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Monday, November 03, 2014

"अपनी मूर्खता पर भी होता है फख्र" (चर्चा मंच-1786)

सोमवार की चर्चा में आप सबका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ अद्यतन् लिंक।
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रीति-रिवाज बनाम अंधश्रद्धा 

रीति-रिवाज़ और नियम दोनों में फर्क है। समाज बिना रीति-रिवाजों के चल सकता है लेकिन बिना नियमों के नही चल सकता। जिन नियमों को हम भावावेश में पकड़े रहते है वे रिवाज़ बन जाते है। जैसे की रास्ते का नियम है कि आप बाएं चलिए। किसी देश में रास्ते का नियम हो सकता है कि आप दाएं चलिए। यह कोई रिवाज नही है। हम अपनी सुविधा के लिए नियम बनाते है। जीवन जीने के लिए नियमों का पालन करना ज़रूरी है लेकिन जब हम इन नियमों को रीति-रिवाज़ बना लेते है और नई पीढ़ी से आशा करते है कि वह बिना किसी तर्क-वितर्क के इन पुराने रीति-रिवाजों को माने तो यह संभव नही है...
आपकी सहेली पर jyoti dehliwal 
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पुस्तक समीक्षा-- 
बच्चों का विकास और बड़ों की जिम्मेदारियां 

लेखिका-अर्पणा पाण्डेय 
प्रकाशक-किताबघर, 24 /4855, 
अंसारी रोड,दरियागंज, नई दिल्ली-110002 
मूल्य-140रूपये।
क्रिएटिव कोना
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रोज सुबह उठकर 
तुम्हारे ख़्वाब चुनती हूँ 
पूजा के फूलों के साथ झटकती हूँ, 
सँवारती हूँ गूँथ लेने को 
और गूँथ कर उन्हें सजा लेती हूँ 
मेरे माथे पे 
मेरी आँखों की चमक बढ़ जाती है 
और निखर जाता है रूप मेरा... 

मेरे मन की पर अर्चना चावजी
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कथांश - 24. 

मेरा फोटो
लालित्यम् पर प्रतिभा सक्सेना 
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अकूत संपदा 

Akankshaपर आशा सक्सेना
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ऐसी भी तमन्ना है  

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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तुझे मना लूँ प्यार से ! 

चाहता हूँ ,तुझे मना लूँ प्यार से 
लेकिन डर लगता है तेरी गुस्से से ! 
घर मेरा तारिक के आगोश में है 
रोशन हो जायगा तेरी बर्के-हुस्न से... 
कालीपद "प्रसाद"
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बीज 

Sudhinama पर sadhana vaid 
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आदत 

आदत अल्ताफ हुसैन ने घर पहुँच कर अपना थैला जमीन पर रखा और आँगन पर रखी खटिया पर बैठ गया। शबाना पानी ले आई पानी पीते उसने शबाना को देखा और मुँह पोंछते उससे पूछा "सब ठीक ठाक तो है ?" शबाना ने सिर हिलाकर जवाब दिया हाँ सब ठीक है...
कहानी Kahani पर kavita verma 
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काव्य कथा ने बना दिया 

एक देशभक्त राजा को देशद्रोही 

ज्ञान दर्पण पर पिछली पोस्ट में भी आपने पढ़ा कि पत्रकार, साहित्यकार डा. आनन्द शर्मा ने कैसे जयचंद पर शोध किया और उन्हें जयचंद के खिलाफ इतिहास में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले कि जिनके आधार पर जयचंद को गद्दार ठहराया जा सके| डा. आनंद शर्मा अपने ऐतिहासिक उपन्यास “अमृत पुत्र” के पृष्ठ 48 पर राजस्थान के राठौड़ राजवंश का परिचय देते हुए लिखते है – “राठौड़ राजवंश की गहड़वाल (गहरवार) शाखा के चन्द्रदेव ने सन 1080 के आ-पास कन्नौज विजय के द्वारा राठौड़ राज्य की स्थापना की पुन:प्रतिष्ठा की| इसके वंशज जयचंद्र ने सन 1170 में कन्नौज का राज्य संभाला| उत्तर भारत के प्रमुख चार राजवंशों में से एक, दिल्ली और अजमेर के अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज के साथ जयचंद्र का शत्रु भाव था... 
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चुनौतियाँ 
कठिनाइयाँ नहीं बाधायें राह की,
चुनौतियां देती प्रेरणा और जोश
मंज़िल को पाने की,
लगती हैं चुनौतियाँ कठिन
जब होता सामना उनसे,
लेकिन हो जातीं कितनी छोटी
उन पर विजय के बाद,
चलती गाड़ी से दिखते 
पेड़ की तरह,
लगता विशाल नज़दीक आने पर
लेकिन दिखता कितना छोटा
पीछे छूट जाने पर।
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"संस्मरण-2...मेरी प्यारी जूली" 

....मैं प्रतिदिन सुबह 4 बजे उठकर घूमने के लिए जाता था और पिल्लू मेरे साथ-साथ चल पड़ता था। एक दिन मैं जब उठकर घूमने के लिए जा रहा था तो देखा कि कि पिता जी की चारपाई से कुछ दूर एक साँप लहूलुहान मरा पड़ा था तो मुझे यह समझते हुए देर न लगी कि पिल्लू ने ही यह सब किया होगा।
     इस वफादार ने अपनी जान की परवाह न करते हुए साँप को मार डाला और मेरे पिता जी रक्षा की।
     ऐसे होते हैं ये बिन झोली के फकीर।
     मालिक के वफादार और सच्चे चौकीदार।।

12 comments:

  1. सुप्रभात
    सोमवार की चर्चा नें
    देखी अपनी रचना
    मन में आशा जागी
    लगा नहीं कोई सपना |
    उम्दा चर्चा ,कार्टून और सूत्र |

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  2. सुंदर चर्चा । 'उलूक' का आभार सूत्र 'अपनी मूर्खता पर भी होता है फख्र ' की चर्चा से शुरुआत हुई है ।

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  3. आदरणीय शास्त्री जी,
    अभी पूरे नहीं पढ़ पाई हूँ पर सुन्दर लिंक्स के लिए आभार .

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  4. कितने सारे सूत्र ... बधाई चर्चा की ...

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  5. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...आभार!

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  6. आदरणीय शास्त्री जी,
    सुन्दर लिंक्स के लिए एवम् मेरी प्रविष्टि शामिल करने के लिए आभार.

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  7. बहुत सुन्दर और रोचक लिंक्स...आभार

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  8. सुन्दर चर्चा व सूत्र संकलन
    साभार !

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  9. बहुत सुन्दर संकलन

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  10. sabhi links sarthak v padhne yogy hain .meri rachna ko yahan sthan pradan karne hetu hardik aabhar

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  11. बहुत सुन्दर चर्चा शास्त्री जी ! मेरी रचना को इस चर्चा मंच पर स्थान देने के लिये आपका बहुत-बहुत आभार !

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