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Tuesday, June 13, 2017

रविकर यदि छोटा दिखे, नहीं दूर से घूर; चर्चामंच 2644


रविकर यदि छोटा दिखे, नहीं दूर से घूर 

रविकर 
लोकगीत लोरी कथा, व्यथा खुशी उत्साह।
मिट्टी के घर में बसे, रविकर प्यार अथाह।।

कंक्रीट सीमेंट में, बही समय की रेत।
व्यवहारिकता बच गयी, चढ़ा स्वार्थ का प्रेत।। 

किसानी: 


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जमूरा भाग खड़ा हुआ 

smt. Ajit Gupta 

मध्य एशिया में भारत 

pramod joshi 

एक डर से मुक्ति..थैंक्स लक्ष्मी 

Rohit Singh 

मोरा पिया नहीं है पास..!! 

Anurag Anant 
Virendra Kumar Sharma 

कहीं आपको भी उस डाल को 

काटने की ज़रूरत तो नहीं 

जिसपर आप बैठे हैं ? 

haresh Kumar 

बाल-कविता 

बाय-बाय नानी बाय-बाय दादी 
ख़त्म हुयी सारी आजादी...  
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व्यंग्य जुगलबंदी–38 : 

साहित्यिक खेती 

Ravishankar Shrivastava 

काव्य शक्ति-सम्पन्न तो, कवि को भूले कौन 

खले मूढ़ की वाह तब, समझदार जब मौन। 
काव्य शक्ति-सम्पन्न तो, कवि को भूले कौन।। 

कह के कविता की कमी, कन्नी काटें आप। 
कवि सुधार जो कर सके, रहे बैठ चुपचाप।। 

सीखिये नस दबाना और पाइये जवाब 

क्यों दिखता है सफेद कौए का 

काले कौए के सर के ऊपर हाथ 

सुशील कुमार जोशी 

हे ईश्वर !! 

अनुपमा पाठक 

ग़ज़ल 

कालीपद "प्रसाद" 

सत्ता के गलियारे कैसे 

udaya veer singh 

क्यों किसान रोता है 

रजनीश तिवारी 

"वर्षा" की ऋतु आ गई 

Dr Varsha Singh 

इश्क़ मुहब्बत वाला लौंडा 

जब झंडा लेकर घूमने लगा 

crazy devil 

उत्तम खेती है जरूर करिये..... 

ताऊ रामपुरिया 

सच में है दीन जिन्दगी.... 

श्यामल सुमन 

yashoda Agrawal 

बाइक यात्रा: 

कुमारहट्टी से जानकीचट्टी - भाग तीन 

(त्यूणी और हनोल) 

नीरज जाट 

गीत 

"पीपल ही उद्गाता है" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक)

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7 comments:

  1. सुंदर प्रस्तुति।।।।।

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  2. बढ़िया लिंक।
    आभार रविकर जी।

    ReplyDelete
  3. शुभ प्रभात
    वाह...
    आभार
    सादर

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति रविकर जी। आभार 'उलूक' के सूत्र को भी जगह देने के लिये।

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  5. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...

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  6. बहुत सुन्दर चर्चा संकलन

    ReplyDelete
  7. सुन्दर प्रस्तुति !

    ReplyDelete

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