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Thursday, March 27, 2014

लोकतंत्र का महापर्व आया है ( चर्चा - 1564 )

आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है 
चुनावी बिगुल बज चुका है , नेता रैली पर रैली कर रहे हैं और मुलाज़िम चुनावी रिहर्सल में व्यस्त हैं आखिर लोकतंत्र का महापर्व जो आया है, ये बात और है कि सभी पर्वों की भाँति इसे भी दूषित करने वाले लोगों की कमी नहीं | लेकिन अगर चाहें तो सुधार ला सकते हैं क्यों क्या ऐसा नहीं हो सकता ?
चलते हैं चर्चा की ओर 
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उलूक टाइम्स
ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
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आभार
--
"अद्यतन लिंक"
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
--
सिर्फ एक दुआ ... 
जब तक आप के बीच रहूँ !!! 

आज मैं अपने जीवन के, ७२ बसंत पुरे कर चूका हूँ 
और ७३ वें बसंत में कदम रख रहा हूँ ... 
सफ़र कहाँ तक है ,कब तक है ,ये भविष्य के गर्भ में छिपा है ...  
आप से सिर्फ एक बात का इच्छुक हूँ,  
आप के स्नेह का ,आप की दुआ का ,  
स्वस्थ रहूँ ..दुआ कीजिये ... 

चर्चा मंच परिवार की ओर से 
आपका हार्दिक शुभकामनाएँ..
यादें...पर Ashok Saluja
--
क्या भाजपा किसी बहुत बड़ी कंपनी की 
एक कंपनी है ? 

तेताला प Er. Ankur Mishra'yugal' 

--
सेहत के लिए इस दौर का 
सबसे बड़ा ख़तरा बन रही है 
हमारी गंधाती हुई हवा 

आपका ब्लॉग पर 

Virendra Kumar Sharma
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गीतों में देखें संसार--(भाग--3) 

Fulbagiya पर हेमंत कुमार 

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बिगड़ जाएँ.... 

यही है चाह ख़ामोशी टेढ़ा मुंह कर ले और बातें बिगड़ जाएँ !! 
ख्वाब इतने हो बेशक्ल कि रातें बिगड़ जाएँ... 
Rhythm of words... पर Parul kanani
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पुस्तक समीक्षा... शब्द संवाद .... 

डा श्याम गुप्त....भारतीय नारी
--
"नन्हे सुमन की वन्दना" 
  
तान वीणा की सुनाओ कर रहे हम कामना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

अब ध्ररा पर ज्ञान की गंगा बहाओ,
तम मिटाकर सत्य के पथ को दिखाओ,
लक्ष्य में बाधक बना अज्ञान का जंगल घना।
माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना...
नन्हे सुमन

15 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा।
    चर्चा मंच के सबसे विश्वसनीय चर्चाकार
    आदरणीय दिलबाग विर्क जी की निष्ठा
    और श्रम को नमन करता हूँ।
    आभार आपका।

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  2. सुंदर सूत्र संयोजन दिलबाग का । उलूक का सूत्र "एक चोला एक देश से ऊपर होता चला जायेगा" शामिल किया आभार ।

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  3. बढ़िया सूत्र प्रस्तुति भी बढ़िया , विर्क साहब व मंच को धन्यवाद !
    बुद्धिवर्धक कहानियाँ - ( ~ प्राणायाम ही कल्पवृक्ष ~ ) - { Inspiring stories part -3 }

    ReplyDelete
  4. आज मैं अपने जीवन के, ७२ बसंत पुरे कर चूका हूँ
    और ७३ वें बसंत में कदम रख रहा हूँ ...
    सफ़र कहाँ तक है ,कब तक है ,ये भविष्य के गर्भ में छिपा है ...
    आप से सिर्फ एक बात का इच्छुक हूँ,
    आप के स्नेह का ,आप की दुआ का ,
    स्वस्थ रहूँ ..दुआ कीजिये ...

    चर्चा मंच परिवार की ओर से
    आपका हार्दिक शुभकामनाएँ..
    यादें...पर Ashok Saluja

    सलामत रहो -रोशन तुम्ही से दुनिया रौनक हो तुमही जहां की (ब्लॉग )

    ReplyDelete
  5. विविध रूप रस गंध लिए बेहतरीन चर्चा संक्षिप्त ,सुन्दर।

    ReplyDelete
  6. बहुत सुन्दर है आराधना के स्वर :

    "नन्हे सुमन की वन्दना"

    तान वीणा की सुनाओ कर रहे हम कामना।
    माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना।।

    अब ध्ररा पर ज्ञान की गंगा बहाओ,
    तम मिटाकर सत्य के पथ को दिखाओ,
    लक्ष्य में बाधक बना अज्ञान का जंगल घना।
    माँ करो स्वीकार सुमनों की प्रबल आराधना...
    नन्हे सुमन

    ReplyDelete
  7. मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा

    मैं बुझ गया तो हमेशा बुझ ही जाऊंगा ,

    कोई चराग नहीं है जो फिर जला लेगा।

    सुन्दर बंदिश है

    मैं इस उम्मीद पे डूबा के तू बचा लेगा

    मैं बुझ गया तो हमेशा बुझ ही जाऊंगा ,

    कोई चराग नहीं है जो फिर जला लेगा।

    सुन्दर बंदिश है

    ReplyDelete
  8. बहुत सुन्दर बहुत सटीक और चुनाव -गर्भित पोस्ट :

    Wednesday, March 26, 2014
    एक चोला एक देश से ऊपर होता चला जायेगा
    परिवार के परिवार
    जहाँ बने हैं सेवादार
    डेढ़ अरब लोगों का
    बना कर एक बाजार
    अगर लगाते हैं मेला
    करते हैं खरीद फरोख्त
    भेड़ बकरियों की तरह
    कहीं खोखा होता है
    कहीं होता है एक ठेला
    ऐसे मैं अगर कोई
    बदल भी लेता है
    अपना चोला
    तो तेरा दिल क्यों
    खाता है हिचकोला
    कुँभ के समय में ही
    कोई डुबकी लगायेगा
    गँगा मैय्या को
    अपने पापों की
    गठरी दे जायेगा
    खुद सोच
    पाँच साल कैसे
    एक चोला चल पायेगा

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  9. सुन्दर सशक्त अभिव्यक्ति


    आशाएँ मुस्काती हैं

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  10. राजनीति को देख कर, अक्ल गयी चकराय !
    कौन मसीहा मिले जों, पी.एम. उसे बने !!
    आप की रचना अच्छी है !

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  11. बहुत बढ़िया सभी

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  12. रोचक ...शुक्रिया ....

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