साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Tuesday, November 04, 2014

रोज अन्यथा झेल, और भी बड़ा धमाका ; चर्चा मंच 1787




बड़ा धमाका पाक में, गया सैकड़ों मार । 
वैसा ही विस्फोट था, वैसा ही चित्कार । 

वैसा ही चित्कार, ठीक भारत में जैसे । 
वही लोथड़े खून, पड़े शव जैसे तैसे । 

सचमुच अगर शरीफ , पाक कर पाक इलाका । 
रोज अन्यथा झेल, और भी बड़ा धमाका॥ 

पाकिस्तान में धमाका



noreply@blogger.com (पुरुषोत्तम पाण्डेय) 




shashi purwar 


Sushil Bakliwal 




shikha kaushik 




Vinay Prajapati (Nazar)




Virendra Kumar Sharma 




स्वप्न मञ्जूषा 



पूनम श्रीवास्तव 


12 comments:

  1. सुप्रभात
    उम्दा संयोजन सूत्रों का |

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  2. बहुत सुन्दर और संतुलित चर्चा।
    आपका आभार रविकर जी।

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  3. बहुत सुंदर सूत्र संयोजन रविकर जी ।

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  4. सुंदर चर्चा...आभार...

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  5. बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ....आभार!

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. Bahut sunder andaaz prastuti ka hamesha ki tarah abke baar bhi links lajawaab hai !!

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  8. बड़ा धमाका पाक में, गया सैकड़ों मार ।
    वैसा ही विस्फोट था, वैसा ही चित्कार ।

    वैसा ही चित्कार, ठीक भारत में जैसे ।
    वही लोथड़े खून, पड़े शव जैसे तैसे ।

    सचमुच अगर शरीफ , पाक कर पाक इलाका ।
    रोज अन्यथा झेल, और भी बड़ा धमाका॥

    सुन्दर सामयिक प्रस्तुति वही काटोगे जो बोवोगे।

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  9. ये नौकरीपेशा लोगों की दूर निर्वासन की पीड़ा सिर्फ इस अकेले की नहीं होगी. ऐसे बहुत से परिवार होंगे, जो ऐसी ही त्रासदी से जूझ रहे होंगे. यहाँ ‘टापू’ अपने नाम को पूर्णतया सार्थक कर रहा है.

    हमेशा की तरह बहुत सशक्त संस्मरण और भी सशक्त सन्देश से संसिक्त।

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  10. सशक्त सन्देश देता सुन्दर बिम्ब प्रधान गीत :

    मनके मनकों से होती है माला बड़ी
    तोड़ना मत कभी मोतियों की लड़ी

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  11. रोचक और सामयिक प्रस्तुति

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