चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Friday, March 07, 2014

"साधना का उत्तंग शिखर" (चर्चा अंक-१५४४)

आज के इस चर्चा में मैं राजेंद्र कुमार आपका स्वागत करता हूँ।
~~"राज़ की बात"~~
शेर सिंह मोटा ताज़ा
पूरे जंगल का राजा,
वेजीटेरियन हो गया
पशुओं के प्रेम में खो गया
नज़ारा इतना विचित्र हो गया
शिकार था जो पहले
अब वो मित्र हो गया
दुश्मनों में प्यार उमड़ आया था,
पता है! जंगल में चुनाव आया था।
गुरु घंटाल 

साधना का उत्तंग शिखर

आशा सक्सेना 
साधना का उच्च शिखर
दूर दिखाई देता
वहां पहुँच साधना करना
सरल नहीं लगता। 


राजीव कुमार झा 


'पंचतंत्र' एवं ईसप की कहानियां बच्चों में बहुत लोकप्रिय हैं.इनके अनेक भाग प्रकाशित होते रहे हैं.इसके अलावा बाल पत्र-पत्रिकाओं में प्रमुखता से पंचतंत्र एवं ईसप की नीति कथाएँ प्रकाशित होती रही हैं.
रचना त्रिपाठी 
एक दिन की बात है मैं सुबह-सुबह बाथरूम में कपड़े धुलने के बाद स्नान करके बाहर निकली तो मेरे हा्थ में कपड़े से भरी बाल्टी को देखकर मेरे श्रीमानजी ने कहा- “अरे यार, तुम्हे ठंड लग जाएगी जल्दी से स्वेटर पहन लो” इतना सुनते ही  …… 
नीरज कुमार नीर
बीता कटु शीत शिशिर 
मोहक वसंत आया 
पुष्प खिले वृन्तो पर 
मुस्काये हर डाली. 
मादक महक चहुँ दिशा 
भरमाये मन आली.
यशोदा अग्रवाल 
यक़ीन मर गया मिरा, गुमान भी नहीं बचा
कहीं किसी ख़याल का निशान भी नहीं बचा

ख़मोशियाँ तमाम ग़र्क़ हो गयीं ख़लाओं में
वो ज़लज़ला था साहिबो बयान भी नहीं बचा.
अरुण साथी 
देखना तुम
ये घर मैं बना रही हूँ
इंट-गारे के साथ
अपना पसीना मिला रही हूँ..
(मित्र के बन रहे मकान पे काम करती इस मजदूरनी को देख मुझे लगा की वह यही कह रही है....)
प्रियंका जैन 
"मेरे दर्द को सींचा है तुमने.. 
जब-जब स्याह था आकाश..सितारों को बिखेरा तुमने..!! 
जब-जब था जाड़ा..बाँहों का कंबल ओढ़ाया तुमने..!! 
जब-जब तल्ख़ थी जेठ...
अमित श्रीवास्तव 
कानपुर मेडिकल कालेज के जूनियर डॉक्टर्स के साथ हुई घटना से जूनियर डॉक्टर्स के साथ साथ सभी डॉक्टर्स में भारी रोष व्याप्त हुआ | परिणाम स्वरूप देश भर की चिकित्सीय व्यवस्था प्रभावित हुई और दर्जनों मरीजों की चिकित्सा के अभाव में जान चली गई | एक छोटे से विवाद ने यह रूप ले लिया | इसके लिये जूनियर डॉक्टर्स के साथ साथ विधायक , पुलिस ,प्रशासन सभी जिम्मेदार हैं | यह घटना अवॉइड की जा सकती थी |
ममता वाजपेई 
किनारे
बांधे रहे नदी को
पर ये कभी नहीं कहा .की .
ठहर जाओ 
नदी भी बहती रही
छू छू कर उन्हें.....
तुषार राज रस्तोगी 
सजदे में तेरे झुकता हूँ 
कलमा मैं तेरा पढ़ता हूँ 
राहों में तेरी फिरता हूँ 
ज़िक्र मैं तेरा करता हूँ 
यादों में तेरी बसता हूँ 
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अभिमन्यु भारद्वाज  
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आमिर दुबई 
डियर रीडर्स , पिता के बारे में इतना सुन्दर किसी ने फेसबुक पर लिखा था ,मुझे इसके अल्फाज़ बहुत पसंद आये ,इसलिए इसे शेयर कर रहा हूँ ,ये उसी भाई को समर्पित कर...


चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’

कुँवर कुसुमेश


लीजिये फिर से इलेक्शन का दौर आया है। 
वोटरों के लिए उलझन का दौर आया है। ।
सुरेश स्वप्निल
ज़िंदगी यूं रवां नहीं होती
और ग़फ़लत कहां नहीं होती

क्या मुअम्मा है, तिरे कूचे में
कोई हसरत जवां नहीं होती
सारिक खान 
मेरा फोटो
मैं और मेरे सिंगर साथी ने
बातों-बातों में एक गाने का मुखड़ा बनाया ।
साथ बैठे निर्देशक ने कहा कि 
इस गाने की पूरी धुन व गीत बनाया जाये ।
किसी शायर से गाना पूरा लिखवाने के बाद
निर्देशक ने मुझे दिया और कहा कि धुन के साथ गाना तैयार करना है ।

गिरधर की मीरा –महादेवी

भारती दास 
वो प्रतिमा थी तपस्वनी
श्वेत –वस्त्रा अंग धारिणी
सरस्वती सी रूप था शोभित
थी साहित्य की शिखर वासिनी.
शालिनी कौशिक 
लड़ती हैं
खूब झगड़ती हैं
चाहे जितना भी
दो उनको
संतुष्ट कभी नहीं
दिखती हैं
वाणभट्ट
नारी 
जब माँ बनती है 
तो बड़े गर्व से कहती है 
मैंने बेटा जना
श्याम कोरी 'उदय'
इक दिन, उन्हें भी दुःख होगा और वो बहुत पछतायेंगे 
मुहब्बत को,… जुबां पे न लाकर गुनह किया है उन्ने ?
पूर्णिमा दूबे 
प्राचीन यूनान में सुकरात को महाज्ञानी माना जाता था. एक दिन उनकी जान पहचान का एक व्यक्ति उनसे मिला
और बोला, ” क्या आप जानते हैं मैंने आपके एक दोस्त के बारे में क्या सुना ?”
रश्मि शर्मा
इस बार
झरबेरि‍यों के
कच्‍चे-पक्‍के बेर में है
बड़ा अनूठा स्‍वाद
जैसे
रीना मौर्या 
नौ महीने से 
सींचा कोख मे माँ ने 
राजकुमारी
आशीष भाई 
अभी कल शाम को एक ईमेल आया जिसे देखते ही मेरा सर-च कराया , जिसमें ये पूंछा गया...
कुशवंश
मेरे शहर
मुझे बहुत याद आते हो तुम
दूर तक सड़कों पर
इक्का दुक्का वाहन
मै साइकिल पर
कोसता फिरता था
कभी अपने को
प्रबोध कुमार गोविल 
भारतीय लोकतंत्र के रथ में जुते घोड़ों की मियाद पूरी हो रही है। मई के तीसरे सप्ताह के शुरू होते ही एक ऐसी ताज़ा बयार आएगी जो इन कालातीत घोड़ों के भाग्य का फैसला कर देगी।
आज की  चर्चा को यहीं पर विराम देते हुए विदा चाहूंगा इस अनमोल वचन साथ । 
"आपका दिन मंगलमय हो"


17 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार राजेन्द्र भाई
    अच्छी रचनाओं से रूबरू करवाया आपने
    सागर

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  2. महाधन्य सूत्रों के साथ मेरा सूत्र जोड़ने के लिए हरमंच को मन से धन्यवाद , व राजेंद्र भाई को उनकी बेहतरीन लिखी हुई कृति के लिए दिली धन्यवाद ( A )
    Information and solutions in Hindi

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  3. बहुत सुन्दर चर्चा।
    आदरणीय राजेंद्र कुमार जी आपका आभार।

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  4. सुन्दर और भावपूर्ण सूत्र |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद राजेन्द्र जी |

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  5. बहुत सुंदर चर्चा ! राजेंद्र जी.
    'देहात' से मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.

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    Replies
    1. स्वागत हूँ के बीच में एक शब्द 'करता' छूट गया है.

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    2. आपका आभार राजीव जी.

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  6. सुंदर सूत्र संकलन सुंदर चर्चा ।

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  7. सुंदर चर्चा.
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद.

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  8. धन्यवाद राजेंद्र जी...

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  9. बड़े ही रोचक व पठनीय सूत्र..

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  10. बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति।
    सभी की लेखनी एक से बढ़कर एक। सभी सम्मानित जनों को हार्दिक बधाई।

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  11. बहुत अच्‍छी चर्चा लगी....मेरी रचना को शामि‍ल करने के लि‍ए आपका आभार

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  12. चर्चामंच में सुंदर ब्लॉग संकलन और वाणभट्ट की रचना को शामिल करने के लिए...धन्यवाद...

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