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Wednesday, February 03, 2016

कह रविकर कविराय, पचे सुख भोजन पैसा: चर्चा मंच 2241



रविकर 

पैसा भोजन सुख पचे, सही रहेंगे आप |
अहंकार चर्बी बढ़े, बढ़े अन्यथा पाप |  

बढ़े अन्यथा पाप, भूख तोड़े मर्यादा |
मानवता विसराय, बढ़े गर पैसा ज्यादा |

अचना पचना ठीक, बना लो जीवन ऐसा |
कह रविकर कविराय, पचे सुख भोजन पैसा ||
Sushma Verma 


S.K. Jha 


Neeraj Kumar Neer 


ब्लॉ.ललित शर्मा 


rohitash kumar 


yashoda Agrawal 


Vivek 


चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 

kavita verma 
Virendra Kumar Sharma 

नादिर खान 

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