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Wednesday, October 18, 2017

"मधुर-मधुर मेरे दीपक जल" चर्चामंच 2761


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देह देहरी देहरा, दो दो दिया जलाय - 

रविकर 
देह देहरी देहरा, दो दो दिया जलाय ।
कर उजेर मन गर्भ-गृह, दो अघ-तम दहकाय ।
दो अघ-तम दहकाय , घूर नरदहा खेत पर ।
गली द्वार-पिछवाड़, प्रकाशित कर दो रविकर।
जय जय लक्ष्मी मातु, पधारो आज शुभ घरी।
सुख-समृद्धि-सौहार्द, बसे मम देह देहरी ।।

देह, देहरी, देहरा = काया, द्वार, देवालय 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, 

दिल्ली में युवा काव्य प्रतियोगिता 

Dr Abnish Singh Chauhan 

आइये आज धनतेरस के दिन प्रारंभ करते हैं

 दीपावली का तरही मुशायरा। 

आज सुनते हैं तीन रचनाकारों राकेश खंडेलवाल जी, 

अश्विनी रमेश जी और 

बासुदेव अग्रवाल 'नमन' जी से उनकी रचनाएँ। 

पंकज सुबीर 

बचपन की ओर निर्निमेष ताकते लम्हे-- २ 

अनुपमा पाठक 

बुरांस के फूल 

राजीव कुमार झा 

क्या हैं जैविक पक्षीय जीवाणु मित्र 

'प्रोबाइाटिक्स 'एवं पूर्व -जैविक (प्री -बाइ -आ-टिक्स ), 

खुराक में इनका होना ज़रूरी या गैर -ज़रूरी ? 

Virendra Kumar Sharma 

तू मेरी न सुन मगर कहूँगा...... 

निजाम रामपुरी 

yashoda Agrawal 

दीवाली इस वर्ष 

Asha Saxena 

हम  जलाएंगे  दीपक करेंगे  प्रकाश, तुम्हारे लिये.... 

kuldeep thakur 

गीत  

"दीप खुशियों के जलें"  

(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    दीप पर्व की शुभकामनाएँ
    सादर

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  2. उम्दा चर्चा। मेरी रचाने शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  3. दीप पर्व शुभ हो । सुन्दर रविकर चर्चा।

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  4. बहुत उम्दा लिंक्स.'देहात' से मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.
    दीपावली की शुभकामनाएं !

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  5. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति
    शुभ दीपावली!

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  6. सब ही की कृतियाँ एक से बढ़कर एक !
    सभी को दीपावली की मीठी - मीठी शुभकामनाएं

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"मन्दिर बन पाया नहीं, मिले न पन्द्रह लाख" (चर्चा अंक-3186)

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