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Sunday, February 11, 2018

'रेप प्रूफ पैंटी' (चर्चा अंक-2876)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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कुछ नहीं होने का सुख 

जिन्दगी भर लगे रहे कि कुछ बन जाए, अपना भी नाम हो, सम्मान हो। लेकिन अब पूरी शिद्दत से मन कर रहा है कि हम कुछ नहीं है का सुख भोगें। जितने पंख हमने अपने शरीर पर चिपका या उगा लिये हैं, उन्हें एक-एक कर उखाड़ने और कतरने का मन है। कभी पढ़ाई की, कभी नौकरी की, कभी सामाजिक कार्य किये, कभी लेखन किया और सभी से लेकर न जाने कितने पंख अपने शरीर में लगा लिये। हम यह है और वह हैं, हमारी पहुँच यहाँ तक है और वहाँ तक है! परत दर परत हम पर चढ़ती गयी और हम हमारे वास्तविक स्वरूप से दूर होते गये। हमारे अंदर का प्रेम न जाने कहाँ और कब रीत गया, बस हमें दूसरों से सम्मान मिले यही चाहत बसकर रह गयी... 
smt. Ajit Gupta  
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वैलेंटाइन डे ? 

Akanksha पर Asha Saxena  
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"बुरी औरत हूँ मैं"  

गंगा शरण सिंह की नजर में 

जब एक सजग पाठक और सच्चे आलोचक के द्वारा आपको अपने लेखन पर प्रतिक्रिया मिले तो शायद वो ही एक लेखक का सबसे बड़ा पुरस्कार होता है. उसमे भी गंगा शरण सिंह जी जैसे साहित्य के सजग प्रहरी आपको पढ़ें और आपके कहानी संग्रह पर अपनी प्रतिक्रिया दें तो ये किसी भी लेखक के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं क्योंकि ये वो पाठक हैं जो साहित्य की राजनीति से बहुत दूर हैं लेकिन साहित्य उनकी रग रग में बसा है. मैं धन्य हुई गंगा जी आपकी बेबाक और सच्ची प्रतिक्रिया पाकर ....आशा है आप समय समय पर इसी तरह हम नव आगंतुकों को अपने विचारों से इसी तरह लाभान्वित करते रहेंगे .. 
vandana gupta  
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विनती - 

कृष्ण ,तुम्हारे श्री-चरणों में ,  
मेरे गुण औ दोष समर्पित !  
जनम भटकते बीता, 
अब बस इतना करो कि मिटें द्विधायें,  
यह गठरी अब तुम्हीं सँभालो,  
करो वही जो तुम्हें सुहाये ,  
किया-धरा सब तुम्हें सौप  
हों जायें राग-विराग विसर्जित !... 
प्रतिभा सक्सेना  
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एके साधे सब सधे 

रहिये लटपट काटि दिन, अरु घामे मा सोय।
छाँह न वाकी बैठिये, जो तरु पतरो होय।।
जो तरु पतरो होय, एक दिन धोखा दैहे।
जा दिन बहे बयारी, टूटी तब जर से जैहे।
कह गिरधर कविराय, छाँह मोटे की गहिये।
पता सब झरि जाय, तऊ छाया में रहिये।।... 
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6 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  3. सुन्दर सजा चर्चा मंच |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद |

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  4. सुन्दर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  5. आदरणीय शास्त्री जी, मेरी पोस्ट को 'चर्चा मंच' में स्थान देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

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