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Sunday, June 24, 2018

"तालाबों की पंक" (चर्चा अंक-3011)

मित्रों! 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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मेरी कलम  

(राधा तिवारी "राधेगोपाल ") 

करती है मेरी कलम,  जब कोई आगाज।
 भरते हैं तब भाव भी, ऊंची सी परवाज ... 
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विलोम के अतिरेक  

सुंदर नहीं हो सकते हैं 

*डा. रश्मि रावत*  
स्त्री को तो सदा से उसके मन को समझने वाला,  
उसके क्रियाकलापों से साझा करने वाले  
साथी की जरूरत रही है... 
लिखो यहां वहां पर विजय गौड़  
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575.  

परवरिश 

कहीं पथरीली कहीं कँटीली  
यथार्थ की जमीन बंजर होती है  
जहाँ ख्वाहिशों के फूल उगाना  
न सहज होता है न सरल  
परन्तु फूल उगाना लाजिमी है  
और उसकी खूशबू का बसना भी,  
यही जीवन का नियम है  
और इसी में जीवन की सुन्दरता है।  
वक्त आ चुका है  
जब तुम अपनी ज़मीन पर  
सपनों से सींचकर  
ख्वाहिशों के फूल खिलाओ,  
अपनी दुनिया सँवारो  
और अपनी पहचान बनाओ... 
डॉ. जेन्नी शबनम 
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दरवाज़े 

कई दरवाज़े हैं मेरे मन के अन्दर  
जिन पर ताला तो है  
पर उनकी चाबियाँ भी मेरे ही पास है  
हर दरवाज़े को रोज़ खोल कर छोड़ देती हूँ  
ताकि ताज़ी हवा जाती रहे... 
प्यार पर Rewa tibrewal  
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३१४. 

महाराजा 

वे महाराजा हैं,  
वही करेंगे, 
जो करना चाहेंगे, 
इक्कीसवीं सदी के हैं,  
इसलिए थोड़ा नाटक करेंगे,  
जताएंगे कि वे पूर्वाग्रह से ग्रस्त नहीं हैं... 
कविताएँ पर Onkar  
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हिन्दुस्थान  

फिर गुलाम होने लगता है 

ईसा से 350 साल पहले एलेक्जेन्डर पूछ रहा था कि हिन्दुस्थान क्या है? यहाँ के लोग क्या हैं? लेकिन नहीं समझ पाया! बाबर से लेकर औरंगजेब तक कोई भी हिन्दुस्थान को समझ नहीं पाए और अंग्रेज भी समझने में नाकामयाब रहे। शायद हम खुद भी नहीं समझ पा रहे हैं कि हमारे अन्दर क्या-क्या है! आप विदेश में चन्द दिन रहकर आइए, आपको वहाँ की मानसिकता समझ आ जाएगी – सीधी सी सोच है, वे खुद के लिये जीते हैं। प्रकृति जिस धारा में बह रही है, वे भी उसी धारा में बह रहे हैं... 
smt. Ajit Gupta  
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आखिर कब तक?.... 

श्वेता सिन्हा 

एक मासूम दरिंदगी का शिकार हुई  
यह चंद पंक्तियों की ख़बर बन जाती है 
हैवानियत पर अफ़सोस के कुछ लफ़्ज़  
अख़बार की सुर्ख़ी होकर रह जाती है... 
मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  

Saturday, June 23, 2018

"करना ऐसा प्यार" (चर्चा अंक-3010)

मित्रों! 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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रहम मेरे यार कर....... 

श्वेता 

मैं ख़्वाब हूँ मुझे ख़्वाब में ही प्यार कर  
पलकों की दुनिया में जी भर दीदार क... 
मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  
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प्रेम के बीज 

गहरे बोए बीज प्रेम के
सींचा प्यार के जल से
मुस्कान की खाद डाली
 इंतज़ार किया शिद्दत से
बहुत इंतज़ार के बाद
दिखे अंकुरित होते चार पांच... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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कविता 

प्यार पर Rewa tibrewal  
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पुरस्कार 

लगभग चार वर्ष पहले अनीता की नियुक्ति मध्य विद्यालय में हुई थी| जिस दिन वह विद्यालय में योगदान देने गईं , सभी शिक्षक और बच्चे बहुत खुश हुए थे क्योंकि वहाँ गणित के लिए कोई शिक्षक न था| 
योगदान देने के बाद प्रधानाध्यापिका ने उन्हें बैठने को कहा और बोलीं, “अनीता जी, आप कल से क्लास लीजिएगा| हम आपको आठवीं कक्षा की क्लास टीचर बनाएँगे|"  
ऋता शेखर 'मधु' 
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Friday, June 22, 2018

"सारे नम्बरदार" (चर्चा अंक-3009)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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आज..... 

सुचेतना मुखोपाध्याय 

सुबह खोल रही है,  
अपना लिफ़ाफ़ा हौले से।  
गली से निकल रहे हैं लोग,  
वही कल के काम पर।  
उड़ते हुए परिंदों की चोंचों में,  
वही तिनके हैं कल से।  
फूलों ने पंखुड़ी बिछाई है  
आसमां तलक़  
रोज़ की तरह... 
yashoda Agrawal 
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मुस्लिम बहुल इलाके  

मिनी पाकिस्तान का रुप ले चुके हैं ,  

यह तो सच है 

ओला और एयरटेल के मार्फत जो मामले सामने आए हैं , वह दुर्भाग्यपूर्ण ज़रुर हैं पर सच हैं । मुसलमानों ने अपनी छवि ही ऐसी बना ली है । मुस्लिम बहुल इलाके मिनी पाकिस्तान का रुप ले चुके हैं , इस से अगर कोई इंकार करता है तो वह न सिर्फ़ अंधा है बल्कि मनबढ़ है और कुतर्की भी । अगर यकीन न हो तो किसी भी मुस्लिम बहुल इलाक़े में रहने वाले इक्का दुक्का नान मुस्लिम से बात कर लीजिए । हकीकत पता चल जाएगी । और जो कोई नया सेक्यूलर है और प्याज खाने का बड़ा शौक़ीन है तो उसे बाकायदा चैलेंज देता हूं कि सौ प्रतिशत मुस्लिम बहुल इलाके में ज़मीन या मकान खरीद कर दिखा दे ... 
Dayanand Pandey 
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करती हूँ आह्वाहन मै 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी  
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"तालाबों की पंक" (चर्चा अंक-3011)

मित्रों!  रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...