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Tuesday, December 05, 2017

दरमाह दे दरबान को जितनी रकम होटल बड़ा; चर्चामंच 2808

हाहा हहा क्या बात है। हालात् है।। 

रविकर 
दरमाह दे दरबान को जितनी रकम होटल बड़ा। 
परिवार सह इक लंच में उतनी रकम दूँ मैं उड़ा। 
हाहा हहा क्या बात है। उत्पात है। 

अब प्रतीक्षा है हमे 

तुम्हारे निज धाम आने की... 

kuldeep thakur 

सुप्रभातम्! जय भास्करः! ६२ ::  

सत्यनारायण पाण्डेय 

अनुपमा पाठक 

ऐसा साधु देखा कभी 

Shalini Kaushik 

ऐसी ख़ुशबू पहले कभी न थी.... 

कुसुम सिन्हा 

yashoda Agrawal 

बालगीत "ऋतुएँ तो हैं आनी जानी"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक) 

स्वधायै स्वहायै नित्यमेव भवन्तु... 

गौतम राजऋषि 

कहानी खोल के रख दी है कुछ मजबूत तालों ने ... 

Digamber Naswa 

अटलांटिक के उस पार - ७ 

 (पुरुषोत्तम पाण्डेय) 

किताबों की दुनिया -154 

नीरज गोस्वामी 

कार्टून:-  

अाअाे, कांग्रेस काे अपना परधान चुनना सिखाएं 

Kajal Kumar 

5 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. सुन्दर व सार्थक चर्चा, मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति रविकर जी।

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  4. विस्तृत चर्चा ... कुछ नए सूत्र ...
    आभार मुझे भी शामिल करने के लिए ...

    ReplyDelete
  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete

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