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Monday, July 16, 2018

"विमोचन एवं काव्य गोष्ठी" (चर्चा अंक-3034)

सुधि पाठकों!
आज 15 जुलाई, 2018 को अपराह्न् 2 बजे से साहित्य शारदा मंच, खटीमा द्वारा ब्लॉग सभागार, खटीमा (ऊधमसिंहनगर) में
समय-अपराह्न 2 बजे से पुस्तक विमोचन एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें-
श्रीमती राधा तिवारी (राधेगोपाल) द्वारा रचित सृजन कुंज” (काव्य संग्रह) एवं जीवन का भूगोल” (दोहा संग्रह) का विमोचन तथा
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' के व्यक्तित्व-कृतित्व पर केन्द्रित विशेषांक राष्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका "ट्रू मीडिया" जुलाई - 2018 अंक का सैकड़ों नागरिकों के मध्य विमोचन किया गया। 
जिसमें खटीमा के माननीय विधायक पुष्कर सिंह धामी, खटीमा फाइबर्स के सी.एम.डी. डॉ. आर सी रस्तोगी एवं श्री विजय नाथ शुक्ल उपजिलाधिकारी खटीमा मुख्य अभ्यागत थे। कार्यक्रम का संचालन संस्था के महा सचिव डॉ. महेन्द्र प्रताप पांडेय ने किया।

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तत्पश्चात कवि गोष्ठी
जिसका प्रसारण ट्रू मीडिया द्वारा चैनल पर होगा।
विस्तृत विवरण कल तक प्रस्तुत किया जायेगा।

उच्चारण पर रूपचन्द्र शास्त्री मयंक  
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बाल कविता  

"बच्चों का मन होता सच्चा"  

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')  

सीधा-सादा. भोला-भाला।
बच्चों का संसार निराला।।

बचपन सबसे होता अच्छा।
बच्चों का मन होता सच्चा... 
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हिटलर के ताबूत में  

आखिरी कील यहीं ठुकी थी 

*‘बर्लिन से बब्बू को’ - चौथा पत्र: छठवाँ हिस्सा* यों तो हमारा हर क्षण महत्वपूर्ण कामों में बीता, पर इस सप्ताह में सबसे अधिक महत्वपूर्ण दिन मुझे वह लगा, जब हम श्रीमती रुथ की व्यवस्था में पोत्सडम देखने गये। यह वह शहर है जहाँ सन 1945 में महत्वपूर्ण चर्चा, जर्मनी के भाग्य को लेकर हुई थी। जर्मनी का बँटवारा इसी शहर में तय हुआ। इंगलैण्ड, फ्रांस, रूस और अमेरिका ने इसी शहर में बैठकर हिटलर के सपनों का अन्तिम संस्कार किया। 
नाजीवाद और फासिस्टवाद की शव पेटिका पर मजबूत कीलें इसी शहर में ठोकी गई... 
एकोऽहम् पर  विष्णु बैरागी 
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पुल 

Rewa tibrewal  at  प्यार 
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खाली लिफ़ाफ़ा 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’  at  
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३१७.  

एसेंस 

वह जो कोने में गुमसुम सी लड़की बैठी है,  
बहुत सहा है उसने,  
बहुत लोगों ने तोड़ा है भरोसा उसका,   
फ़ायदा उठाया है हर तरह से.  
अब कुछ नहीं बोलती वह लड़की,  
उसे नहीं लगता कि कोई सुननेवाला है... 
Onkar  at  कविताएँ 
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ढीठ 

noopuram  at  
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Sunday, July 15, 2018

"आमन्त्रण स्वीकार करें" (चर्चा अंक-3033)

मित्रों! 
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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एक गजल -  

कुर्सी  

(अरुण कुमार निगम) 

 कुछ काम नहीं करता, हर बार मिली कुर्सी 
मंत्री का भतीजा है, उपहार मिली कुर्सी... 
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मोहलतें 

सु-मन (Suman Kapoor)  
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बचपने वाला बचपन ...... 

बचपन ....  
ये ऐसा शब्द और भाव है कि हम चाहे किसी भी उम्र या मनःस्थिति में हों ,एक बड़ी ही प्यारी सी या कह लें कि मासूम सी मुस्कान लहरा ही जाती है | बच्चे को अपने में ही मगन हाथ पैर चला चला विभिन्न भंगिमाएं बना बना कर खेलते देखते ही ,मन अपनी सारी उलझनें भूल कर उसके साथ ही शिशुवत उत्फुल्ल हो उठता है.... 
झरोख़ा पर 
निवेदिता श्रीवास्तव  
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निमंत्रण 

