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Monday, May 28, 2018

"मोह सभी का भंग" (चर्चा अंक-2984)

सुधि पाठकों!
सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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खुश हो कर के ले लेना जब मिले कभी भी मान
अच्छे कर्म सदा करो रखना यह अरमान

झूठ कपट का साया मेरे संग कभी न आये
दूर करूं हर कठनाई को जो मेरे सम्मुख आये... 
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गड्ढा मुक्त सड़क  

( राधा तिवारी " राधेगोपाल " ) 

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यातायात हमारा देखो ,अब कितना आसान हो गया।   
गड्ढा मुक्त सड़क पर चलना, मानो अब वरदान हो गया...  
राधे का संसार पर RADHA TIWARI 
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विरोधी-एकता के पेचो-ख़म 

जिज्ञासा पर pramod joshi  
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सोचिये अगली सदी को देंगे क्या.... 

रवीन्द्र प्रभात 

yashoda Agrawal 
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शिवपालगंज की सैर के बहाने  

रागदरबारी का वैभव 

Dayanand Pandey 
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क्रेडिट कार्ड-  

लघुकथा 

ऋता शेखर 'मधु' 
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कन्नड़ लोक कथा पर बनी  

संस्‍कृत भाषा की पहली  

animated फिल्‍म  

‘पुण्‍यकोटि’ 

आज एक कन्नड़ लोक कथा पुण्‍यकोटि का ट्रेलर आया, 
जन-सहयोग से बनी ये animated फिल्‍म 
हमें यूट्यूब पर देखने को मिली, वह भी संस्‍कृत में।सबसे अधिक ध्‍यान देने की बात संस्‍कृत के शब्‍दों का स्‍तर कतई प्राथमिक है। 
ये कहानी है पुण्यकोटि गाय की जिसे हम सबसे मनोरंजक रूप 
अर्थात् वीडियो में तो देखेंगे ही साथ ही प्राथमिक संस्‍कृत को 
आसानी से समझ भी सकेंगे।देवभाषा संस्‍कृत को इतने मनोरंजक रूप में 
सामने लाने के लिए इस एनीमेटेड वीडियो फिल्‍म के निर्माता 
सचमुच बधाई के पात्र हैं... 
Alaknanda Singh 
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सोनिआ हंस भी सकतीं हैं  

मुग्धा भाव लिए  

इससे ये तो पता चलता है  

वह मनुष्य योनि में ही हैं 

Virendra Kumar Sharma  
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प्रेम 

Pratibha Katiyar  
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बड़ेपन का विसर्जन,  

बड़प्पन का अर्जन 

दादा श्री बालकवि बैरागी को लेकर यह सब जो मैं लिख रहा हूँ, है तो व्यक्तिगत किन्तु ऐसा ‘व्यक्तिगत’ है जो व्यापक सार्वजनिकता से जुड़ता है। यह सब कोरा उपदेश नहीं, दादा का, बरसों से आचरण में उतारा हुआ, जीया हुआ, आजमाया हुआ है। इसे ‘स्मृति शेष’ की श्रेणी में भी रखा जा सकता है और ‘वस्तुपरक अध्ययन’ की श्रेणी में भी। ‘सफल कैसे बनें’ या ‘रातों-रात लोकप्रिय बनें’ जैसे प्रेरक व्याख्यानों के व्यवसायियों के लिए ये बातें उपयोगी और सहायक हो सकती हैं... 
एकोऽहम् पर विष्णु बैरागी 
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ओ! मतवाली 

आलिंगन की बेला थी तब दोनों खोये|
यौवन के घमण्ड में भरकर मुड़ मुड़ रोये|
निशा गयी प्राची में ऊषा झांक रही है|
तब क्यों मुझसे भीख प्रणय की माँग रही है|
विषय वासना के क्षण बीते ओ! मतवाली|
शैय्या तज दे सुबह हुई फैली उजियाली|
मेरे तेरे मध्य न दालें गलने वाली... 
मेरी दुनिया पर Vimal Shukla 
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जेठ दुपहरी कागा बोले 

anchal pandey  
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----- ॥ दोहा-पद 8॥ ----- 

होरी पतंगि  उरि कहँ जाहु, 
तुहरि प्रिया एहि कहि कर दियो पुनि रार करन पिय आहु || १ || 
छितिजिहि  पारि हियपिय पिहरियो  छितिज परस न बहुराहु 
पैसिहु गह प्रीति पूरित सब रीति री प्रियातिथि तहँ पाहु || २ || 
भेंटिहि जननी तोहि उर लाइ जलज नयन भरी बाहु 
त मोर हरिदय कर कहनि कहहु  जनि जनित सहित सब काहु || ३ || 
कर गहि जौ  तोहि भाई भउजाइँ सलिल सनेह बरखाहु  
जोरि पानि जुग ए बिनती करिहौ  बाबुल मोहि लए लाहु || ४ || 

