साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Monday, May 18, 2015

"आशा है तो जीवन है" {चर्चा अंक - 1979}

मित्रों।
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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जीवन और आशा 

 (१)
जीवन है तो गति है 
गति है तो घर्षण है 
घर्षण है तो संघर्ष है
संघर्ष है तो शुष्कता है 
शुष्कता है तो भंगुरता है 
कुछ चिर परिचित से 
नहीं लगते ये शब्द
अगर हाँ तो क्या 
ये जीवन है 
ये संबंध है 
ये रिश्ते हैं 
या ये रिसते हैं 
(२)
जीवन है तो गति है 
गति है तो घर्षण है 
घर्षण है तो ऊष्मा है 
ऊष्मा है तो उर्जा है 
उर्जा है तो 
उर्जावान पंचतत्व 
पंचतत्व है तो आरंभ है 
आरंभ है तो अंत है 
अंत है तो 
नए जीवन की आशा है 
आशा है तो जीवन है 
रचना रवीन्द्र
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गीत "कुटी बनायी नीम पर" 

पहले छाया बौर, निम्बौरी अब आयीं है नीम पर।
शाखाओं पर गुच्छे बनकर, अब छायीं हैं नीम पर।।
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देवदास के मैं तुम में निशाँ ढूँढ रही हूँ 

जाने क्या यहाँ-वहाँ ढूँढ रही हूँ 
शायद इक छोटा जहाँ ढूँढ रही हूँ 

ग़ुम हो आतिशे-नफ़रत में कहीं तुम 
आवाज़ दो मैं जाने-जहाँ ढूँढ रही हूँ... 
काव्य मंजूषा पर स्वप्न मञ्जूषा 
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तेरे क़दमों पे शमाओं को गिला है तुझसे 

ये खलल दिल में हुआ जो भी मिला है तुझसे |  
ये महफिलें तो हुईं सच में तुझी से रौशन, 
जब से आने का पता तेरा चला है तुझसे... 
Harash Mahajan 
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माँ का प्यार. ...|| 

कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा 
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मैं.. 

 तेरी आँखों का प्यारा सा.. अदना ख़्वाब सही, मैं.. 
तेरी नज़्मों का रूठा हुआ हिस्सा 
कोई, न गीत..न कहानी.. बस किस्सा कोई, मैं..  
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मधु शाला 5 दोहो मे-जी पी पारीक 

मधुशाला मे शोर है, गणिका गाये राग!! 
जाम भरा ले हाथ मे, पीने से अनुराग!!1!! 
चषक लिये है साकिया, इतराती है चाल!! 
सब पीकर है नाचते, ठुमकत दे दे ताल!!2... 
कविता मंच पर kuldeep thakur 
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देख दिल की नजर.... 

देख दिल की नजर इंसान दिखाई देगा 
गीत इलहाम का सब ओर सुनाई देगा... 
उन्नयन  पर udaya veer singh 
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बातों की बीमारी 

सहज साहित्य पर सहज साहित्य 
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प्रेम अपना 

परिचयी आकाश में, हर रोज तारे टूटते हैं, 
लोग थोड़ा साथ चलते और थकते, छूटते हैं, 
किन्तु फिर भी मन यही कहता, 
तुम्हारे साथ जीवन, प्रेम के चिरपाश में बँध, 
क्षितिज तक चलता रहेगा ।।१... 
न दैन्यं न पलायनम् पर प्रवीण पाण्डेय 
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दूरसंचार के जाल में समाज 

palash "पलाश" पर डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 
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