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Wednesday, August 01, 2018

"परिवारों का टूटता मनोबल" (चर्चा अंक-3050)

मित्रों! 
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 
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दोहे  

"मुंशी प्रेमचन्द जयन्ती पर विशेष"  

उपन्यास 'सेवासदन', 'गबन' और 'गोदान'।
हिन्दी-उर्दू अदब पर, किया बहुत अहसान।।

'रूठीरानी' को लिखा, लिक्खा 'मिलमजदूर'।
प्रेमचन्द मुंशी रहे, सदा मजे से दूर।।

लेखन में जिनका नहीं, झुका कभी किरदार।
उस लमही के लाल को, नमन हजारों बार।।
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ख़्वाब आते रहे!..... 

डॉ. अनिल चड्ढा 

मेरी धरोहरपरyashoda Agrawal  
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चन्द माहिया :  

क़िस्त 50 

1
पल जो भी गुज़र जाताछोड़ के कुछ यादेंफिर लौट के कब आता ?
2होता भी अयाँ कैसेदिल तो ज़ख़्मी हैकहती भी ज़ुबाँ कैसे ?
3 तुम ने मुँह फेरा हैटूट गए सपनेदिन में ही अँधेरा है... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक  
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सीला सावन 

Sudhinama पर sadhana vaid  
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केंसर कवर: बीमा भी और पुण्य लाभ भी 

‘राष्ट्रीय केंसर रोकथाम एवम् अनुसन्धान संस्थान’ (एनआईसीपीआर) तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी कुछ आँकड़े अत्यधिक भयावह हैं - - प्रति वर्ष 7,00,000 नए केंसर रोगी सामने आ रहे हैं। - केंसर मौतों की संख्या 5,56,400 प्रति वर्ष हो गई है। - महिला केंसर रोगियों के मामले में चीन और अमरीका के बाद भारत तीसरे नम्बर पर है। - 2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार लगभग 14,00,000 महिलाएँ केंसरग्रस्त पाई गईं। डॉक्टरों तक नहीं पहुँच पाई महिलाएँ इनमें शरीक नहीं हैं... 
एकोऽहम् पर विष्णु बैरागी 
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फेसबुक में पुस्तक चर्चा (1) 

फेसबुक में पढ़ाकू मित्रों द्वारा अपनी पढ़ी हुई पुस्तकों की चर्चा करते हुए नित्य पोस्ट डाली जा रही हैं. उनकी पोस्ट को यहाँ इस उद्देश्य से कॉपी पेस्ट किया जा रहा है ताकि सनद रहे और वक्त पर काम आये . फेसबुक की पोस्ट अक्सर गायब हो जाती हैं. (1) वंदना अवस्थी दुबे July 28 at 1:37 PM · रदीप सक्सेना जी ने मुझे टोका भी कि तुम पढ़ती भी हो या बिना पढ़े हर दूसरे दिन किताब जमा करा जाती हो... 
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
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9 comments:

  1. शुभ प्रभात
    आभार
    सादर

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  2. सुन्दर बुधवारीय प्रस्तुति।

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  3. सादर धन्यवाद ..
    http://themissedbeat.blogspot.com/2018/07/blog-post_30.html

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  4. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  5. सुन्दर सार्थक सूत्र रोचक चर्चा ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

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  6. बेहतरीन लिंक संयोजन

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  7. आदरनीय सर -- बहुत ही बढ़िया लिंकों के साथ मेरी रचना को स्थान देने के लिए आभारी रहूंगी | आपके सभी लिंक सार्थक और पठनीय हैं | आदरणीय दिवंगत शायर पर प्रस्तुति ने मन को सोचने पर मजबूर करते हुए पीड़ा का आभास करवाया | और आदरणीय राधा जी का वीडियो बहुत ही कास लगा | सादर आभार और नमन |

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  8. क्षमा चाहती हूँ सुनीता जी के स्थान पर राधा जी का नाम लिख दिया |बधाई आदरणीय सुनीता जी |

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"सुहानी न फिर चाँदनी रात होती" (चर्चा अंक-3134)

सुधि पाठकों! बुधवार   की चर्चा में  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। राधा तिवारी (राधे गोपाल) -- दोहे   "शरदपूर्णिमा रात...