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Sunday, September 24, 2017

"एक संदेश बच्चों के लिए" (चर्चा अंक 2737)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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उस शख़्स पर से तीरे नज़र यूँ फिसल गया 

मानिंदे बर्फ़ कोह सा पत्थर पिघल गया 
हाँ! शम्स दोपहर था चढ़ा शाम ढल गया... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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दुस्साहस ! 

रेखा श्रीवास्तव 
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चिड़िया: बस, यूँ ही.... 

चिड़िया: बस, यूँ ही....: 
नौकरी, घर, रिश्तों का ट्रैफिक लगा, 
ज़िंदगी की ट्रेन छूटी, बस यूँ ही...  
है दिवाली पास, जैसे ही सुना, 
चरमराई खाट टूटी, बस यूँ ही 
आपका ब्लॉग पर Meena Sharma  
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कितना लंबा इंतज़ार 

प्रसिद्ध ग्रीक कवि यिआन्निस रित्सोस ने लिखा :
मुझे मालूम है हम में एक एक को
कदम बढ़ाना पड़ता है प्रेम की राह पर अकेले ही 
वैसे ही आस्था के रास्ते 
और मृत्यु को जाते रास्ते पर भी 
मैं अच्छी तरह जानता हूँ 
कोशिश तो बहुतेरी की पर कर नहीं पाया कुछ  .
अब मैं एकाकी नहीं 
तुम्हारे साथ चलना चाहता हूँ 
चलोगी प्रिय? 
लिखो यहां वहां पर विजय गौड़ 
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पेड़ 

कविताएँ पर Onkar 
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क्या है ब्ल्यू -बेबी -सिंड्रोम ? 

चिकित्सा शब्दावली में बात करें तो कुछ ऐसे बालक होते हैं जिनके साथ नियति ऐसे खेल खेलती है कि इनका नन्ना दिल गर्भावस्था में ही कुछ ऐसी विकृतियों का शिकार हो जाता है जो जन्म के बाद ही अपनी... This is a content summary only. Visit my website for full links, other content, and more!... 
Virendra Kumar Sharma  
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ज़रा ठहरो 

ज़रा ठहरो ! 
तुम इनको न छूना, 
ये एक बेहद पाकीजा से रिश्ते के 
टूट कर बिखर जाने से 
पैदा हुई किरचें हैं जिन्हें छूते ही 
धारा प्रवाह खून बहने लगता है , 
डरती हूँ तुम्हारे छू लेने से 
कहीं इनकी धार कुंद ना हो जाए, 
अगर इनकी चुभन से लहू ही ना बहा
तो इनकी सार्थकता क्या रह जायेगी ... 
Sudhinama पर sadhana vaid 

Saturday, September 23, 2017

"अहसासों की शैतानियाँ" (चर्चा अंक 2736)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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नव रात्रि में प्रार्थना 

शैल की पुत्री शैलजा तू, सारे जग की यशस्विनी माँ, 
योगिनी रूप, करती है तप है तू ही ब्रह्मचारिणी माँ... 
कालीपद "प्रसाद"  
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मुझ तक पहुँच जाओगे... 

मैं आज किसी सुकून की तलाश में, 
उन जगहों पर जा कर, 
पहरों बिता आती हूँ, 
जिस जगह तुम घंटो बैठा करते थे.. 
तुम्हारी खुशबू हर तरफ महसूस करती हूं, 
ना जाने क्यों तुम्हारे ना होने में भी... 
'आहुति' पर Sushma Verma  
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अपराधबोध से मुक्ति दिलाने 

’कानूनी मान्यता’ 

मंत्री बनने के बाद ’सामाजिक व्यवस्था एवं उसके प्रभाव’ विषय पर संगोष्ठी में हिस्सा लेने के लिए उन्होंने कनाडा का दौरा किया. आख्यान सुन कर पता चला कि समाज में कोई अपराध भावना से न ग्रसित हो इस हेतु कुछ बरस पहले सरकार ने राजमार्गों पर स्पीड लिमिट को १०० से बढ़ाकर १२० किमी प्रति घंटा करने का प्रस्ताव रखा. सरकार ने अपने सर्वेक्षण से जाना था कि ९० प्रतिशत लोग १२० पर गाड़ी चलाते हैं और पुलिस भी उस सीमा तक उनको नजर अंदाज कर जुर्माना नहीं लगाती. आम जन के बीच जब यह प्रस्ताव आया तो आमजन ने इसे नहीं स्वीकारा. उनका मानना था कि अगर स्पीड लिमिट बढ़ा कर १२० कर दी गई तो लोग १४० पर गाड़ी चलाने लगेंगे.... 
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