साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Tuesday, April 21, 2015

दोहे-"होना पड़ता सभी को, कभी न कभी अनाथ"-चर्चा मंच 1952

सादर-नमन 
----रविकर 

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

Kailash Sharma 
vandana gupta 
जीवन और मैंप्रवीण पाण्डेय 
डॉ. कौशलेन्द्रम 

सु-मन (Suman Kapoor) 


Asha Saxena 


अनुपमा पाठक 


राजीव कुमार झा 


ब्लॉ.ललित शर्मा 


shashi purwar 


Shalini Kaushik 


सुशील कुमार जोशी 


डॉ. कौशलेन्द्रम 

4 comments:

  1. सुप्रभात
    पर्याप्त लिंक्स |उम्दा संकलन उनका |
    मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार रविकर जी |

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  2. आदरणीय रविकर जी एक लम्बे अन्तराल के बाद आपकी चर्चा देखने को मिली।
    बहुत अच्छा लगा।
    आपका बहुत-बहुत आभार।

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  3. आदरणीय रविकर जी चर्चा को बाद में और पहले आप की उपस्थिति से चर्चामंच खिल उठा । बहुत सुंदर प्रस्तुति है इसीलिये मैंने भी आपका स्वागत करने के बाद में कहा ।'उलूक' के सूत्र 'अपने घर की छोटी बातों में एक बड़ा देश नजर अंदाज हो रहा होता है' को जगह दी दिल से आभार ।

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  4. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति
    आभार!

    ReplyDelete

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"श्वेत कुहासा-बादल काले" (चर्चामंच 2851)

गीत   "श्वेत कुहासा-बादल काले"   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')    उच्चारण   बवाल जिन्दगी   ...