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Monday, July 09, 2018

"देखना इस अंजुमन को" (चर्चा अंक-3027)

सुधि पाठकों!
सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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दोहे  

"रखो मधुर संबंध"  

( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ) 

खेल रहे जग में सभी, यहाँ अनोखा खेलl
  कभी जुदाई है यहाँ, और कभी है मेल... 
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जुस्तजू 

जुस्तजू इश्क़ की ऐसी लगी  
फ़रियाद हवाओं संग बह चली  
मुशायरा, मशवरा ऐसा अंदाज ए वयां बन आयी 
हर जज्बातों मेँ शायरी बन आयी... 
RAAGDEVRAN पर MANOJ KAYAL 
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अब न मानूंगी भगवान तुझे 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 
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ऐ साकी ! 

सु-मन (Suman Kapoor) 
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उम्र कैसे निकल जाती है.... 

श्वेता सिन्हा 

मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  
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राम ने कहा था 

“हे पति अनुगामिनी सीता, हे परम आदर्श सहधर्मिणी ! संसार के हर अर्थ में सर्वोच्च पति परायणा पत्नी सिद्ध होने के बाद भी क्या बताओगी कि अशोक वाटिका से मुक्त होने के बाद अपने निष्कलुष चरित्र पर लोगों के घिनौने आक्षेप तुमने क्यों सहे... 
Sudhinama पर sadhana vaid  
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सामने वाला दरवाजा  

Yeh Mera Jahaan पर 

गिरिजा कुलश्रेष्ठ 

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इस जैसी सरकार..।। 

इस जैसी सरकार अरे रे रे रे ना बाबा  
कौन करेगा ऐतबार अरे रे रे रे ना बाबा... 
kamlesh chander verma 
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बूढ़ा पीपल 

प्यार पर Rewa tibrewal  
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पुरसुकून 

Sunehra Ehsaas पर 
Nivedita Dinkar 
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घिर घिर आओ कारे बदरवा 

छाओ घटा घनघोर लागे अगन जिया में 
बयार के बिरहिनी धरा को मूर्छा छायी 
ताकत रस्ता पूछे नहरिया... 
अनकहे बोल पर anchal pandey  

6 comments:

  1. सुन्दर चर्चा।
    आपका आभार राधा बहन जी।

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  2. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  3. वाह ! बहुत ही सुन्दर सार्थक सूत्रों से सुसज्जित आज का चर्चामंच ! मेरी प्रस्तुति को आज के मंच पर स्थान देने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार राधा जी ! सस्नेह वन्दे !

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  4. बहुत बढ़िया चर्चा प्रस्तुति

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  5. बहुत ही ज्ञानवर्धन और सरस प्रस्तुती!!!!

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