चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, April 08, 2014

"सबसे है ज्‍यादा मोहब्‍बत" (चर्चा मंच-1576)

मित्रों नमस्कार।
सबसे पहले आप सबको
नवरात्र की नवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
अब देखिए मेरी पसंद के लिंक!
कमेंट का भी अपना अलग आनन्द है।
हमारे सहयोगी की कल विवशता थी
चर्चा लगाने में।
मगर उन्होंने एक बार भी
पश्चाताप नहीं किया अपितु
सारा दोष मेरे सिर पर मढ़ दिया।
खैर कोई बात नहीं।
अब देखिए Neetu Singhal क्या कहती हैंं
यदि यह मंच है तो इसे मंच ही रहने दें, 
विज्ञापन पटल न बनाएं.....
मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि 
चर्चा मंच में विज्ञापन कहाँ हैं?
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अब देखिए कुछ अद्यतन लिंक...
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मर्यादा से बंधे हुए वे पुरुषोत्तम भगवान हैं ,
दशरथ जी के राजदुलारे मनभावन श्रीराम हैं .
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सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं देश के बुद्धिजीवियों से निवेदन 
आपको इतना तो अवगत होगा कि 
किसी भी स्वाधीन, सार्वभौम, प्रजातांत्रिक राष्ट्र के 
चार प्रमुख संवैधानिक आधार होते हैं- 
1. संविधान 
2. राष्ट्रगान 
3. राष्ट्रध्वज 
4. राष्ट्रभाषा

हमारा प्रस्ताव है कि राष्ट्र के प्रति सच्चे प्रेमी 
और वफादार नेता तथा बुद्धिजीवी 
इस विषय में गम्भीर चिन्ता करें 
और भारत की जनता राष्ट्र की आकांक्षाओं को 
मूर्त रूप देने के लिए आगे आएं।

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उन्हें अमर हो जाने की चाह है
इसलिए वे साम दाम दंड भेद की
नीति पर चलते हैं
गिरने को तैयार हैं
किसी हद तक
गिराने को तैयार हैं सबको..
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उलझनें रूह बन गयी हैं या रूह उलझनों का गुलशन  
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वह क्या जाने पीर हार की 
जो कभी हारा ही नहीं 
आहत मन ही जानता है 
महत्व चोट के अहसास की...
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धुंधकारी.. 

प्रश्न उठता है  ....
होगा क्या …?
शोषितों के हित में 
व्यवस्था परिवर्तन ??
व्यक्ति परिवर्तन??
या फिर से सुनाई देगा 
कुछ समय बाद 

वही पुराना राग...
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आसमान की कि‍ताब में....  

छोड़ दि‍या उसे मैंने 
जि‍ससे सबसे ज्‍यादा थी मोहब्‍बत...
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'डिमांड..'  

... "तुम्हें पा ज़िन्दगी से नाता तोड़ा था जब..  
एहसां ज़िन्दगी पर..कर दिया था बस.. 
कहती थी तुमसे हाले-दिल सुबह-शाम.. 
इसीलिए सर झुका गया..फ़क़त आसमान....
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श्रीमद्भगवद्गीता-भाव पद्यानुवाद 
(१८वां अध्याय)  

मेरी प्रकाशित पुस्तक  
'श्रीमद्भगवद्गीता (भाव पद्यानुवाद)' 
के कुछ अंश:...
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ताज  

आहिस्ता बोलो ! आहिस्ता ! 
भारत की दो विभूतियां सोयी हुई है | 
उनको सोये आज तीन सदियां हो गयी है | 
तीन सदियों से लगातार 
सुगन्धित द्रव्यों का धुँआ उठता और...
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‘गवेषणा’ हो ‘सत्य’ की, हो ‘असत्य-अवरोध’ !
कुछ ‘अद्भुत’, कुछ ‘तथ्य-नव’, का कर पायें ‘शोध’ ||
‘चमत्कार’ हों कर्म के, ‘शठ-माया’ से दूर !
‘ज्ञान’ और ‘विज्ञान’ हों, ‘यथार्थ’ से भरपूर !!
‘मिथ्यापन’ से अलग हों, ‘जीवन’ के ‘व्यवहार’ !
मुझे निकालो यत्न कर, हर ‘अवगुण’ के पार !
देवदत्त प्रसून
[sperrow.jpg]
चिड़िया रानी फुदक-फुदक कर,
मीठा राग सुनाती हो।
आनन-फानन में उड़ करके,
आसमान तक जाती हो..
ज्ञान दीप जब मन में जलता,
अंतस जगमग होजाता है |
मिट जाता अज्ञान तमस सब,
तन-मन ज्ञान दीप्त हो जाते |
नव-विचार युत, नव-कृतित्व के, 
कितने भाव मुखर हो उठते...
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बेचने वाला भी अशांत खरीदने वाला भी बिकने वाला भी अशांत
लगता मुझे मानो कोई गूंगा किसी बहरे अंधे को राह बता रहा हैं...
जब होगा मेरे भारत में  सबसे सुखी किसान।
तब जग का शिरमौर बनेगा, अपना हिन्दुस्तान।।
"ऐसे होगा देश महान"
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ईमेज होस्टिँग की सबसे बेहतरीन और सरल वेबसाइट 