* भ्रमण के लिये बाहर न जा पाऊँ तो साँझ घिरे ,अपने ही बैकयार्ड में टहलना अच्छा लगता है . ड्राइव वे तक, मज़े से सवा-सौ कदम हो जाते है दोनो ओर से ढाई सौ - काफ़ी है कुछ चक्कर लगाने के लिये.धुँधळका छाया होता है ,ऊपर आकाश में तारे ,या चाँद के बढ़ते-घटते टुकड़े . हाँ ,कभी पूरा चाँद या अक्सर ग़ायब भी. चारों ओर हिलते हुये पेड़, क्यारियों के विविधवर्णी फूलों के रंग ईषत् श्यामता लपेटे और मोहक हो उठते हैं. कहीं कोई भूला-भटका पंछी बोल जाता है... 
लालित्यम् पर प्रतिभा सक्सेना  
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आज अचानक मियोट हॉस्पिटल ,चैन्नई के वे सम्मानीय कार्डियोलॉजिस्ट याद आ गए जिन्होनें मुझसे ये कहा था :सर मैंने अपनी चालीस सालों की प्रेक्टिस में अपने किसी मरीज़ को ये नहीं कहा के वह रेड वाइन ले सकता है। कारण उसका ये है के व्यक्ति कब वाइन से उकता कर रम पर आ जाए ,हार्ड एल्कोहल व्हिस्की वोडका पर आ जाए इसका कोई निश्चय नहीं। 

Virendra Kumar Sharma  
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Saturday, July 14, 2018

"सहमे हुए कपोत" (चर्चा अंक-3032)

मित्रों! 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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बाल कविता  

"पंछी"  

( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ) 

नभ में सूरज है आता।
जाने कहाँ चन्द्र छिप जाता।

 पंछी छोड़ घोसलें आते।
 नभ में उड़ कर खुश हो जाते... 
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भले लोग संगीत की माधुरी के अलावा परम्परा की हूक भी है इस परम्परागत हरियाणवी बंदिश में। लेकिन आज के बदले हुए सन्दर्भों में जब मांग जांच को लेकर सनातन धर्मी भारत धर्मी समाज में पर्याप्त हंगामा है ,किसी लड़की का यूं मुंह खोलके मांगना -पीड़िया (यहां पीलिया में ल और ड़ के बीच की ध्वनि है ,ल के नीचे बिंदी जड़िये )या कोई और नेग थोड़ा अटपटा सा ज़रूर लगता है। हरियाणा जैसे राज्यों में तो लड़की के आने पे ही गर्भ पे पहरा है। लड़किया कमतर होती जातीं हैं। जहाज हवाई ही नहीं सात समुन्द्र की यात्रा कर रहीं हैं आज भारतीय नेवल फोर्सिज की युवतियां। मांग जांच कैसी। बदलो इन लोकगीतों को ढालों आधुनिक हालातों में इनकी शब्दावलियों को यही श्रेय का मार्ग है प्रेय के मार्ग में बहुत बाधाएं हैं सब माया ही माया बंधन ही बंधन हैं यहां। 

Virendra Kumar Sharma 
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----- ॥ दोहा-पद २० ॥ ----- 

  ----- ॥ गीतिका ॥ -----
हरिहरि हरिअ पौढ़इयो, जी मोरे ललना को पलन में.,

बल बल भुज बलि जइयो, जी मोरे ललना को पलन में., 



बिढ़वन मंजुल मंजि मंजीरी, 

कुञ्ज निकुंजनु जइयो, जइयो जी मधुकरी केरे बन में.....  
NEET-NEET पर Neetu Singhal 
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शिकायत थी जिंदगी से ...... 

शिकायत थी जिंदगी से कभी कोई हमनवां नहीं मिलता ....  
आज सोचती हूँ ( तो ) समझती हूँ कि मिलता है ,  
और अक्सर ही मिलता है ....  
बस कभी उनको तो कभी हमको समझ नही आता ....  
दोनों समझ सकें बस वो लम्हा नहीं मिलता .....  
निवेदिता 
झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव 
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बर्लिन में भी  

‘नमूने’  

मिल ही गए 

*‘बर्लिन से बब्बू को’ -  
चौथा पत्र:  
चौथा हिस्सा*  
आज दिन में हम लोग खरीददारी के लिये बाजार में गए। खरीददारी क्या करनी थी, एक रस्म अदाई मात्र थी। जो कुछ थोड़े पैसे हमारी जेबों में थे, उनसे क्या लिया जा सकता था? कुछ भी तो नहीं। पर टी. वी. टॉवर के पास बना हुआ बर्लिन का मुख्य बाजार “सेन्ट्रम” अपने आप में एक विशालतम बाजार है। मेरा ऐसा अनुमान है कि इस बाजार में प्रतिदिन नहीं नहीं तो भी एक या डेढ़ करोड़ रुपयों का सौदा बिकता होता। अलग-अलग मंजिलों पर चित्रों द्वारा उन सभी चीजों के संकेत कर दिये गये हैं जो कि आप वहाँ खरीद सकते हैं। काउण्टरों पर सारा काम लड़कियाँ देखती हैं.... 
एकोऽहम् पर विष्णु बैरागी 
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ग़ाफ़िल हूँ मुझको देखा ओ भाला करे कोई 

गर कर सके तो क्यूँ न उजाला करे कोई
लेकिन ये क्या के ख़ुद का रू काला करे कोई

ले ले कहाँ है यार किसी भी लुगत में अब
सो चाहिए के अब तो न ला ला करे कोई... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’  
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"विमोचन एवं काव्य गोष्ठी" (चर्चा अंक-3034)

सुधि पाठकों! -- "विमोचन एवं काव्य गोष्ठी"   आज 15 जुलाई , 2018 को अपराह्न् 2 बजे से साहित्य शारदा मंच , खटीमा द्वा...