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Monday, October 16, 2017

"नन्हें दीप जलायें हम" (चर्चा अंक 2759)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

स्वप्न और स्वप्न में खिली कविता 

जो समाधान जागते हुए बड़े प्रयास के बाद भी नहीं मिलते, कभी कभी वो सारे हल स्वप्न दे जाता है... वास्तव में वह स्वप्न स्वप्न नहीं होता... उसकी तरलता इतनी वास्तविक होती है कि आँखें बहने लगती हैं. ये रोना कुछ अलग ही होता है कि हम अवचेतन रूप से रो रहे होते हैं, खुद आँख बेगानी होती है, भीगती है तब उसे एहसास होता है कि बह रही है. ऐसे ही आँखों से नींद के किसी द्वार पर खाड़ी मिल जाती है कविता...  
अनुशील पर अनुपमा पाठक 

बारात में चलाये जाने वाले पटाखे 

क्यूँ नहीं नुकसान पहुँचाते? 

मास्साब कक्षा चौथी के बच्चों को पढ़ा रहे हैं. दीवाली असत्य पर सत्य की विजय का त्यौहार है. दीवाली पर खूब साफ सफाई कर दीपक जलाये जाते हैं. रोशनी की झालर लगा कर अंधेरे को भगाया जाता है. दीवाली स्वच्छता व प्रकाश का पर्व है. दीवाली पर लक्ष्मी गणेश की पूजा की जाती है ताकि धन धान्य की कोई कमी न हो. दीवाली बहुत से व्यापारियों के हिसाब किताब का समय भी है. दीवाली पर मिठाई खाई जाती है. नये कपड़े पहने जाते हैं. पटाखे चलाये जाते हैं... पटाखे क्यूँ चलाये जाते हैं? राजू पूछ रहा है. क्यूँकि पटाखे चलाने से रोशनी होती है और धमाके की आवाज होती है जिससे डर कर बुरी बलायें आपके जीवन से भाग जाती हैं... 
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अपना घर 

अर्चना चावजी Archana Chaoji  
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डार्क चॉकलेट का जादू 

रोज़ाना भी खा सकतें हैं आप डार्क चॉकलेट क्योंकि इसमें ऐसे यौगिक (तत्व -समूह )मौजूद रहतें हैं जो हमारी सेहत के लिए अच्छे रहते हैं। बेशक 'अति सर्वत्र वर्ज्यते' यहां भी लागू...  
Virendra Kumar Sharma  

एक ग़ज़ल :  

मिलेगा जब वो हम से--- 

 मिलेगा जब भी वो हम से, बस अपनी ही सुनायेगा 
मसाइल जो हमारे हैं , हवा में वो उड़ाएगा... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक  
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सहेजना रिश्तों का.... 

अपनी बात...पर वन्दना अवस्थी दुबे  
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6 comments:

  1. शुभप्रभात आदरणीय,
    सुंदर संकलन,मेरी रचना को मान देने के आभार।
    सादर।

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  2. क्रांतिस्वर को इस चर्चा में स्थान देने हेतु बहुत -बहुत धन्यवाद शास्त्री जी।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  4. बहुत सुन्दर ...

    ReplyDelete

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