NEET-NEET पर 
Neetu Singhal  

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500 में से 499 नंबर वाह 

आज बारहवीं कक्षा का परीक्षाफल आया और उसमें एक प्रतिभावान छात्र ने 500 में से 499 नंबर लाकर दिखाये। समाज को, परिवार को, दोस्तों को उस छात्र पर नाज होगा और होना ही चाहिये। यहाँ आज इस ब्लॉग में मेरा इस विषय पर लिखने का मकसद कुछ और है। हर वर्ष ऐसे कई प्रतिभावन छात्र [… 

कल्पतरुपरVivek  
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लौकी का पौष्टिक हलवा  

(Lauki ka Halwa) 

Sunday, May 27, 2018

"बदन जलाता घाम" (चर्चा अंक-2983)

मित्रों! 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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राधे करेगी पूजा  

(राधा तिवारी "राधेगोपाल ") 

लाल इस वतन के, बलिदान हो रहे हैं ।
मिट्टी में दफन उनके ,एहसान हो रहे हैं ।।

फूलों का पथ न समझो, कांटों भरी डगर है ।
जो देश के लिए नित ,बलिदान हो रहे हैं... 
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प्यासा पंछी 

Sudhinama पर sadhana vaid 
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हमराज 

तेरे हाथों जब जब छला जाता हूँ  
सोओं बार टूट टूट बिखर जाता हूँ 
पलट कर फ़िर जब दर्पण निहारता हूँ 
एक गुमनाम शख्शियत से रूबरू पाता हूँ ... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL 
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प्रश्न हल कैसे हो ? 

प्रश्न हल कैसे हो ?

कल क्या थे आज क्या हैं आप ?
कभी सोचना आत्म विश्लेषण करना 
सोचते सोचते आँखें कब बंद हो जाएंगी 
कहाँ खो जाओगे जान न पाओगे 
पहेलियों में उलझ कर रह जाओगे... 
Akanksha पर Asha Saxena 
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रात, नींद और ख्वाब 


डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 
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दो दो जेठ 

हम तो एक से ही परेशान थे।

अब तो दो दो जेठ आ गये।
बादल कहाँ हैं? घूँघट कर लूँ।
फिर पिया की याद के झोंके सता गये... 
मेरी दुनिया पर Vimal Shukla  
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दो ग़ज़लें ! 

1
भलमनसाहत भारी रख

थोड़ी दुनियादारी रख...
2
एक ग़ज़ल गरमी की ... 
यूँ गर्मी से यारी रख
कूलर की तैयारी रख... 

भलमनसाहत भारी रख
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दर्द-ए-दयार 


purushottam kumar sinha 
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चन्द माहिया:  

क़िस्त 44 

:1: 
खुद तूने बनाया है 
अपना ये पिंजरा 
ख़ुद क़ैद में आया है 
:2: 
किस बात का है रोना 
छूट ही जाना है 
क्या पाना,क्या खोना ? 
:3:... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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बारिश, अल्लू अर्जुन  

और फेसबुक ट्विटर 

Allu Arjun
कल ऑफिस पहुँचे तो उसके बाद जो बारिश शुरू हुई, तो शाम को घर आने तक चलती ही रही। आने में तो हम रैनकोट पहनकर आये, परंतु फिर भी थोड़ा बहुत भीग लिये थे। घरपर निकलने के पहले ही फोन करके कह दिया था कि आज शाम को तो पकौड़ा पार्टी करेंगे, और बरसात का आनंद लेंगे। घर पहुँचे थोड़ा बहुत ट्रॉफिक था, पर 18 किमी बाईक से चलने में डेढ़ घंटा लगना मामुली बात है। कार से जाना नामुनकिन जैसा है, पहले तो दोगुना समय लगेगा और फिर पार्किंग नहीं मिलेगी, एक बार गये थे तो तीन घंटे जाने में लगे थे, पार्किंग नहीं मिली थी तो घर पर आकर वापिस से पार्किंग करनी पड़ी थी। जिसको बताया वो हँस हँसकर लोटपोट था कि तुमने कार से जाने की हिम्मत कैसे जुटाई... 
कल्पतरु पर Vivek  
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"मोह सभी का भंग" (चर्चा अंक-2984)

सुधि पाठकों! सोमवार   की चर्चा में  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। राधा तिवारी (राधे गोपाल)  -- माता का वरदान   ( राधा तिवा...