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Saturday, October 18, 2014

आदमी की तरह (चर्चा मंच 1770)

आज के शनिवासरीय चर्चा में राजीव उपाध्याय आपका हार्दिक स्वागत करता है।
सोचता था, आदमी हूँ मैं अच्छा
पर,
जब नज़र उठा कर देखा, तो मैं कोई और था।


आप जानते हैं

चाँद चमकता क्यों है

क्यों की सूरज की किरणे
उस पर पड़ती हैं


याद है मुझे अच्छे से

वो जुलाई दो हजार आठ का

छब्बीसवां दिन था और 

भोपाल से सीधा पहुंचा था अस्पताल में,

माँ के आप्रेशन का बारहवां दिन था
पापा ने बोला बेटी बड़ी हो गयी 

किसी अच्छे लड़के की तलाश है
सौ अरब डॉलर का पूंजी निवेश भारत का दरवाजा खटखटा रहा है। अब यह राज्यों पर निर्भर है कि वे इसमें से कितना हिस्सा अपने यहां ले जाने में सफल होते हैं। ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहते हुए राज्यों के सामने एक चुनौती पेश की कि वे आगे बढ़ें और अपने राज्य को समृद्ध करने की दिशा में सक्रिय हो जाएं।
राजेन्द्र जोशी
किया था एक समझौता

तुम्हारे साथ

नजदीक रहने भर का

तुम्हीं से
 विश्व के अंदर अहिंसा का सबसे बड़ा उपदेश देने वाला देश भारत जिसने महात्मा बुद्ध जैसे महापुरुष को जन्म दिया, शांति की स्थापना कब हो सकती है जब मानवता वादी सकारात्मक सात्विक विचार वाले शक्ति सम्पन्न होंगे 

सूखी स्याही कलम की 
लिखावट तक स्पष्ट नहीं 
धूमिल हुई
आंसुओं की वर्षा से 
समीप ऐसा कोई नहीं 
जो हाथ बढाए उसे रोक पाए 
दिमागी अंधड़ से बचा पाए 
सब मेरे ही साथ क्यूं ?


तेरी शैतानियों पर 

कभी गुस्सा.. 

तो कभी प्यार आता है, 

बुझा दो रोशनी छेड़ो नहीं सोए पतंगों को

जगा देती हैं दो आँखें जवाँ दिल की उमंगों को



जो जीना चाहते हो ज़िन्दगी की हर ख़ुशी दिल से

जरा रोशन करो उजड़ी हुई दिल की सुरंगों को
सत्यमेव जयते  
सत्य ब्रह्म  है  सत्य ईश है , शेष सभी को मिथ्या जान
परम आत्मा चाहे कह लो , या  कह लो  इसको भगवान
सतयुग त्रेता  द्वापर कलियुग , जितने भी युग जायें बीत
अटल सत्य था अटल सत्य है सदा सत्य की होती जीत...
अरुण कुमार निगम 
(हिंदी कवितायेँ)
"ग़ज़ल-मात अपनी हम बचाना जानते हैं" 
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

बैर को मन में नहीं हम ठानते हैं
दुश्मनों को दोस्त जैसा मानते हैं
उच्चारण
कीड़े खाने वाले पौधे 

Fulbagiya पर डा0 हेमंत कुमार
इश्क उसने किया ..... 
इश्क उसने किया,सन्देश मुझे मिला 
इश्क मैं ने किया सन्देश उन्हें न मिला ! 
वो खमोश थी ,उन्हें तारीफ़ मिली 
मैंने इज़हार किया ,मुझे दुत्कार मिला ... 
मेरे विचार मेरी अनुभूति पर 

कालीपद "प्रसाद"
 ॥ उत्तर-काण्ड २१ ॥ - 
 कहत सुमति हे सुमित्रानंदन । 
फिरत सरआति मुनिबर च्यवन ॥ 
फेर फिरत अगिन्हि कर धारे । 

कनिआँ के बन प्रान अधारे ॥... 
NEET-NEET पर Neetu Singhal

10 comments:

  1. सुप्रभात
    सुन्दर संयोजन सूत्रों का |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार |

    ReplyDelete
  2. सुन्दर लिंक्स। मुझे शामिल किया,आभार।

    ReplyDelete
  3. बहुत सुंदर शनिवारीय अंक ।

    ReplyDelete
  4. सुन्दर लिंक्स।

    आज हिंदी ब्लॉग समूह फिर से चालू हो गया आप सभी से विनती है की कृपया आप सभी पधारें

    - शनिवार- 18/10/2014 को नेत्रदान करना क्यों जरूरी है
    हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः35

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  5. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ..
    आभार!

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  6. कुछ नए लिंक्स से सजा चर्चा मंच ...
    आभार मुझे भी शामिल करने का ...

    ReplyDelete
  7. बहुत बढ़िया चर्चा

    ReplyDelete
  8. बहुत बढियाँ चर्चा

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  9. Bahut sunder charcha ...meri rachna shamil karne ke liye aapka aabhar Rajeev ji !!

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