चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, March 21, 2014

"उपवन लगे रिझाने" (चर्चा मंच-1558)



आज की चर्चा में मैं राजेंद्र कुमार आपका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मौन निमन्त्रण देतीं कलियाँ, 
सुमन लगे मुस्काने।
वासन्ती परिधान पहन कर, 
उपवन लगे रिझाने।।
लोकेन्द्र सिंह 
लोकतंत्र में सवाल पूछने की पूरी आजादी है। यह अच्छा भी है। जिसे हमने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वाहन करने के लिए चुना है,
पूर्णिमा दूबे
चीन में तिब्‍बती मैस्टिफ प्रजाति का एक कुत्‍ता दुनिया का सबसे महंगा कुत्‍ता बन गया है। उसे झेजियांग प्रांत के एक शख्‍स ने 1 करोड़ 20 लाख युआन (लगभग 20 लाख डॉलर) भारतीय मुद्रा मे 12 करोड़ रु में खरीदा है। अपने अयाल (गर्दन के चारों ओर के बाल) के कारण बब्‍बर शेर की तरह दिखने वाले मैस्टिफ कुत्‍ते

वीरेन्द्र कुमार शर्मा 
स्तन कैंसर के बरक्स महिलाओं के इस अपविकासी रोग की चपेट में आने के दो गुने मौके रहते हैं। रोग के आनुवंशिक कारणों के अलावा औरत मर्द की हारमोन बुनावट के फर्क का रोग प्रवणता से क्या सम्बन्ध है
वंदना गुप्ता
चुभते दिन चुभती रातें
कोई न बिरहन का दुख बाँचे

कैसे भोर ने ताप बढाया
कैसे साँझ ने जी तडपाया
युग के युग बीत गये
किससे कहे बिरहा की बातें
प्रभात रंजन 
अनिरुद्ध उमट समर्थ कवि, कथाकार के रूप में जाने जाते हैं. संगीत, कलाओं में गहरी रूचि रखते हैं. यह लेख उन्होंने गंगूबाई हंगल के संगीत का आनंद उठाते हुए लिखा है. आप भी पढ़िए, कुछ आनंद ही आएगा- मॉडरेटर.
राजीव कुमार झा 
दरवाजे कुछ न बोलते हुए भी उस गली से गुजरनेवाले राहगीरों से बहुत कुछ कह जाते हैं.द्वार को घर का दर्पण कहना अनुचित नहीं होगा क्योंकि ये दरवाजे अपनी सुरक्षात्मक उपयोगिता से कहीं आगे बढ़कर कला,भावना,वैभव और संस्कृति की रचनात्मक व्याख्या करते हुए या निवास करने वाले की रुचि का परिचय देते हैं.
 कैलाश शर्मा 
देव ब्राह्मण ज्ञानी जन का
और गुरु का पूजन करते.
शुचिता अहिंसा ब्रह्मचर्य 
तप संपन्न शरीर से कहते.

अलकनंदा सिंह 
एक सिरे पर बांधी चितवन
एक सिरे पर बांधा साज़
रस रस होकर बहता सा
सपनों तक घुलता गया देखो...
फिर मैंने,
हर्षवर्धन 
आज विश्व गौरैया दिवस है। विश्व गौरैया दिवस पहली बार वर्ष 2010 ई. में मनाया गया था। यह दिवस प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को पूरी दुनिया में गौरैया पक्षी के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है।
नवेदिता श्रीवास्तव 
एक मन है मेरे पास भी 
जो संवेदनशील है 
इसीलिये वेदना भी 
अनुभव होती है 
तुम्हारा देखना देता है 
एक एहसास सुरक्षा का 
और जैसे ही बदलती हैं
सविता कला 
मेरे पैर में एक कील चुभी थी | 
वह मुझे सालती रही जीवन भर | 
मैं उसे सहेजती रही पालती रही |
कुँवर कुसुमेश
गर्मी में बरतें बहुत,सावधानियाँ आप।
धीरे-धीरे बढ़ रहा,भू मंडल का ताप।।

