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Saturday, May 31, 2014

"पीर पिघलती है" (चर्चा मंच-1629)

मित्रो।
आजकल मेरी व्यस्तताएँ बढ़ी हुई हैं,
उनके बीच से समय चुराकर
कुछ लिंक शनिवार की चर्चा में प्रस्तुत कर रहा हूँ।

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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माँ तुझे सलाम ! 

माँ हर इंसान की एक ही होती है , वह होती है एक आम औरत जो अपने जीवन में तमाम रिश्ते और नामों को लेकर चलती रहती है लेकिन जो माँ का रूप होता है वह सबसे अनमोल - जिसका रिश्ता अपने बच्चे के अपने गर्भ में पालने का एक अहसास होता है जिसका दर्द उसे अपने से अधिक भरी लगता है। वह बाँट चाहे न पाये लेकिन उसकी ममता से भरा हाथ जब सर पर रखा होता है तो लगता है की कोई है मेरे ऊपर जो मेरे लिए दुआ करता है और उसके रहने तक मेरी हर मुसीबत उसकी बन कर मेरे लिए हलकी हो जाती है। इसी लिए कह रहे हैं - वो होते हैं किस्मत वाले जिनके माँ होती है : *एस एम मासूम। *
मेरा सरोकारपररेखा श्रीवास्तव 
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साभार - डा ० वेद प्रताप वैदिक

मोर का नाच है हिंदी पत्रकारिता...  
*डॉ. वेदप्रताप वैदिकवरिष्ठ स्तंभकार* 
PITAMBER DUTT SHARMA
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तुम आये भी तो... 

मीमांषा पर  rashmi savita
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एक प्रेम का दीप जला जाना 

जब शाम ढले और रात चले 
तुम मन मन्दिर में आ जाना 
आकर के तुम उसमें बस 
एक प्रेम का दीप जला जाना...
उड़ान पर Anusha
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क्षणिकाएं 

Akankshaपर Asha Saxena
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अजय माकन नेहरू -इंदिरा कांग्रेस की तरफदारी 

जो अब सोनिया कांग्रेस बनके रह गई है 
उसकी बौद्धिक क्षमता के बारे में भी 
उन्हें पता होना चाहिए...
Virendra Kumar Sharma
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जलते प्रश्न 

क्रूर प्रतिशोध प्रकृति का था या,
भ्रष्ट मानव की धृष्टता का फल?

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चूडधार यात्रा-1 

नीरज कुमार ‘जाट’
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मॉडर्न बीबियाँ 

सुनती हैं इस कान से ,उस कान से देती निकाल ,
बात अपने पतियों की,भला सुनता  कौन है 
आजकल इस बात की भी उनको है फुर्सत नहीं,
कान में अब लगा रहता ,उनके ईयर फोन है ...
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रेलें असमाजिक तत्वों की सैर-गाह हो गयी हैं 

मोदी जी ने आते ही देश में 
बुलेट ट्रेन चलाने की अपनी इच्छा जाहिर की थी। 
अच्छी बात है सफर में 
समय कम लगेगा, काम जल्द निपटेंगे...
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा
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शायद 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
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मतदाता एवं मतग्रहिता की जीवनशैली 
समान रूप से द्रष्टिगत होना ही 
'समानता' की वास्तविक एवं संवैधानिक परिभाषा है 
जो कि एक उत्तम लोकतंत्र का महत्वपूर्ण लक्षण भी है ...
NEET-NEETपरNeetu Singhal 
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रुबाइयाँ - 

करण समस्तीपुरी 

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एक खुश चेहरे को देख कर 
एक चेहरे का बुझ जाना 
एक बुझे चेहरे का 
एक बुझे चेहरे पर खुशी ले आना 
एक चेहरे का बदल लेना चेहरा 
चेहरे के साथ बता देता है 
चेहरा मौन नहीं होता है ... 
उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी
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"ग़ज़ल-मुहब्बत कौन करता है" 

खुदा की आजकल, सच्ची इबादत कौन करता है
बिना मतलब ज़ईफों से, मुहब्बत कौन करता है

शहादत दी जिन्होंने, देश को आज़ाद करने को,
मगर उनकी मज़ारों पर, इनायत कौन करता है...
उच्चारण
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कंप्यूटर है ! - तो ये मालूम ही होगा - भाग - ३
चित्र प्रदर्शित नहीं किया गया

आशीष भाई
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प्रश्नोत्तर 

प्रश्नचिन्ह मन-अध्यायों में,
उत्तर मिलने की अभिलाषा ।
जीवन को हूँ ताक रहा पर,
समय लगा पख उड़ा जा रहा... 
praveenpandeypp@gmail.com
प्रवीण पाण्डेय 

8 comments:

  1. बढ़िया चर्चा |

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  2. Beautiful title.... nice presentation.
    And thanx to include me here.

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  3. सुन्दर पठनीय सूत्रों से सजा आज का चर्चा मंच
    |अपनी क्षणिका देख यहाँ हुआ बहुत आनंद |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  4. बढ़िया लिंक्स व प्रस्तुति , मेरे पोस्ट को स्थान देने हेतु आदरणीय शास्त्री जी व मंच को धन्यवाद !
    I.A.S.I.H - ब्लॉग ( हिंदी में समस्त प्रकार की जानकारियाँ )

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  5. KYAA BAAT HAI JI AAPKE CHARCHAA MANCH KI YE TO HAMARA SAA LAGTA HAI !! BAHUT BAHUT DHANYWAAD MERI RACHNA KO SHAAMIL KARNE HETU !!

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  6. बहुत ही बढियाँ चर्चा ,धन्यवाद

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  7. बहुत अच्छे लिंक्स
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका आभार
    सादर।।

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