चर्चा मंच पर सप्ताह में तीन दिन (रविवार,मंगलवार और बृहस्पतिवार)

को ही चर्चा होगी।

रविवार के चर्चाकार डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक,

मंगलवार के चर्चाकार

श्री दिनेश चन्द्र गुप्ता रविकर

और बृहस्पतिवार के चर्चाकार श्री दिलबाग विर्क होंगे।

समर्थक

Sunday, May 07, 2017

"आहत मन" (चर्चा अंक-2628)

मित्रों 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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Yashwant Yash 
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Sudhinama पर sadhana vaid 
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बिकाऊ

वह जो बाज़ार में नहीं है, 
यह मत समझना कि बिकाऊ नहीं है. 
ग़लतफ़हमी में है वह... 
कविताएँ पर Onkar 
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अफसाना मौत का 

जिया जाता नहीं मरा जाता नहीं, 
अफसाना मौत का कहा जाता नहीं... 
Jayanti Prasad Sharma 
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यों ही काटते रहें..... 

रोहित कौशिक 

आओ हम यों ही मरते-कटते रहें 
और फूलने दें संतों की तोंद 
बढ़ने दे चोटी और तिलक की लंबाई 
फलने दें मौलवियों की दाढ़ी। 
कि जब तक सम्पूर्ण मानवता का रक्त 
संतों की तोंद में न समा जाए... 
मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  
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'फते' और 'फलास' 


शब्दों का सफर पर अजित वडनेरकर 
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समय गवाह है पर 


उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी  
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ग़ज़ल 

आज़ाद हैं यहाँ सभी’ उल्फत ही’ क्यूँ न हो 
पावंदी’ भी को’ई नहीं’ तुहमत ही’ क्यूँ न हो... 
कालीपद "प्रसाद" 
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सभी को चाहिए - - 

सभी को चाहिए 
कहीं न कहीं कुछ पल 
सुकून भरा... 
Shantanu Sanyal 
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