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Wednesday, December 10, 2014

हक़ है झक मारौ फिरौ, बिना झिझक दिन रात-: चर्चा मंच 1823


मन भर सोना देह पे, सोना घोड़ा बेंच । 
राम राज्य आ ही गया, जी ले तू बिन पेंच ।1। 

हक़ है झक मारौ फिरौ, बिना झिझक दिन रात |
लानत भेजौ पुलिस पर, गर कुछ घटै बलात |2। 

सब मर्जों की दवा है, पुलिस फ़ौज सरकार । 

 सावधान खुद क्यों रहें,  इसकी क्या दरकार।3| 



कालीपद "प्रसाद" 




राजीव कुमार झा 




डा. मेराज अहमद 




कौशलेन्द्र 




Prabodh Kumar Govil 




alok chantia 



Kailash Sharma 
और कब तक ...Dr (Miss) Sharad Singh 
असली का युग अब गया, नकली का सम्मान।
छद्मवेश का आजकल, दुनिया में है मान।१।
--
महिला होता मैं अगरदेते सब उपहार।
खुश करने को सब मुझे, करते प्यार-अपार।२।...

9 comments:

  1. शुभ प्रभात
    उम्दा लिंक्स

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  2. पठनीय लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा।
    --
    आपका आभार रविकर जी।

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  3. बहुत सुंदर चर्चा आ. रविकर जी.
    'देहात' से मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.

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  4. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति!
    आभार!

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  5. सुन्दर प्रस्तुति!
    बधाई

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  6. सुन्दर प्रस्तुति!
    बधाई

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  7. हमेशा की तरह बहुत सुन्दर चर्चा।

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  8. Very Nice Post Collection
    Mere Blog par Aapka Swagat.............

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  9. सुंदर चर्चा । आभारी है 'उलूक' सूत्र 'किसी के दिल को कैसे टटोला जाता है कहीं भी तो नहीं बताया जाता है' को शामिल करने के लिये ।

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