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Tuesday, July 18, 2017

पतन हो किन्तु यदि रविकर स्वयं का दोष तो मानो; चर्चामंच 2670


पतन हो किन्तु यदि रविकर स्वयं का दोष तो मानो 
रविकर 
गुलामी गैर करवाता बजा तू हुक्म आका का।
पराजय दूसरे दें दोष थोड़ा सा लड़ाका का।
सदा दुख दर्द दूजे दें तुम्हारा भाग्य तुम जानो ।
पतन हो किन्तु यदि रविकर स्वयं का दोष तो मानो।।
क्रूर मशीनी देश चीन मानवता के लिए खतरा है 
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11 comments:

  1. शुभ प्रभात....
    बेहतरीन प्रस्तुति..
    आभार
    सादर

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  2. सुन्दर और सार्थक चर्चा।
    आभार रविकर जी।

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  3. सुप्रभात रविकर जी ! सुन्दर सार्थक सूत्रों से सुसज्जित आज का चर्चामंच ! मेरी प्रस्तुति को सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार !

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  4. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति ...

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  5. Kaafi kuch achcha padhne ko mila aaj yahaan... shukriya ravikar ji.
    Meri pravishti ko bhi jagah dene k liye bahut bahut aabhar :-)

    ReplyDelete
  6. सुंदर चर्चा, आभार.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  8. सराहनीय प्रस्तुतिकरण .

    ReplyDelete

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