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Sunday, November 01, 2015

"ज़िन्दगी दुश्वार लेकिन प्यार कर" (चर्चा अंक-2147)

मित्रों।
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के अद्यतन लिंक।
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“महकता घर-बार ढूँढता हूँ” 


परिवार ढूँढता हूँ और प्यार ढूँढता हूँ।
मैं बुलबुलों का प्यारा संसार ढूँढता हूँ।।
कल नींद में जो देखा, मैंने हसीन सपना,
जीवन में वो महकता घर-बार ढूँढता हूँ... 
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शे’र कहता शेर सा हुंकार कर 

आज तू तीरे नज़र का वार कर 
नीमकश बिल्कुल न, दिल के पार कर 
रस्मे उल्फ़त तो निभा जालिम ज़रा 
कुछ सितम दिल पर मेरे दिलदार कर... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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एक डॉक्टर का करवा चौथ : 

कल चौथ का चाँद था और पार्क में,
खूबसूरती का हुजूम था लगा हुआ ।
कंगन , चूड़ा , पायल , झुमके , हार ,
नई साड़ियों का रंग था बिखरा हुआ।
जिंदगी में ३६४ दिन थे सास के पर ,
कल बहुओं का रूप था निखरा हुआ... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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मेहमान 

...बीमार सोए हैं पिछली सीटों पर 
अस्पताल के इंतज़ार में, 
आख़िरी सांसें चल रही हैं कइयों की, 
कई मांओं ने जन दिए हैं 
ऑटो में ही अपने बच्चे. 
लगता है, कोई विशिष्ट मेहमान 
आज शहर में आया है.... 
कविताएँ पर Onkar 
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तेरा जो साथ है~!!! 

♥कुछ शब्‍द♥ पर Nibha choudhary 
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तलवार 

एक ही धर्म होता है इसका 
उतार देता है गर्दन धड़ से 
या पेट से खींच लेता है अंतड़ियां बाहर 
बिना किसी भेदभाव के ... 
सरोकार पर Arun Roy 
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:करवा चौथ जैसे भेद -भाव मूलक उपवास 

स्त्री को दंड से अधिक कुछ नहीं हैं ---  

विजय राजबली माथुर 

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कहाँ खोजूँ तुम्हें ... 

तुम्हें सोचा तो सोचा, 
देखूं एक बार तुम्हें। 
लेकिन जाने कहाँ 
छुप गए हो तुम तो कहीं ! 
फिर देखूं तो कहाँ देखूं , 
कहाँ खोजूँ तुम्हें... 
नयी उड़ान + पर Upasna Siag 
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तीसरी सालगिरह : 

ज़ुल्म का दायरा 

कौन-सा ग़म पिएं बता दीजे 
और कब तक हमें दग़ा दीजे 
आपके पास तो किताबें हैं 
आप मुजरिम हमें बना दीजे... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil 
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मुश्किलों को हौसलों से पार कर
ज़िन्दगी दुश्वार लेकिन प्यार कर


सामने होती मसाइल इक नयी
बैठ मत जा गर्दिशों से हार कर


बात दिल में जो दबी कह दे उसे
इश्क़ है उनसे अगर इज़हार कर... 
शीराज़ा [Shiraza]
शीराज़ा [Shiraza]परहिमकर श्याम 
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आत्मसंवाद... ?!!  
 सही गलत अच्छा बुरा सत्य असत्य 
उचित अनुचित ये निर्णय ही दुष्कर है... 
और शायद ऐसा कोई तर्क-वितर्क... 
ऐसा कोई निर्णय अनिवार्य भी नहीं... 
कि... 
अनुशील 
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गीत लिखूं ग़ज़ल लिखूं कविता लिखूं 
तू  बता तेरी क़िस अदा पे क्या लिखूं। 

तेरी वफ़ाओं का मैं  क़ायल हूँ इतना 
जी नहीं चाहता तुझे मैं बेवफ़ा लिखूं... 

कुछ बातें उनकी
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देश व उनके राष्ट्रीय खेल 
अफगानिस्तान : बुज़काशी
एंटीगुआ और बारबुडा : क्रिकेट
अर्जेटिना : पाटो
बांग्लादेश : कबड्डी
बारबाडोस : क्रिकेट
बरमुडा : क्रिकेट
भूटान : तीरअंदाज़ी
ब्राज़ील : कैपोईरा
बुल्गारिया : भारोतोलन
कनाडा : आईस हॉकी
चिली : चिली रोडियो
चीन : टेबल टेनिस
क्यूबा : बेसबॉल
हंगरी : वाटर पोलो
ईरान : कुश्ती
भारत : हॉकी
जमैका : क्रिकेट
मैक्सिको : चैरेरिया
जापान : सूमो कुश्ती
न्यूज़ीलैंड : रग्बी यूनियन
नॉर्वे : क्रास कंट्री स्काईंग
रूस : सैंबो
दक्षिण कोरिया : ताईकावांडो
श्रीलंका : वोलीबोल
स्पेन : बुलफाइट
संयुक्त राज्य अमेरिका : बेसबाल 

GKonlineTest.in 
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