चुप्पिया

नीलिमा शर्मा
मुझे राहत देते हैं
अनजाने में
अनचाहे शब्द भी
जब
कलम से निकलते हैं
कुछ
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मोम कभी हो जाता है, तो पत्थर भी बन जाता है।
दिल तो है मतवाला गिरगिट, “रूप” बदलता जाता है।।
कभी किसी की नहीं मानता,
प्रतिबन्धों को नहीं जानता।
भरता है बिन पंख उड़ानें,
जगह-जगह की ख़ाक छानता।
वही काम करता है यह, जो इसके मन को भाता है।
दिल तो है मतवाला गिरगिट, “रूप” बदलता जाता है।।
अब विदा चाहूँगा, आगे चर्चा जारी है शास्त्री जी के  कुछ चुने हुए अद्धतन लिंकों की। 
राजा अकेला क्या करेगा— 
पथिकअनजाना-- 
दहल उठा अचानक देख कर मैं अपनी नजरों के सामने जो हैं 
मैं जाने किस लोक में पहुँचा जाने किस राह से गुजरता हुआ...
आपका ब्लॉग
--
फूलों की खूबसूरती -  
अरे वाह, कितना सुहाना मौसम है। 
ठण्ड जा चुकी है और जो धूप अच्छी लगती थी, 
अब परेशान करती है। 
खूब मस्ती करने और घूमने-फिरने के दिन...

पाखी की दुनिया
--
कार्टून :- केजरीवाल जी के पास प्‍लान है. 

काजल कुमार के कार्टून
--
आवारा होगा तभी तो 
उसने कह दिया होगा  
शायद सच कहा होगा या 
गफलत में ही कह गया होगा 
उसने कहा और मैंने सुना 
मेरे बारे में मुझ से 
कुछ इस तरह आवारा हो जाना...
--
या खुदा! वक्त कुछ ठहर जाये..... 

वो मेरे दिल से क्यूँ उतर जाये...
खुद कहे और खुद मुकर जाये...

तुम्हारे लिए.........
--
प्यार में दर्द है. 

प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है 
 

 वो सनम  जब यहाँ  बेवफा हो गया
 टुकड़े-टुकड़े जिगर के मेरे कर गया,
 हँस  के मैंने  उसे बस  यही था कहा  

   तू  मेरा  प्यार  है, वो  तेरा  प्यार है ! 

काव्यान्जलि ... 
--
ओ री गौरैया (..वि‍श्‍व गौरैया दि‍वस पर..) 

ओ री गौरैया
क्‍यों नहीं गाती अब तुम
मौसम के गीत
क्‍यों नहीं फुदकती 
मेरे घर-आंगन में 
क्‍यों नहीं करती शोर 
झुंड के झुंड बैठ बाजू वाले
पीपल की डाल पर... 

रूप-अरूप
--
नर्सरी के बच्चो से सीखो 
मेरे देश के भ्रष्ट और नालायक नेताओ

"तरुण की डायरी से .कुछ पन्ने.."

14 comments:

  1. बड़े ही रोचक व पठनीय सूत्र।

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  2. बहुत सुंदर चर्चा सुंदर सूत्रों के साथ । उलूक का आभार उसके आवारापन "आवारा होगा तभी तो
    उसने कह दिया होगा" को भी ले लिया साथ ।

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  3. सुंदर चर्चा. मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.

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  4. मेरी कविता कील को चर्चा मंच के इस अंक में स्थान देने के लिए धन्यवाद | कृपया मेरे नाम की वर्तनी सुधारे- सावित्री काला |

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  5. सुंदर चर्चा. मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार

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  6. रोचक व पठनीय सूत्र....... आभार !

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  7. बढ़िया प्रस्तुति व बढ़िया सूत्र , मेरे पोस्ट को स्थान देने हेतु आदरणीय राजेंद्र भाई व मंच को धन्यवाद
    ॥ जय श्री हरि: ॥

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  8. सुन्दर कड़ियों से सजी आज की चर्चा। चर्चा में शामिल करने के लिए आपका सादर धन्यवाद।।

    नई कड़ियाँ : विश्व किस्सागोई दिवस ( World Storytelling Day )
    विश्व गौरैया दिवस

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  9. सुन्दर सूत्र संकलन , मेरी रचना " चुप्पिया " को शामिल किये जाने का आभार

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  10. बहुत सुन्दर और विस्तृत लिंक्स...रोचक चर्चा...आभार

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  11. मेरी रचना को मंच में शामिल करने के लिए आभार ...!शास्त्री जी,,,

    RECENT POST - प्यार में दर्द है.

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  12. बढ़िया प्रस्तुति व बढ़िया सूत्र , मेरी रचना को स्थान देने हेतु मंच को धन्यवाद......
    बहुत सुन्दर और विस्तृत लिंक्स...
    शुक्रिया....!!

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  13. Rochak aur sundar sutra... Meri rachna shamil karne ke liye aabhar...

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