चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Tuesday, May 20, 2014

"जिम्मेदारी निभाना होगा" (चर्चा मंच-1618)

मित्रों।
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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प्रचण्ड गर्मी- 

(हाइकू)

गर्मी के दिन 
खिले अमलतास 
मन को भाये 
भूली-बिसरी यादेंपर राजेंद्र कुमार
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हे पार्थ ! 

मैं सिंहासन पर बैठा 
अपने धर्म और कर्म से अंधा मनुष्य , 
मैं धृतराष्ट्र देखता रहा , सुनता रहा 
और द्रोपती के चीरहरण में 
सभ्यता , संस्कृति तार तार हुयी...
स्पर्शपर Deepti Sharma
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चुनावी क्षणिकाएँ

वे 
दिखाएंगे 
पूरी ईमानदारी 
स्वीकार करेंगे 
हार की ज़िम्मेदारी 
जनता के फैसले का 
करेंगे स्वागत 'औ 'सम्मान 
क्यूंकि 
आज भी 
महात्मा गांधी है 
मजबूरी का 
दूजा नाम । 
कुमाउँनी चेलीपर शेफाली पाण्डे
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पर सजा का हाथ में फरमान है ... 

काठ के पुतलों में कितनी जान है 
देख कर हर आइना हैरान है 
कब तलक बाकी रहेगी क्या पता 
रेत पर लिक्खी हुयी पहचान है...
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पीनेवालों का महजब 

दुनियावालों 
हम पीनेवालों का महजब ना पूछो 
साकी की जात ना पूछो 
मयख़ाने की गलियों की बहार ना पूछो 
छलकते जामों की लय ताल ना पूछो... 

RAAGDEVRANपर MANOJ KAYAL
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जिम्मेदारी निभाना होगा 

आश टूटे न दिल हो आहत
बढे देश की गरिमा ताकत
एक हो भारत श्रेष्ठ हो भारत
हो सुन्दर अपना ये भारत
अब वो कर्ज चुकाना होगा
जिम्मेदारी निभाना होगा... 
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प्यारी सजनी 

काव्यान्जलिपर धीरेन्द्र सिंह भदौरिया
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माँ तुझे सलाम ! (६) 

मुकेश कुमार सिन्हा    
मेरा सरोकारपर रेखा श्रीवास्तव 
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जो हो इक रिश्ता ख्वाब सा 

लिखती हूँ कलम से
दिल की किताब पर
एक नाम अनाम सा
शायद कहीं वो मिल जाये
जो हो इक रिश्ता ख्वाब सा...
vandana gupta
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कठिन डगर 

Loveपर Rewa tibrewal
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.परAamir Dubai 
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मोदी [ दोहावली ] 

सोलह सोलह सब करें, सोलह आई यार 
अच्छे दिन लो आ गए, अब ख़त्म इंतज़ार...
गुज़ारिशपरसरिता भाटिया
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"फिर से आया मेरा बचपन" 

जब से उम्र हुई है पचपन। 
फिर से आया मेरा बचपन।। 

पोती-पोतों की फुलवारी, 

महक रही है क्यारी-क्यारी, 
भरा हुआ कितना अपनापन। 
फिर से आया मेरा बचपन।। 
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10 comments:

  1. शुभ प्रभार
    सुन्दर सूत्र संयोजन

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  2. बहुत सुंदर सोमवारीय चर्चा । 'उलूक' के सूत्र 'लिख लिया कर लिखने के दिन जब आने जा रहे होते हैं' को स्थान देने के लिये आभार।

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  3. बहुत सुन्दर लिंक्स संजोये हैं …………आभार

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  4. बढ़िया लिंक्स व बेहतरीन प्रस्तुति , हमारे लिंक को स्थान देने हेतु आदरणीय शास्त्री जी व मंच को सदा ही धन्यवाद !
    ॥ जय श्री हरि: ॥

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  5. बढ़िया लिख ... अच्छे सूत्र ...
    आभार मुझे भी शामिल करने का ...

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  6. आपका संकलन बेहद सुन्दर होता है ,मेरी रचना को शमिल करते है .आभार सर

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  7. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति।
    आभार !

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  8. सुंदर सूत्रों से सजा मंच। कुछ देखें कुछ देखते हैं।

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  9. बढ़िया लिंक्स व बेहतरीन प्रस्तुति

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