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Tuesday, January 09, 2018

"हमारा सूरज" (चर्चा अंक-2843)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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धरातल... 

ग़ैरों की दास्ताँ क्यों सुनूँ?  

अपनी राह क्यों न बनाऊँ?  
जो पसंद बस वही क्यों न करूँ?  
दूसरों के कहे से जीवन क्यों जीऊँ?  
मुमकिन है ऐसे कई सवाल कौंधते हों तुममें  
मुमकिन है इनके जवाब भी हों तुम्हारे पास  
जो तुम्हारी नज़रों में सटीक है  
और सदैव जायज़ भी... 
डॉ. जेन्नी शबनम  
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4 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सुन्दर मंगलवारीय प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  4. आभार आपका ... बेहतरीन लिंक्स एवं प्रस्तुति

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"कल-कल शब्द निनाद" (चर्चा अंक-3131)

मित्रों!   रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')    -- दोहे...