चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Monday, December 21, 2015

पीएम मोदी के विदेशी दौरों से कैसे भर रहा है देश का खजाना--चर्चा अंक 2197।

जय माँ हाटेश्वरी...
एक दिन चाणक्य के घर कोई ज्योतिषी आए। चाणक्य कहीं बाहर गए हुए थे। मां ने जिज्ञासावश ज्योतिषी को अपने पुत्र की जन्मपत्री दिखाई और उसके भविष्य के बारे में
पूछा। ज्योतिषी ने जन्मपत्री देखकर कहा, 'मां, तेरे पुत्र के ग्रह बड़े ही प्रबल हैं। वह जरूर चक्रवर्ती सम्राट बनेगा। यदि मेरी बात का विश्वास नहीं हो तो देख
लेना, उसके सामने के दांत पर नागराज का निशान है।' ज्योतिषी की यह भविष्यवाणी सुनकर मां अवाक् रह गई।
वह अपने बेटे को बेहद प्यार करती थी और उसे हर घड़ी अपने पास देखना चाहती थी। किंतु चक्रवर्ती सम्राट बनने पर तो वह उससे बिछुड़ जाएगा। राजकाज में इतना लीन
हो जाएगा कि उसे मेरा ध्यान ही नहीं रहेगा। ज्योतिषी चला गया, पर मां सोच में पड़ गई। चाणक्य जब लौटे तो मां को उदास पाया। कारण पूछने पर मां ने ज्योतिषी से
सुनी सारी बात बता दी। फिर अवरुद्ध कंठ से बोली, 'मैं जानती हूं तू चक्रवर्ती सम्राट बनकर मुझे भूल जाएगा।'
चाणक्य मां की चिंता से विचलित हो गए। बोले, 'मां, ऐसा नहीं होगा। पर तुम कैसे कह सकती हो कि मैं चक्रवर्ती सम्राट बनूंगा?' मां ने कहा, 'देख तेरे सामने के
दांत पर नाग का चिह्न है।' चाणक्य ने आईने में देखा तो मां की बात सही निकली। इसके बाद उन्होंने एकांत में जाकर पत्थर से दांत तोड़ लिया, मां के सामने उसे रखते
हुए बोले, 'यह लो मां, तुम्हारे सामने मेरे लिए चक्रवर्ती सम्राट के पद का कोई मूल्य नहीं है।'
यह देख मां की आंखों में आंसू आ गए। वह बोली, 'मां तो अपनी ममता में हर प्रिय वस्तु न्यौछावर करती है, पर तुमने अपनी मां के लिए एक क्षण की भी देर किए बिना
इतनी बड़ी चीज कुर्बान कर दी। तुम्हें जन्म देकर मैं धन्य हो गई पुत्र।
--
अब चलते हैं आज की चर्चा की ओर...
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 डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’
07/20july3
आदत हो गई है
लातों के भूतों को
खाते हैं यदा-कदा
जनता के जूतों को
न कोई धर्म है
न ही ईमान है
मुफ्त में करते
नही अहसान हैं
हर रात को बदलते
नये मेहमान है
--
प्रवीण पाण्डेय
आनन्दित मन भरे कुलाँछे,
तेरी लीलायें अति प्यारी ।
बिन तेरे सब शान्त शुष्क है,
गोविन्दा, हे गोकुलचारी ।।५।।
हे शब्दों के उद्भवकर्ता,
तुम्हें समर्पित कृतियाँ सारी ।
छंदों के इस तुच्छ भोग को,
स्वीकारो हे रास बिहारी ।।
--
कलम से ....
पत्रकारों के लिए जुगाड़ रोटी का है सडक
किसी की जिन्दगी किसी की बन्दगी की ..
किसी की दरिंदगी की अजब गवाह होती है सडक
हर किस्से को गा गाकर सुनाती है सडक
न्याय को ठेंगा दिखाते कानून की दुकान होती है सडक
कैसी  कैसी हैं  सडक ..कहीं गवाह जन्म की कही मौत की नींद सुलाती हैं सडक "----विजयलक्ष्मी
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तुषार रस्तोगी
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हा हा-ही ही-हू हू करते, बस बीती सारी शामयारों, दारु, चिकन, मटन और सुट्टों के नाम 
मज़ा आ गया कसम ख़ुदा की, २० बरस के बाद
दारुबाजों की रीयूनियन, रहेगी जीवन भर याद
--

