चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

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Tuesday, March 29, 2016

"सूरज तो सबकी छत पर है" (चर्चा अंक - 2296)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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सूरज तो सबकी छत पर है 

चाहो तुम  घर अंधेरा रखो
सूरज तो सबकी छत पर है-
तुम चाहो तो नीर विहीन रहो
कब सून्य धरा जल निर्झर है... 
udaya veer singh 
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आदिम सभ्यताओं से गुजरते हुये! 

अंजुमन पर  डा. गायत्री गुप्ता 'गुंजन'  
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वोट बैंक 

मर गया? मर जाने दो, 
सके दर से वोट बैंक का रास्ता नहीं गुजरता, 
सियासत गर्म होने दो, आम आदमी उबलने दो, 
कि सियासत मरने वाले का वर्ग देखती है,.. 
daideeptya पर Anil kumar Singh  
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अस्पताल के उस कमरे 

एक छुअन की याद *योगेंद्र आहूजा * पिछले कुछ बरसों में कर्इ बार ऐसा हुआ कि वीरेन जी को मिलने देखने अलग अलग अस्पतालों मेें जाना पड़ा, शीशों के पीछे दूर से ही देखकर वापस आना पड़ा । एक अस्पताल में उनके साथ, उनके बेड के करीब काउच पर दो रातें भी बितार्इं । फिर भी मुझे कभी यकीन नहीं हुआ कि वह शख्स किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है या हो सकता है... 
लिखो यहां वहां पर विजय गौड़ 
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तेरा जीवन 

तूने अपना जीवन यदि, 
शब्दों में डाला, निष्फल है । 
जीवन तो तेरा वह होगा, 
जो शब्दों की उत्पत्ति बने... 
प्रवीण पाण्डेय 
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Tut Ankh Amun Official FULL MOVIE Censor Copy 

(By Yash Tiwari) 

आज से लगभग साल भर पहले मेरे बेटे यश ने सत्ताइस मिनिट की एक शार्ट मूवी ' TUTANKHAMUN,' बनाई थी , किसी की मदद लिए बगैर . .इसका टीज़र और ट्रेलर मैं पहले ही यहां दिखा चुकी हूँ , इसमें कुछ कमियां भी नज़र आएंगीं , आवाज़ शुरुआत के कुछ दृश्यों में अस्पष्ट और धीमी है , जो बाद में ठीक हो जाएगी। मैं चाहती हूँ की तेरह वर्ष की उम्र के बच्चे की इस कोशिश को आप ज़रूर देखें। ... 
प्रियदर्शिनी तिवारी  
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खामोश 

वो तो सुनता है मगर ,खामोश रह जाता है  
इम्तेहान -ऐ -ज़ीस्त में कब होश रह जाता है ?  
कोई हुजूम आया नहीं ,अब कर रहे क्यों गिला 
अाप खुद से न मिले,क्या दोष रह जाता है ? 
किस तरह से ज़मीं ठण्ड से बातें करे 
और गवाह में किस तरह बस ओस रह जाता है... 
कविता-एक कोशिश पर नीलांश 
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किताबों की दुनिया -121 

नीरज पर नीरज गोस्वामी 
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बावरे फकीरा को सात साल पूरे हुए 

गिरीश बिल्लोरे मुकुल 
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आज खालीपन मेरा पूरा भरा है ॥ 
अब कहीं पीला नहीं है बस हरा है ॥ 
जिसपे मैं क़ुर्बान था आग़ाज़ से ही ,  
वह भी आखिरकार मुझ पर आ मरा है ... 
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ये दुनिया  

(ग़ज़ल) 

हर रोज़ सबक सिखाती है ये दुनिया  
सताए हुए को और सताती है ये दुनिया... 
कविता मंच पर Hitesh Sharma 
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धोनी ,विराट {दोहावली } 

भारत की इस टीम केे,क्या कहने क्या ठाट। 
सचिन विरासत दे गए,धोनी और विराट... 
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया  

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