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साथी हाँथ बढ़ाना - ये एक सन्देश है ?  
या फिर सिर्फ एक गीत 
जो आज से कई दशक पहले लिखा गया था , 
कभी कभी सोंचता हूँ 
ये किस सोंच से लिखा गया होगा , 
क्योंकि आज हमारे युवा वर्ग को देख के 
ये बात कुछ जचती नहीं...
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सर्च इंजन कैसे कार्य करता है? 

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सेहतनामा

Virendra Kumar Sharma
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भूल कर भी, अब तुम यकीं, नहीं करना 
पूरी ग़ज़ल पढ़िए..
भूल कर भी, अब तुम यकीं, नहीं करना
बात सच हो, जो अब कहीं, नहीं करना

सामने जो, मुँह मियाँ, बनते हों मिठ्ठू
सोच, जाँ देने की वहीँ, नहीं करना

लाख चाहे, आये यहाँ, मुसीबत गर 
तुम कभी भी, गिरवी ज़मीं, नहीं करना

लूट के बिख़रे, हम, यहाँ ज़माने में
मश्'वरा अब, ऐसा अभी, नहीं करना

भूल कर भी, अब तुम यकीं, नहीं करना
बात सच हो जो, अब कहीं, नहीं करना
अभिषेक कुमार अभी
--
कार्टून :- अबकी बार मोदी सरकार

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वह जो क्षितिज है..धुँधला सा..
मुझे वहीँ पहुँचना है..
यह देखने के लिए की..
मुझे वहाँ से भी यह धुँधला लगता है..
या फिर किसी को मैं भी धुँधला दिखता हूँ...

10 comments:

  1. सुप्रभात
    कार्टून बढ़िया है |आज के चर्चामंच में मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  2. साहित्यिक श्रम से संजोये सूत्र।

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  3. सुंदर सूत्रों के साथ हमेशा की तरह सुंदर चर्चा ।

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  4. धन्यवाद मयंक साब..!!!

    सादर आभार..

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  5. शाश्त्री जी बहुत धन्यवाद , जो दोनों सूत्रों को मंच पर जगह प्राप्त हुई वो भी बढ़िया प्रस्तुति के साथ , मंच को धन्यवाद !
    Information and solutions in Hindi ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  6. बहुत खूब...सुंदर संकलन...

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  7. BHAYI SAHIB MAIN AAPKA BAHUT HI SHUKARGUZAR HOON .AAP MERE BLOG KEE RACHNAON KO CHARCHA MANCH MAIN STHAN DETE HAIN , YE AAPKI SHRIDYATA HAI !! MERE BLOG OR GOOGLE+ KEE KUCH SETINGS KHARAB HO GAYI HAIN JINKI WAJAH SE MAIN KISI BHI POST KO NAA TO LIKE KAR PAA RAHA HOON OR NAA HI US PAR KOI COMMENT LIKH PAA RAHA HOON . MAAFI CHAHTA HOON DHANYWAAD !! SANKALAN BAHUT HI SHAANDAAR HOTA HAI !!

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  8. बहुत सुन्दर और रोचक चर्चा...आभार

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  9. बहुत खूब...सभी मि‍त्रों को रामनवमी की शुभकामनाएं....मेरी रचना शामि‍ल करने के लि‍ए आभार...

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  10. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति हेतु आभार!
    सबको रामनवमी की शुभकामनाएं!

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