साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Sunday, May 14, 2017

"लजाती भोर" (चर्चा अंक-2631)

मित्रों 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

क्या कहिये 

जो दिख रहा वो सच नही 
फिर अनदिखे को क्या कहिये 
हस रहे जख्म महफिलो में 
गुमसुम खुशी को क्या कहिये... 
डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 
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बिल्ली 

Akanksha पर Asha Saxena 
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मुझको ग़ैरों के लिए छोड़ के जाने वाले 

आह आए ही नहीं जी को जलाने वाले 
औ तमाशा भी सभी देखने आने वाले... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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हमारी माटी 

(गाँव पर 20 हाइकु) 

1.  
किरणें आई  
खेतों को यूँ जगाए  
जैसे हो माई।  
2.  
सूरज जागा  
पेड़ पौधे मुस्काए  
खिलखिलाए।... 

लम्हों का सफ़र पर डॉ. जेन्नी शबनम 
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एक व्यंग्य गीत :  

मैं तेरे ब्लाग पे आऊँ 

मैं तेरे ’ब्लाग’ पे जाऊँ ,तू मेरे ’ब्लाग’ पे आ  
मैं तेरी पीठ खुजाऊँ , तू मेरी पीठ खुजा... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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व्यंग्य की जुगलबंदी -  

'कड़ी निंदा ' 

वे बन्दूक की गोली के सामान फुल स्पीड में आए | गुस्से से लबालब भरे हुए | मिसाइल की तरह मारक | तोप की तरह गरजने को तैयार | बम की तरह फटने को बेकरार | ''जब देखो तब कड़ी निंदा, भर्त्सना, विरोध | सुन - सुन कर कान पक गए हैं'' ... 
कुमाउँनी चेली पर शेफाली पाण्डे 
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..... गुम होता बचपन :) 

कविता मंच पर संजय भास्‍कर 
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बोल 

किस बात का डर है तुझे, 
जो तेरे पास है, 
उसे खोने का या उसे, 
जो तेरा हो सकता है? 
बोल, क्यों चुप है तू... 
कविताएँ पर Onkar 
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एक ग़ज़ल : 

हौसला है दो हथेली है---- 

हौसला है ,दो हथेली है , हुनर है 
किस लिए ख़ैरात पे तेरी नज़र है ... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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तड़पन... 

डॉ. सुषमा गुप्ता 

हवा बजाए साँकल .. 
या खड़खड़ाए पत्ते.. 
उसे यूँ ही आदत है बस चौंक जाने की। 
कातर आँखों से .. 
सूनी पड़ी राहों पे .. 
उसे यूँ ही आदत है टकटकी लगाने की... 
मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal 

नींद , सपने और ख्वाब 

नींद भी अजब होती है ..ज़िन्दगी 
और सपनो सी यह भी आँख मिचोली खेलती रहती है .. 
इसी नींद के कुछ रंग यूँ उतरे हैं इस कलम से ...  
नहीं खरीद पाती बीतती रातों से  
अब कोई ख्वाब यह आँखे उफ़ !!!  
यह नींद भी अब कितनी महंगी है ... 
ranjana bhatia 
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सूखे गुलाब  

ग़ज़ल 

डा श्याम गुप्त 

इन शुष्क पुष्पों में आज भी जाने कितने रंग हैं | 
तेरी खुशबू, ख्यालो-ख्वाब किताबों में बंद हैं... 
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कभी तुझसे कोई... 

कभी तुझसे कोई शिकायत नहीं की 
बिना मिले ही तुझसे सारी बातें की... 
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आप्पो दीपो भव 

मैं नहीं हूँ बुद्ध हो भी नहीं सकता मैं
ने छोड़ा कहाँ यह जग 
विराट मन अभी घूम आता है 
कई घाट.... 
Mera avyakta पर  
राम किशोर उपाध्याय 
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शिनाक्त 

सामने तेरे इक आईना होगा , 
दर को तूने जो बंद किया होगा 
तेरी पलकों पे जो कहानी है  
देख कर कोई सो गया होगा  
"नील " लिखूँ तो फिर शिनाक्त सही , 
न लिखूँ अगर तो क्या होगा 
कविता-एक कोशिश पर नीलांश 
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शोषण,शोषक और शोषित 

शोषण,शोषक और शोषित 
पूरक हैं आदि काल से 
और रहेंगे अनादि काल तक 
जब तक रहेगा यह जीवन... 
जो मेरा मन कहे पर Yashwant Yash 
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गीत 

"अमलतास खिलता-मुस्काता"  

सूरज की भीषण गर्मी से,
लोगो को राहत पहँचाता।।
लू के गरम थपेड़े खाकर,
अमलतास खिलता-मुस्काता।।

डाली-डाली पर हैं पहने
झूमर से सोने के गहने,
पीले फूलों के गजरों का,
रूप सभी के मन को भाता।
लू के गरम थपेड़े खाकर,
अमलतास खिलता-मुस्काता... 
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मित्रों...!
गर्मी अपने पूरे यौवन पर है।
ऐसे में मेरी यह बालरचना 
आपको जरूर सुकून देगी!

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--
 

12 comments:

  1. शुभ प्रभात.....
    मातृ-दिवस की शुभकामनाएँ
    दुनिया देखी लाेग देखे।
    राक्षस देखे फ़रिश्ते देखे।

    रिश्ते देखे दोस्त देखे।
    हर कहीं पर मिलावट ही दिखी।

    अलग अलग रंगो के फूल देखे।
    एक माँ ही है जो देती है सब सुख -
    उसके प्यार में ना मिलावट।

    ना कभी चेहरे पे शिकायत देखी।
    बाकि तो सबके साथ अच्छा करने -
    पर भी हर बार शिकायत देखी।
    -विमल गांधी
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सुन्दर चर्चा। आभार 'उलूक' का उसके 'सौ फीट के डंडे' को जगह देने के लिये।

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  3. रचनाओं का बहुत बेहतरीन संकलन! बधाई!!!

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  4. सुन्दर लिंक्स. मेरी कविता शामिल करने के लिए आभार.

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  5. सुन्दर लिंकों के साथ सुन्दर चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यबाद।

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  6. बहुत सुंदर लिंक्स ! सभी को बधाई !!
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए हृदय से आभार 🙏

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  7. बहुत बहुत धन्यवाद्

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  8. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति
    धन्यवाद!

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  9. बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति

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  10. This comment has been removed by the author.

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  11. सुन्दर संकलन। धरोहर की मेरी पोस्ट को भी शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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