Brijesh Neeraj 

होती है जब हवाओं में जुंबिश
लगता है तू आस-पास होगा
रात की तन्हाइयाँ डराती नहीं
किसी सुबह तू मेरे साथ होगा
--
Brijesh Neeraj 
मन्दिर मस्जिद आरती अजानें
सब कुछ है, आस्था नहीं है
टूटे मिथक सभी जिंदगी के
साँसें हैं लालसा नहीं है
--
Neeraj Kumar Neer
 उसे बलात्कारी बनाइये ,
खूंखार बलात्कारी ...........
स्त्री के योनि में सरिया घुसा कर
फाड़ देने वाला बलात्कारी ..............
स्तनों को काट लेने वाला बलात्कारी ........
बलात्कार की घटना के बाद..............
हजारों की संख्या में दीये और कैंडल जले ,
ऐसा बलात्कारी 
--
Vivek Surange
दुनिया की बड़ी एजेंसियां और निवेशक प्रधानमंत्री मोदी के एक-एक दौरे को परख रहे हैं। निवेशकों का मानना है कि प्रधानमंत्री को अपने देश की जरूरतें पता हैं और
वो उन्हीं जरूरतों के मुताबिक अपनी सरकार की नीतियां बना रहे हैं। नवंबर के दूसरे हफ्ते में ही सरकार ने 15 नए क्षेत्रों में एफडीआई के नियमों में बदलाव किया
है। पीएम खुद कहते हैं कि उनके लिए एफडीआई का मतलब है- फर्स्ट डवलप इंडिया। इसी नारे और इरादे का असर है कि साल 2016 से 2020 के बीच भारत की विकास दर सालाना
7.3 फीसदी रहने की उम्मीद है। जबकि 2016 से 2020 के बीच पूरे एशिया की विकास दर 6.2 फीसदी सालाना रहने की उम्मीद है। बढ़ती हुई विकास दर, बढ़ता हुआ निवेश पीएम
के विदेश दौरों की अलग गवाही दे रहा है। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि सितंबर के महीने तक पीएम की विदेश यात्राओं का खर्च था सिर्फ 41 करोड़ रुपए। जाहिर है
ये 41 करोड़ देश में आने वाले निवेश के आंकड़ों के सामने कहीं नहीं टिकते।
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कमला सिंह 'ज़ीनत
डर लगता है सच्चाई का लोग तमाशा कर देंगे
काग़ज़ पे पानी को लिखकर अपनी प्यास बुझाते हैं
करवट करवट चादर चादर सलवट सलवट रातों को
चाह भी लें तो देर तलक हम खुदको कहाँ सुलाते हैं
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Jyoti Dehliwal
आज हम कहते है, लोग बदले की भावना के वशिभूत होकर इंसानियत की सभी हदे पार कर देते है। तो फिर जब भीम ने दु:शासन की छाती से लहू निकालकर द्रौपदी के केश धोए
थे तब भीम की इंसानियत कहा गई थी? आज भी जब टी. व्ही. धारावाहिक में ही उस दृश्य को देखते है तो आत्मा कांप उठती है
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 राजीव उपाध्याय
पर शायद तुमको 
कहीं ना कहीं पता था 
कि तुमने अपनी चाहत की खुश्बू 
मुझमें डाल दी 
वैसे ही जैसे जीवन डाला था कभी 
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डॉ टी एस दराल
माना कि आज की युवा पीढ़ी के लोग हमें रूढ़िवादी समझते हैं ,
लेकिन जिन्हे जीवन का अनुभव है वो बात यथार्थवादी करते हैं।   
पथभ्रष्ट मत हो जाना पश्चिमी सभ्यता की नकल करते करते ,

rashmi savita
यह सब देखकर 
मेरा हँसता हुआ चेहरा 
फ़क पड़ गया, 
और गाता  हुआ गला 
 भर आया। 
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Reetesh Gupta
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अब फ़र्क़ नहीं पड़ता - - 

अग्निशिखा : पर Shantanu Sanyal 
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'ब्याहता' और 'दहेज़' 

*'ब्याहता'* मेरे लिए, फूल फूल नहीं है, 
एक सपनीली लड़की की निर्भार हँसी है, 
और... इसी तरह जलता हुआ चूल्हा, 
उठता हुआ धुँआ, केवल धुआँ नहीं है, 
एक ब्याहता लड़की के, सपनों का अलाव 
और जिंदगी का हश्र है... 
मीमांषा- पर rashmi savita 
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सांता अंकल अब आ भी जाओ 

बाल कविता लिखना थोड़ा कठिन कार्य है दिसम्बर २०१३ में एक छोटा सा प्रयास किया था मैंने बाल कविता लिखने का कितनी सफल हुयी हूँ ये तो आप सभी आदरणीय मित्रो एवं गुरुजनो की समालोचना ही बताएगी। यहाँ में आपके साथ इस कविता का विडिओ जो मैंने मेरे पुत्र सिद्धार्थ अग्रवाल की मदद से बनाया है साझा कर रही हूँ... 
sunita agarwal 
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ऑटोग्राफ प्लीज़ --- 

कल एक कवि सम्मेलन में हमने, 
कविता जैसा कुछ सुनाया , 
श्रोताओं का तो पता नहीं भैया, 
पर अपुन को बड़ा मज़ा आया... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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मुझे याद है जब इस सफ़र पर चलना किया हमने शुरू
हम ही थे चेले यहाँ और हम ही थे अपने गुरु
हराकर हर ताप को कुंदन से हम हरदम खिले
खुशियाँ मिलीं शोहरत मिली और कई नये मकसद मिले
 धन्यवाद।

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