चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Friday, January 01, 2016

"मंगलमय नववर्ष"(चर्चा अंक-2208)

नववर्ष  के शुभ अवसर पर चर्चा मंच पर आपका हार्दिक स्वागत है। ब्लॉग जगत के सभी साथियों को चर्चा मंच परिवार की तरफ से नव वर्ष की हार्दिक मंगलकामनायें।  
   नव वर्ष मंगलमय रहे, नव हर्ष मंगलमय रहे 
नव शक्ति, नव संकल्प का उत्कर्ष मंगलमय रहे |

नव पुष्प, नव पल्लव हरे, नव स्वप्न नयनों में भरे 
नव सृष्टि, नव संसृष्टि का आकर्ष मंगलमय रहे |

हर मार्ग में काँटा बिछा, पर धूप-छाया हर दिशा, 
जीवन के हर पग पे सदा संघर्ष मंगलमय रहे |

उद्भावना हो नेह की, संभावना हो ज्योति की 
जल-दीप-सा तिरकर बुझा अपकर्ष मंगलमय रहे |

नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ चलते हैं वर्ष 2016 की प्रथम चर्चा की ओर। 

शालिनी कौशिक

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अमरावती सी अर्णवनेमी पुलकित करती है मन मन को ,
अरुणाभ रवि उदित हुए हैं खड़े सभी हैं हम वंदन को .

अलबेली ये शीत लहर है संग तुहिन को लेकर आये ,
घिर घिर कर अर्नोद छा रहे कंपित करने सबके तन को
गीत "नये साल का सूरज"
 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मैं नये साल का सूरज हूँ,
हरने आया हूँ अँधियारा।
मैं स्वर्णरश्मियों से अपनी,
लेकर आऊँगा उजियारा।।
जयंती प्रसाद  शर्मा 
My Photo
बंधुवर लीजिये नव वर्ष की-
शुभकामनायें।
भूलकर विगत दुश्वारियाँ,
राजेन्द्र कुमार 
आप सबको नया साल 2016 की हार्दिक शुभकामनायें । नूतन बर्ष आपके एवं आपके परिवार के लिए हर्षोल्लास,अच्छा स्वास्थ्य,सम्पन्नता ,सुरक्षा, नव ज्योत्स्ना,नव उल्लास और समृधि लेकर आए ।
कुलदीप ठाकुर 
मेरा फोटो
कहता है कलैंडर
आगे बढ़ो
रुको नहीं,
पर भागो नहीं,
अपनी गति में चलो।
अरुण साथी  
जो बीत गयी उन बातों को,
अपनों से मिले कुछ घातों को, 
बिन मौसम की बरसातों को,
कुतर्क भरी कुछ बातों को..।
चलो, अलविदा कहते हैं..!
नवेदिता दिनकर 
बस्ते से निकाल
 अपनी कॉपी ... 
लिखने लगी वह
 ए बी सी डी ...
सुषमा वर्मा 
जो तुम भी कह ना पाये,
वो मेरी हथेलियों पर रची,
मेहंदी ने कह दिया है...
पिया तुमसे बहुत प्यार करते है.
मेहंदी का रंग देख कर,
मेरी सहेलियों ने मुझसे कह दिया है..
आनन्द वर्धन ओझा
उस रात की परा-वार्ता के बाद शर्माजी तो अलभ्य हो गए! मैं चिंता में पड़ा रहा कि आख़िर हुआ क्या! आत्मा से मिली सूचनाएँ सत्य सिद्ध हुईं या....? पंद्रह दिनों की प्रतीक्षा के बाद मैंने फ़ोन किया तो किसी ने फ़ोन उठाया नहीं। प्रतीक्षा और व्यग्रता बढ़ती गई।
प्रसन्नवदन चतुर्वेदी
गीत, ग़ज़ल, कविता की दुनिया
सभी ब्लॉगर मित्रों को नववर्ष 2016 की शुभकामनाएं...

