साहित्यकार समागम

मित्रों।
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार) को खटीमा में मेरे निवास पर साहित्यकार समागम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें हिन्दी साहित्य और ब्लॉग से जुड़े सभी महानुभावों का स्वागत है।

कार्यक्रम विवरण निम्नवत् है-
दिनांक 4 फरवरी, 2018 (रविवार)
प्रातः 8 से 9 बजे तक यज्ञ
प्रातः 9 से 9-30 बजे तक जलपान (अल्पाहार)
प्रातः 10 से अपराह्न 1 बजे तक - पुस्तक विमोचन, स्वागत-सम्मान, परिचर्चा (विषय-हिन्दी भाषा के उन्नयन में
ब्लॉग और मुखपोथी (फेसबुक) का योगदान।
अपराह्न 1 बजे से 2 बजे तक भोजन।
अपराह्न 2 बजे से 4 बजे तक कविगोष्ठी
अपराह्न 5 बजे चाय के साथ सूक्ष्म अल्पाहार तत्पश्चात कार्यक्रम का समापन।
(
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री का निवास, टनकपुर-रोड, खटीमा, जिला-ऊधमसिंहनगर (उत्तराखण्ड)
अपने आने की स्वीकृति अवश्य दें।
सम्पर्क-9368499921, 7906360576

roopchandrashastri@gmail.com

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Sunday, December 03, 2017

"दिसम्बर लाता है नया साल" (चर्चा अंक-2806)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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एक सुबह ऐसी भी……. 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी - 
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एक नाज़ुक-सा फूल गुलाब का ... 

हूँ मैं एक नाज़ुक-सा फूल 
घेरे रहते हैं मुझे नुकीले शूल... 
Ravindra Singh Yadav  
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आखिरी खनक 

अभी-अभी सुनी है मैंने 
तुम्हारे गेहुएं पांवों में बंधी पायल की आखिरी खनक. 
काश कि मैं जवान होता, कान थोड़े ठीक होते, 
तो कुछ देर तक सुन पाता तुम्हारी पायल की खनक... 
कविताएँ पर Onkar 
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गीत  

"तुम्हें देखूं तुम्हें छू लूं"  

(राधा तिवारी) 

तुम्हें देखूं तुम्हें छू लूं तुम्हें दिल में बसा लूं मैं
तुम्हारे ख्वाब में आकर के तुम्हें थोड़ा हंसा दूं मैं.. 
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फलसफा प्रजातंत्र का 

बंद ठण्डे कमरों में बैठी सरकार
नीति निर्धारित करती 
पालनार्थ आदेश पारित करती 
पर अर्थ का अनर्थ ही होता 
मंहगाई सर चढ़ बोलती 
नीति जनता तक जब पहुँचती 
अधिकार लिए होती ... 
Akanksha पर Asha Saxena  
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बदनाम रानियां -  

कहानी 

भारतीय नारी पर shikha kaushik  
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दूषित हवा 

कितना भी चाहे वह बचना 
कितना भी चाहे मुँह फेरना 
गाहे बगाहे रोज़ ही 
उसकी मुलाक़ात हो जाती है, 
उस सबसे जिससे वह 
पूरी शिद्दत से दूर बहुत दूर रहना चाहती है 
लेकिन लाख कोशिश करने पर भी 
बचने की कोई और सूरत निकाल नहीं पाती है... 
Sudhinama पर sadhana vaid  
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बालकविता  

"गिलहरी"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

बैठ मजे से मेरी छत पर,
दाना-दुनका खाती हो!
उछल-कूद करती रहती हो,
सबके मन को भाती हो... 

6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सुन्दर सूत्रों का चयन आज के चर्चा मंच में ! मेरी रचना को स्थान देने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  3. आज की रविवारीय प्रस्तुति में शामिल की गयी सुन्दर रचनाओं के साथ 'उलूक' के दिसम्बर को भी स्थान देने के लिये आभार आदरणीय।

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  4. सुन्दर चर्चा. आभार.

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  5. धन्‍यवाद शास्‍त्री जी मेरे ब्‍लॉग को चर्चामंच पर लाने के लिए आभार

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  6. आदरणीय/आदरणीया आपको अवगत कराते हुए अपार हर्ष का अनुभव हो रहा है कि हिंदी ब्लॉग जगत के 'सशक्त रचनाकार' विशेषांक एवं 'पाठकों की पसंद' हेतु 'पांच लिंकों का आनंद' में सोमवार ०४ दिसंबर २०१७ की प्रस्तुति में आप सभी आमंत्रित हैं । अतः आपसे अनुरोध है ब्लॉग पर अवश्य पधारें। .................. http://halchalwith5links.blogspot.com आप सादर आमंत्रित हैं ,धन्यवाद! "एकलव्य"


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"जीवित हुआ बसन्त" (चर्चा अंक-2857)

मित्रों! मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- &...