चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Tuesday, September 29, 2015

"डिजिटल इंडिया की दीवानगी मुबारक" (चर्चा अंक-2113)

मित्रों।
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

डिजिटल इंडिया की दीवानगी मुबारक  

ज़िन्दगीनामा पर Sandip Naik 

ये क्या दुनिया बनाई है 

Madan Mohan Saxena
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बच्चे `भविष्य के कर्णधार है 

माता-पिता की आकांक्षा ने दशा ख़राब बना दी 
बचपन की मासूम हंसी अवसाद तले ही दबा दी 
सर्वश्रेष्ठ बनने की धुन में ख्वाब अनेकों मिटा दी 
नन्हें-मुन्हें हाथों में तो मोटी किताबें थमा दी... 
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वर्ल्ड रेबीज डे ... 

आज वर्ल्ड रेबीज डे है। क्या आप जानते हैं : * रेबीज एक १०० % फेटल रोग है। यानि यदि रेबीज हो गई तो मृत्यु निश्चित है। * लेकिन यह १०० % प्रिवेंटेबल भी है। यानि इससे पूर्णतया बचा जा सकता है। * इसका बचाव भी बहुत आसान है। अब पेट में १४ दर्दनाक ठीके नहीं लगाये जाते। * कुत्ते या बिल्ली आदि के काटने पर महज घाव को बहते पानी और साबुन से १० मिनट तक धोते रहिये। फिर कोई भी एंटीसेप्टिक लगा दीजिये। पट्टी बिलकुल मत बांधिए । * उसके बाद बस डॉक्टर की शरण में चले जाइये। आपका काम हो गया... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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मत समझना हम हुए लाचार से 

लौट जो आए तिरे दरबार से 
मत समझना हम हुए लाचार से
 हुस्ने मतला- नाव तो 
हम खे रहे पतवार से... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
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गीत "काले दाग़ बहुत गहरे हैं" 

रंग-रंगीली इस दुनिया में, झंझावात बहुत गहरे हैं।
कीचड़ वाले तालाबों में, खिलते हुए कमल पसरे हैं।।

पल-दो पल का होता यौवन,
नहीं पता कितना है जीवन,
जीवन की आपाधापी में, झंझावात बहुत उभरे हैं।
कीचड़ वाले तालाबों में, खिलते हुए कमल पसरे हैं... 
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किताबों की दुनिया -110 

नीरज पर नीरज गोस्वामी 
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कैसे भूल सकती हूँ … 

सुन बिटिया झुमकी , कुछ महीनों पहले तुझे सोचते हुए लिख डाला था । आज मैं पोस्ट कर रही हूँ । तू अपने स्कूल की धर्मशाला ट्रिप में खूब खूब मज़े करना। फोटोग्राफी, हाईकिंग, कैंपिंग , गपशप, कूदना, फाँदना सब कुछ पर अपना ख्याल रखना । पापा और मैं इंतज़ार कर रहे है । कैसे भूल सकती हूँ, उन दो पैरेलल लाल लकीरों को … 
Sunehra Ehsaas पर Nivedita Dinkar 
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काश छोड़ा न होता घर अपना 

दूर अपने घर से जाने कहाँ आ गया मै 
आँखे बिछाए बैठी होगी वह 
निहारती होगी रस्ता मेरा 
और मै पागल छोड़ आया 
उसे बीच राह पर... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
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मेरे दिल आज ये बता दे 

मंजिल है कहीं और तेरी पर रस्ता ये कोई और है, 
मेरे दिल आज ये बता दे, तू जाता ये किस ओर है । 
बेपरवाह गलियों में भटक रहा, क्या तेरे सनम का ठौर है, 
मेरे दिल आज ये बता दे, तू जाता ये किस ओर है ... 
ई. प्रदीप कुमार साहनी 
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उड़न तश्तरी 

Fulbagiya पर डा0 हेमंत कुमार 
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उसका बदन छूकर 

उसका बदन छूकर कोई बयार आएगा 
फिर खामोश आॅखों में प्यार आएगा... 
Sanjay kumar maurya 
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