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Sunday, March 11, 2018

"फूल और व्यक्ति" (चर्चा अंक-2906)

मित्रों!  
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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अकविता  

"नियति"  

हमारे पूर्वजों ने,
बरगद का एक वृक्ष लगाया था,
आदर्शों के ऊँचे चबूतरे पर,
इसको सजाया था... 
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फूल और व्यक्ति का स्तर 


देहात पर राजीव कुमार झा  
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ख़ामुशी बेज़ुबां ... 

ख़ुश्बुए-दिल जहां नहीं होती  
कोई बरकत वहां नहीं होती  
हौसले साथ- साथ बढ़ते हैं  
सिर्फ़ हसरत जवां नहीं होती... 
साझा आसमान पर Suresh Swapnil  
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तेरा राम रखैया... 

सबकी चीत भलाई प्यारे , तेरा राम रखैया,  
कहाँ टिका जीवन का पानी लहर लहरती कहती,  
चलता आना-जाना उड़ते पत्ते उड़ते पत्ते नदिया बहती  
जड़-जंगम को नाच नचावे नटखट रास-रचैया... 
शिप्रा की लहरें पर प्रतिभा सक्सेना  
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8 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. आज की इस सुंदर प्रस्तुति में मेरी रचना को भी शामिल करने हेतु धन्यवाद।

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  3. सुंदर लिंक्स के साथ रविवारीय चर्चा मंच.मेरे पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार.

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  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  5. सुंदर चर्चा बेहतरीन links मेरी post को यहाँ स्थान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद

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  6. बढ़िया चर्चा

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  7. क्रांतिस्वर की पोस्ट को इस अंक में स्थान देने हेतु शास्त्री जी का आभार एवं धन्यवाद।

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  8. बहुत सुंदर प्रस्तुति.... लाजवाब

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