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Monday, November 24, 2014

"शुभ प्रभात-समाजवादी बग्घी पे आ रहा है " (चर्चा मंच 1807)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिक।

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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अब तो ''समाजवादी'' 
बग्घी पे आ रहा है 

'लोहिया' तेरे मिशन को ये कौन खा रहा है
अब तो ''समाजवादी'' बग्घी पे आ रहा है 

चर्चा पान की दुकान पर 

girish pankaj 
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माँ पर चंद हाईकू | 

रिश्ता मधुर 
माता की ममता सा 
नहीं दूसरा.. 
Akanksha पर 
akanksha-asha.blog spot.com 
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'साडा चिड़ियाँ दा चम्बा वे 
क्यों देते है ,
पुत्रवती भव का आशीर्वाद , 
जब की एक ही माँ की 
कोख से पैदा होते है पुत्र और पुत्री , 
क्या किसी को पुत्री की कोई चाह नहीं... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
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कहानी 

पहले बताना तो था ...  

"शिल्पा, मैं आज खाना नहीं खाऊंगा! मैंने बाहर दोस्तों के साथ खाना खा लिया है।" प्रमोद ने घर में घुसते से ही कहा। सुनकर मेरा चेहरा एकदम उतर गया। मैं अपने-आप को रोक नहीं पाई और एकदम से बोल पड़ी।  "आपको पहले बताना तो था की आप खाना बाहर खाएंगे।" ... 
आपकी सहेली पर jyoti dehliwal 
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मुसव्विर भी नहीं समझे ! 
जियाले आतिशे-दिल से गुज़र कर भी नहीं समझे 
इरादों की बग़ावत से उबर कर भी नहीं समझे ! 
हवाएं दोस्त तो हरगिज़ किसी की भी नहीं होतीं रहे 
अनजान जो पत्ते बिखर कर भी नहीं समझे... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil
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मुझको अफ़सोस है रोता था तू मेरी खातिर 
… मुझको अफ़सोस है...... 
रोता था तू मेरी खातिर, 
मैंने लो छोड़ा जहाँ…..... 
आज बस तेरी खातिर... 
MaiN Our Meri Tanhayii पर 

Harash Mahajan 
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Ideology
As an ideology, racism existed during the 19th century as "scientific racism", which attempted to provide a racial classification of humanity.[18] Although such racist ideologies have been widely discredited after World War II and the Holocaust, racism and of racial discrimination have remained widespread all over the world. Some examples of this in present day are statistics including, but not limited to, the ratio of black men in prison to free black men vs. other races, physical abilities and mental ability statistics, and other data gathered by scientific groups. While these statistics are accurate, and can show trends, it's inappropriate in most countries to assume that because a particular race has a high crime or low literacy rate, that the entire race of people automatically are criminals or unintelligent...
Lori Ali
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आई गई आई नई आई-गई खुद झेल ले -  
हरिगीतिका छन्द  

माँ माँख के परिवार यूँ तू छोड़ जाती किसलिए । 

माँ माँद में मकु माँसशी के बाल मन कैसे जिये । 

माँता रहे दिन रात बापू भाँग-मदिरा ही पिए । 

मैं माँड़ माँठी खा रहा महिना हुआ माँखन छुए। 
माँखना = क्रुद्ध होना 
माँसशी = राक्षस
"कुछ कहना है"
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राम भरोसे 
राम भरोसे चल रहा, मेरा भारत देश 
इसे लुटेरे लूटते, धर साधू का वेश। 
धर साधू का वेश, सभी ने भरी तिजौरी 
ठग, भ्रष्ट और चोर, करें हैं सीनाज़ोरी । 
कहता सबसे ' विर्क ', कौन अब किसको कोसे 
भारत देश महान, चले है राम भरोसे । 
दिलबाग विर्क 
साहित्य सुरभि 
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"गीत-क़लम मचल जाया करती है" 


जब कोई श्यामल सी बदली
सपनों में छाया करती है! 
तब मेरे मन में शब्दों की
माला बन जाया करती है!! 
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दीन-दुखी की व्यथा देखकर
धनवानों की कथा देखकर
दर्पण दिखलाने को मेरी
क़लम मचल जाया करती है! 
माला बन जाया करती है... 

8 comments:

  1. सुप्रभात
    उम्दा संयोजन सूत्रों का
    बढ़िया संयोजन विषयों का
    मेरी रचना शामिल की
    धन्यवाद संयोजक जी को |

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  2. सुंदर सूत्र संयोजन सुंदर सोमवारीय अंक । आभारी है 'उलूक' दो दो सूत्रों को आज की चर्चा में जगह दी
    1. 'कुछ नहीं किया जा सकता है उस बेवकूफ के लिये जो आधी सदी गुजार कर भी कुछ नहीं सीख पाता है,
    और
    2. 'लिखता लिखता ही पढ़ना भी सीख लेगा '

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  3. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ....आभार

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  4. sundar charcha hai ! badhiya vichaar hain ! or aap ka ye puny karya hai ji !!

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  5. बेहतरीन चर्चा ..... मेरे कुछ शब्द को शामिल करने के लिए धन्यवाद ...!!!

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  6. ये केवल प्रशंसा के प्रशंसक हैं.....

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  7. बहुत बढ़िया चर्चा ,मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद

    ReplyDelete
  8. बेहतरीन प्रस्तुति

    ReplyDelete

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