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Monday, June 01, 2015

"तंबाखू, दिवस नहीं द्दृढ संकल्प की जरुरत है" {चर्चा अंक- 1993}

मित्रों।
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

दोहे 

"जीवन है बदहाल" 


सूरज ने इस बार तो, कर ही दिया कमाल।
गरमी ज्यादा पड़ रही, जीवन है बदहाल।।
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सिर पर रख कर तौलिया, चेहरे पर रूमाल।
ढककर बाहर निकलिए, अपने-अपने गाल... 
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सच ऐसा भी 

मेरे शहर की झुकी हुई इमारते, 
यूँ ही नहीं गुमनामी में खो जाना चाहती हैं. 
खाक में मिल जाना चाहती हैं... 
रचना रवीन्द्र पर रचना दीक्षित 
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सैडिस्टिक प्लेज़र ... 

लड़ना, हारना, बदलना फिर लड़ना 
वो भी अपने आप से ... 
परास्त होते होते 
मजा आने लगता है 
अपनी हार पर, अपनी जुस्तजू पर ... 
कई बार जब संवेदना मर जाती है 
ये मजा शैतानी मजे में बदल जाता है 
पर फिर भी हारता तो खुद ही है इंसान ...
स्वप्न मेरे ... पर Digamber Naswa 
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वर्तमान 

रत विश्व सतत, मन चिन्तन पथ, 
जुड़कर खोना या पंथ पृथक, 
क्या निहित और क्या रहित, प्रश्न, 
आश्रय, आशय, आग्रह शत शत ।।१... 
न दैन्यं न पलायनम् पर प्रवीण पाण्डेय 
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मेरी पहली दोस्त 

जब हुआ मेरा सृजन, 
माँ की कोख से| 
मैं हो गया अचंभित, 
यह सोचकर|| 
कहाँ आ गया मैं, 
ये कौन लोग है मेरे इर्द-गिर्द| 
इसी परेशानी से, 
थक गया मैं रो-रोकर... 
सृजन मंच ऑनलाइन पर ऋषभ शुक्ला 
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दुल्हन 

कितनी ख़ुशी है इस पगली को 
प्रीतम का आगोश पाने की 
जिससे बंध जाएगी वो 
जमाने भर की बंदिशों से 
रीतिरिवाजों से... 
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 
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चन्द माहिया : 

क़िस्त 21 

:1: 
दिल हो जाता है गुम 
जब चल देती हो 
ज़ुल्फ़ें बिखरा कर तुम 
:2... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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जिन्हें मरना नहीं आता - 

मुझे टूटना नहीं आता ,व बिखरना नहीं आता 
शिकायत आँसूओं की है ,हमें रोना नहीं आता... 
उन्नयन  पर udaya veer singh 

हो रहे जो हादसे ये बात कुछ तो ज़रूर है 

आदमी जो आम है वो हर तरह बे-कसूर है | 
कर रहे बदनामियाँ बिन फिर अदालत फैसला, 
शख्स जिनपर हो सज़ा इस हादसे से दूर है... 
आपका ब्लॉग पर Harash Mahajan 
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जल बरसा 

आंसू आँखों के के लिए चित्र परिणाम
जल बरसा 
आँखों से छमछम 
रिसाव तेज |... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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ए पागल लड़की ................© 

परी ऍम. "श्लोक" 

एक दिन मैंने प्यार में गुम हुई 
किसी लड़की को नसीहत दी थी 
उसे कहा था 
ए पागल लड़की 
इश्क़ में यकीन का दामन न छोड़ 
ज़रा सी ढील से एहसास बिगड़ जाते हैं... 
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एक बार किसी रेलवे प्लैटफॉर्म पर जब गाड़ी रुकी तो एक लड़का पानी बेचता हुआ निकला।
ट्रेन में बैठे एक सेठ ने उसे आवाज दी,ऐ लड़के इधर आ। लड़का दौड़कर आया। उसने पानी का गिलास भरकर सेठ की ओर बढ़ाया तो सेठ ने पूछा, कितने पैसे में?
लड़के ने कहा - पच्चीस पैसे।... 
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"राम तुम बन जाओगे" (चर्चा अंक-2821)

मित्रों! सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...