यादों की महफ़िल सजाए बैठा हूँ |
अपनी हर मुश्किल भुलाए बैठा हूँ |

यादें उनकी आती हैं वे आते नहीं,
जिनसे अपना दिल लगाए बैठा हूँ |
अनुपमा पाठक 
मेरा फोटो
गिन रहे थे हम
लम्हे...
गिनते-गिनते
कितने ही क्षण छिटक गए...
साधना वैद
ईंट गारे चूने से बना यह भवन
केवल एक मकान नहीं है
यह तो युग-युग से साधक रहा है
हर रोज़ परवान चढ़तीं
हमारी बेलगाम ख्वाहिशों का,
 नवीन कुमार 'नीरज'
याद है तुम्हें? 
हर रोज हम उस सड़क पर घूमने जाया करते थे? 
वही सड़क जो बहुत दूर तक जाती थी। 
हमने सुना था, बहुत दूर वह किसी दूसरे देश तक जाती थी। 
वह सड़क बागों के बीच से होकर गुज़रती थी। 
शायद इस दुनिया में कोई और सड़क बागों के बीच से होकर नहीं गुज़रती ---

हितेश कुमार शर्मा
लो यू ही एक और साल हो गया व्यतीत 
और बढ़ चला है आप अपना अतीत 

हर साल इक नया साल आता ही रहेगा 
इच्छाओं का दीपक हर दिल मे जलता ही रहेगा
प्रवीण चौपड़ा 
मुझे याद है बचपन में मुझे लगता था कि त्योहारों के नाम पर जो शोर शराबा होता है वह ३१ दिसंबर की रात को बंबई में ही होता है...लेकिन फिर धीरे धीरे जैसे जैसे समय बदलता गया...यह शोर शराबा..यह शोशेबाजी, दिखावा, फिज़ूल की नौटंकियां, रस्मी तौर पर शुभकामनाएं देने का सिलसिला, तोहफ़ों का आदान प्रदान....रोड-रेज....
रविकर जी 
सोलह आना सत्य है, है अशांति चहुँओर |
छली-बली से त्रस्त हैं, साधु-सुजन कमजोर | 
साधु-सुजन कमजोर, आइये होंय इकठ्ठा |
उनकी जड़ में आज, डाल दें खट्टा-मठ्ठा |
रमाजय शर्मा 
पल पल कर साल गुजर जाते हैं
हम हर साल नये साल का स्वागत करते हैं
पुराने साल की गलतियों को भूल
नये साल में फिर वो ही दोहराते हैं
फिर वो ही दुख दर्द से गुजरते हैं
My Photo
आमचंद्र कह गए सभी से , जब साल सोलवां आएगा ,
पत्नी करेगी कार ड्राईव और , पति खड़ा रह जायेगा।

एक बात नहीं हैं समझे, ग़र पत्नी संग कार में बैठे , 
पति के संग से कैसे हवा में, प्रदुषण बढ़ जायेगा ।

छूटे सारे वी आई पी , ग़र नहीं तू वी ओ पी भी ,
ईवन ऑड के चक्कर से भैया , फिर नहीं बच पायेगा
डॉ. ज़ाकिर अली रजनीश
Jagpati Chaturvedi Bal Vigyan Lekhan Samman - Uttar Pradesh Hindi Sansthan, Lucknow
उपलब्धियां किसी के भी लिए गर्व का विषय होती हैं, लेकिन ये हमें आत्मावलोकन का भी अवसर उपलब्ध कराती हैं। ये हमें बताती हैं कि हमें थोड़ा रूक कर अपने भीतर झांकने की भी आवश्यकता है। और मैं खेद के साथ कहना चाहता हूं कि जब मैं थोड़ा ठहर कर वर्तमान में लिखे जा रहे बालसाहित्य का अवलोकन करता हूं, तो मुझे बहुत प्रसन्नता नहीं होती।
कविता रावत 



आप और आपके परिवार जनों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये । 
नववर्ष सबके लिए सुख-संमृद्धि एवं वैभवपूर्ण हो, और आशा करता हूँ कि 
नववर्ष आप सभी के लिए मंगलमय एवं लक्ष्य प्राप्ति से भरपूर हो साथ ही 
नववर्ष में आशानुरूप सफलता की प्राप्ति लिए कामना करता हूँ। 
धन्यवाद ,

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