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Wednesday, July 26, 2017

पसारे हाथ जाता वो नहीं सुख-शान्ति पाया है; चर्चामंच 2678


पसारे हाथ जाता वो नहीं सुख-शान्ति पाया है 

रविकर 
पतन होता रहा फिर भी बहुत पैसा कमाया है । 
किया नित धर्म की निन्दा, तभी लाखों जुटाया है। 
सहा अपमान धन खातिर, अहित करता हजारों का 

पसारे हाथ जाता वो नहीं सुख-शान्ति पाया है।। 
क्या सही क्या गलत ... 
खराब घुटनों के साथ 
रोज़ चलते रहना 
ज़िंदगी की जद्दोजहद नहीं 
दर्द है उम्र भर का ...
 एक ऐसा सफ़र 
जहाँ मरना होता है रोज़ ज़िंदगी को ... 
ऐसे में ... 
सही बताना क्या में सही हूँ ...  

स्वप्न मेरे ...पर Digamber Naswa 

Sunehra Ehsaas पर 

Nivedita Dinkar 
घनन घनन घन गाजे घन सन सन 
सनन समीर छनन छनन छन 
पायलें कल कल नदिया नीर 
कुहू कुहू कुक कोयली पिहू पिहू मित मोर 
हर रही चित चंचल को सुखद सुहानी भोर 
अंबर तक उड़ता आँचल लहरे 
मन के तीर. घनन घनन घन.... 

कविता मंच पर KL SWAMI 
दुनिया में कुछ भी अजेय नहीं 
वह जो अजेय है मात्र है एक दंभ... 

सरोकार पर Arun Roy  


अर्चना चावजी  
Archana Chaoji  


चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 

गति ही जीवन है... 

अनुपमा पाठक 

गीत  

"सावन की हरियाली तीज"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 


चाँद दिखाई दिया दूज का,
फिर से रात हुई उजियाली।
हरी घास का बिछा गलीचा,
तीज आ गई है हरियाली... 


6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    हरियाली तीज की शुभ कामनाएँ
    उत्कृष्ट रचनाएँ
    आभार
    सादर

    ReplyDelete

  2. हरियाली तीज की शुभ कामनाएँ
    उत्कृष्ट लिंक
    --
    आभार आदरणीय रविकर जी।

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति ..

    ReplyDelete
  4. बहुत सुंदर लींक्स, आभार.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  5. सुन्दर लिंक्स ........सुन्दर चर्चा|

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति रविकर जी।

    ReplyDelete

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