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Saturday, December 02, 2017

"पढ़े-लिखे मुहताज़" (चर्चा अंक-2805)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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भोर का संजीवन लाता सूरज.... 

श्वेता सिन्हा 


भोर की अलगनी पर लटके 

घटाओं से निकल बूँदें झटके 
स्वर्ण रथ पर होकर सवार 
भोर का संजीवन लाता सूरज... 
मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  
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हलाहल मत चखो 

जो प्रतिष्ठा शेष है
उसको रखो।
सुधा के धोखे
हलाहल मत चखो... 
अभिनव रचना पर Mamta Tripathi 
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जिंदगी में हर किसी को  

है किसी का इन्तिज़ार 

इन्तिज़ार सर्वशक्तिमान को है बंदगी का इन्तिज़ार 
जिंदगी में हर किसी को है किसी का इन्तिज़ार... 
मधुर गुंजन पर ऋता शेखर 'मधु'  
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मौजूद रहेंगी ध्वनियाँ 

एक दिन कुछ ऐसा होगा 
मिट जाएगी पृथ्वी ये महल 
ये अट्टालिकाएं ये सभ्यताएं 
सब मिटटी बन जाएँगी 
फिर भी मौजूद रहेंगी ध्वनियाँ... 
सरोकार पर Arun Roy  
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वह गुस्ताख मिज़ाज 

लिखो यहां वहां पर विजय गौड़ 
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GST को हौव्वा बनाने वाले !! 

पिछले दिनों कराधान करते समय सरकार की तरफ से बार-बार कहा गया कि आप अपनी हर खरीदी का बिल जरूर लें ! पर क्या व्यापारियों को भी ऐसा कुछ कडा निर्देश दिया गया कि आपको भी हर बिक्री का बिल काटना ही है ! क्योंकि भले ही यह कानून हो पर इस वर्ग के अधिकाँश भाग में बिल ना देना, आदत में शुमार है ! टैक्स पहले भी थे, शायद कुछ ज्यादा  होंगे ! पर  इधर बहुत हो-हल्ला मचा, GST को लेकर, तरह-तरह की अफवाहें उड़ीं, दोनों तरफ से उलटे-सीधे आंकड़े प्रस्तुत होते रहे ! विरोध के लिए विरोध हुआ पर "कुछेक" की आदत सुधारने का किसी ने भी कोई सुझाव नहीं दिया... 
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  3. क्रांतिस्वर की इस पोस्ट को स्थान देने हेतु आभार व धन्यवाद।

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  4. लंकिन कुछ लालित्‍य का चीर रहे हैं खींच...वाह मौजूदा समय पर ग़जब की अभिव्‍यक्‍ति

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. सुन्दर चर्चा

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