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शुक्रवार, अगस्त 24, 2018

"सम्बन्धों के तार" (चर्चा अंक-3073)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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बाल कविता  

"गरम पकौड़ी" 

( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ) 

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जब बाहर वर्षा होती है सब घर में आ जाते हैं  l
मां के हाथों की हम सब गरम पकौड़ी खाते हैं ... 
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कुछ यूं ही 

डॉ. अपर्णा त्रिपाठी  
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महाशिवरात्री 

Mere Man Kee पर 
Rishabh Shukla  
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झील सी गहरी आँखें 


झील सी गहरी नीली आँखेंखोज रहीं खुद को हीनीलाम्बर में धरा पररात में आकाश गंगा में |उन पर नजर नहीं टिकतीकोई उपमा नहीं मिलतीपर झुकी हुई निगाहें कई सवाल करतीं... 

Akanksha पर 
Asha Saxena  
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वो आँखें 


मुझे छेड़तीं, मुझे लुभातीं,
सखियों संग उपहास उड़ातीं,
नटखट, भोली, कमसिन आँखें !
हर पल मेरा पीछा करतीं,
नैनों में ही बाँधे रहतीं,
चंचल, चपल, विहँसती आँखें... 

Sudhinama पर 
sadhana vaid  
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भटकना 

कारवाँ वो ठहर सा गया था  
निकला था जो मुक़ाम की राह  
अनजाने मोड़ पर ठिठक गया था  
कुछ रहस्यमयी किरणों का 
उजाला सा था ... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL 
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I hate you 

प्यार    पर  Rewa tibrewa 
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दिल धड़कता ही नहीं 

धड़कता ही नहीं है ये दिल आज-कल...
संवेदन शून्य, संज्ञा विहीन हुआ दिल,गर उर कंठ इसे कोई लगाता,झकझोर कर धड़कनों को जगाता,घाव कुछ भाव से भर जाता,ये दिल! शायद फिर धड़क जाता... 

purushottam kumar sinha  

7 टिप्‍पणियां:

  1. विविध रंगी सूत्रों से सुसज्जित आज का चर्चामंच ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

    जवाब देंहटाएं
  2. एक अनूठी इन्द्रदानुषी चर्चा से रूबरू करने के लिए धन्यवाद्

    जवाब देंहटाएं
  3. मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

    जवाब देंहटाएं

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

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