Wednesday, March 14, 2018

"ढल गयी है उमर" (चर्चा अंक-2909)

सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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भटकन 


प्यार पर Rewa tibrewal 
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टेलीविजन को पछाड़ता इंटरनेट 

Mukul Srivastava  at  
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प्रिय को पत्र 

साथिया.... स्याह रात की सर्द चाँदनी में 
अनमने से बैठे थे हम, 
कुहासे के द्वार पर तुम्हारी दस्तक हुई। 
उद्देश्यहीन जीवन में सपने कुलाँचें भरने लगे। 
झिलमिल सितारों के बीच तुम्हारा आना 
उजालों के साथ मधुरता भी घोल गया... 
Ye Mohabbatein  at  
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परीक्षा का खाना 

नन्ही कोपल पर कोपल कोकास  
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हमारे ज़ख़्म उरियां... 

तबाही के ये: मंज़र देख लीजे 
कहां धड़ है कहां सर देख लीजे 
बुतों के साथ क्या क्या ढह गया है 
ज़रा गर्दन घुमा कर देख लीजे ... 
साझा आसमानपरSuresh Swapnil 

3 comments:

  1. चर्चा मंच की पूरी टीम को सुबह का सुप्रभात।सभी लिंक्स अत्यंत सुंदर हैं।साथ ही मेरी रचना को इस मंच में स्थान देने के लिये आभार।।

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  2. सुन्दर चर्चा।
    आपका आभार राधा बहन जी।

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  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति ..

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