली आस्था 
एक मासूम...
तल्लीनता से जोर-जोर पढ़ रहा था
क-कमल,ख-खरगोश,ग-गणेश

शिक्षक ने टोका
ग-गणेश! किसने बताया?
बाबा ने...
Wings of Fancy पर 

Vandana Tiwari
--
--
--
--
एक बहुप्रतीक्षित खुशखबरी : 
उम्मीद से ज्यादा :) 

दोस्तों "हिंदी अकादमी दिल्ली " के सौजन्य से मेरा पहला काव्य संग्रह 
"बदलती सोच के नए अर्थ" 
परिलेख प्रकाशन नज़ीबाबाद के माध्यम से आ रहा है...
ज़ख्म…जो फूलों ने दिये पर 
vandana gupta
--
पुस्तक समीक्षा 

हिंदी ब्लॉग जगत में सुपरिचित डॉ. सुशील कुमार जोशी जी ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में हमारी पुस्तक “शब्दों के पुल” पर अपने स्नेह-पुष्पों के रूप में कुछ स्वसृजित हाइकुओं की वर्षा की है...
अंतर्मन की लहरें पर सारिका मुकेश 
--

13 comments:

  1. सुन्दर, रोचक व पठनीय सूत्र..

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर लिंक्स हैं ...चैतन्य को शामिल करने का आभार

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर चर्चा
    उल्लूक दिखा आभार !

    ReplyDelete
  4. दोहा गीत आज का यथार्थ है ! बाकी लिंक्स पढ़ते है अभी !

    ReplyDelete
  5. अच्छे पठनीय सूत्र सहेजे हैं आपने .... आभार !

    ReplyDelete
  6. सुंदर लिंक संयोजन किया है आदरणीय।
    'भोली आस्था' को शामिल करने के लिए आभार।
    सादर

    ReplyDelete
  7. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...
    आभार !

    ReplyDelete
  8. धन्यवाद ! मयंक जी ! मेरी रचना ''ग़ज़ल - जब किसी काम की... ''को स्थान देने के लिए

    ReplyDelete
  9. बहुत सुंदर चर्चा
    आभार !

    ReplyDelete
  10. बहुत सुन्दर लिंक्स! मेरी रिपोर्ट को स्थान देने के लिए आपका हार्दिक आभार!

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin