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Friday, December 01, 2017

खोज रहा बाहर मनुज, राहत चैन सुकून : चर्चामंच 2804


फिर सोने के दुर्ग में, पति बिन कौन उदास- 

रविकर 
सच्चे शुभचिंतक रखें, तारागण सा तेज़।
अँधियारे में झट दिखें, रविकर इन्हें सहेज।।

शीशा सिसकारी भरे, पत्थर खाये भाव।
टकराना हितकर नहीं, बेहतर है अलगाव।।

खोज रहा बाहर मनुज, राहत चैन सुकून।
ताप दाब मधुमेह कफ़, अन्दर करते खून।।

ठोकर खा खा खुद उठा, रविकर बारम्बार।
लोग आज कहते दिखे, बड़ा तजुर्बेकार।। 

मनाओ मूर्ख अधिकारी, अधिक सम्मान दे करके 

रविकर 
अपेक्षा मत किसी से रख, किसी की मत उपेक्षा कर ।
सरलतम मंत्र खुशियों का, खुशी से नित्य झोली भर।
समय अहसास बदले ना, बदलना मत नजरिया तुम
वही रिश्ते वही रास्ता वही हम सत्य शिव सुंदर।।

बिका तो खरीददार कौन ? 

Shalini Kaushik 

रानी पद्मिनी (पद्मावती )का चरित्र निभाने वाली 

अभिनेत्री को पहले छः माह तक तप करना चाहिए था

Virendra Kumar Sharma 

हर दीपक दम तोड़ रहा है...कुसुम कोठारी 

yashoda Agrawal 

अनुभूति के वे क्षण 

Mamta Tripathi 

सुप्रभातम्! जय भास्करः! ५८ ::  

सत्यनारायण पाण्डेय 

अनुपमा पाठक 

जिन्दा रहने की शर्त -  

मालिक से मजदूर बन जाओ 

विष्णु बैरागी 
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हुए हम घायल प्यार में तेरे 

हुए हम घायल प्यार में तेरे
घायल ही हमको रहने दो
जरूरत नहीं मरहम पट्टी की
घाव दिल पर गहराने दो
मुश्किल से बने हम दीवाने
अब हमें होश में मत लाना
कितना सूकूँ है इस प्यार में
बनकर दीवाना समझ जाना... 

सीढियां उपर जाने के लिए होती हें .......... 

अरशद अली 

Arshad Ali 

कार्टून:-  

मंदिर मंदिर पता चला है ...फूल खिला है 

Kajal Kumar 

दोहे "करना मत दुष्कर्म"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

7 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति रविकर जी।

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  3. Nice presentation. Thanks to give place my post here.

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  4. उम्दा चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, शास्त्री जी।

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति में मेरी पोस्ट शामिल करने हेतु आभार!

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  6. उम्दा चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

    ReplyDelete

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