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Wednesday, April 11, 2018

"सिंह माँद में छिप गये" (चर्चा अंक-2937)

सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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सुख दुःख आ गले मिले
बड़े प्रेम से आज
दौनों में बहस छिड गई
है वर्चस्व किसका... 
Akanksha पर Asha Saxena  
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किताबों की दुनिया - 172 

नीरज पर नीरज गोस्वामी  
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स्त्री हूँ मैं 

स्त्री हूँ मैं पर अबला नहीं हूँ 
बंद कर दो मुझे इस नाम से पुकारना 
मुझे कमज़ोर लिखना, 
मैं अपना मुकद्दर ख़ुद लिखना जानती हूं... 
प्यार पर Rewa tibrewal  
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सादगी ए ज़िन्दगी... 

*मैंने इस सादगी ए ज़िन्दगी से पल्ला झाड़ लिया*  
*ज़िन्दगी की सच्चाई ने मुझमें कटुता भर दिया* ... 
anamika ghatak  at  
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बुरके वाला लड़का 

बाल कहानी
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मित्र मंडली -64 


राकेश कुमार श्रीवास्तव राही  at  
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4 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. आदरणीय राधा बहन, आपके प्रयास से मित्र मंडली अनेक पाठकों तक पहुंची है। मेरे मित्र मंडली को चर्चामंच पर लिंक करने के लिए हार्दिक आभार एवं इस चर्चा में सम्मलित सभी रचनाकारों को बधाई।

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  3. सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।

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  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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"सुहानी न फिर चाँदनी रात होती" (चर्चा अंक-3134)

सुधि पाठकों! बुधवार   की चर्चा में  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। राधा तिवारी (राधे गोपाल) -- दोहे   "शरदपूर्णिमा रात...